नागपुर। झीलों और संतरों की नगरी नागपुर के रेशिमबाग में गत 8 जून से निरंतर चल रहे राष्ट्र सेविका समिति के राष्ट्रीय स्तर के ‘प्रवीण शिक्षा वर्ग’ का भव्य समापन समारोह संपन्न हो गया है।
23 जून की शाम को नागपुर के प्रतिष्ठित सुरेश भट्ट सभागार में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में देश और दुनिया के वर्तमान परिदृश्य में भारतीय जीवन-मूल्यों की प्रासंगिकता पर गंभीर वैचारिक मंथन हुआ।
समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्र सेविका समिति की प्रमुख संचालिका माननीय शांता कुमारी जी (शान्तक्का) ने राष्ट्र-निर्माण और वैश्विक कल्याण में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया।
“विश्व भारत को केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक नेतृत्व के रूप में देख रहा है”
अपने मुख्य दीक्षांत उद्बोधन में प्रमुख संचालिका शांता कुमारी जी ने कहा कि आज पूरी दुनिया भारत की ओर एक नई उम्मीद के साथ देख रही है। उन्होंने भारतीय दर्शन की वैश्विक स्वीकार्यता पर प्रकाश डाला-
“वर्तमान समय में विश्व भारत को केवल एक उभरती हुई आर्थिक या सैन्य शक्ति के रूप में नहीं स्वीकार रहा, बल्कि उसे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नेतृत्व देने वाले राष्ट्र के रूप में देख रहा है। हमारी सनातन संस्कृति के मूल तत्व जैसे— पारंपरिक नमस्कार, योग विज्ञान और ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ (पूरा विश्व एक परिवार है) के विचार आज पूरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। भारतीय जीवन-मूल्यों की स्वीकार्यता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निरंतर बढ़ रही है।”
उन्होंने वैश्विक अशांति पर चिंता व्यक्त करते हुए आगे कहा-
“आज दुनिया भर में नेतृत्व और वर्चस्व की अंधी होड़ मची है, जिसके कारण विभिन्न देशों के बीच संघर्ष और हिंसा पैर पसार रही है। लाखों निर्दोष लोग युद्धों की विभीषिका का शिकार हो रहे हैं। ऐसे संकटपूर्ण समय में केवल और केवल एकात्म ‘हिन्दू जीवन-दृष्टि’ ही संपूर्ण विश्व को वास्तविक शांति, समन्वय, संतुलन और सहअस्तित्व का सच्चा मार्ग दिखा सकती है।”
आंकड़ों में समझिए प्रवीण शिक्षा वर्ग 2026 की व्यापकता
इस वर्ष आयोजित हुए इस विशेष प्रशिक्षण वर्ग में भौगोलिक और व्यावसायिक रूप से राष्ट्र की विविधता का एक अनूठा संगम देखने को मिला। वर्ग से जुड़े मुख्य सांख्यिकीय आंकड़े नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट हैं:
| प्रशिक्षण वर्ग के मुख्य आयाम | समारोह एवं वर्ग का प्रामाणिक विवरण |
|---|---|
| कुल प्रशिक्षण अवधि | 08 जून से 23 जून 2026 तक (रेशिमबाग, नागपुर) |
| प्रशिक्षण प्राप्त कुल कार्यकर्ता बहनें | 112 शिक्षार्थी बहनें |
| भौगोलिक सहभागिता (Geographical Reach) | भारत के 27 विभिन्न प्रांतों सहित पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी प्रतिनिधित्व। |
| समारोह की मुख्य अतिथि (Chief Guest) | महामाया चटर्जी जी (वरिष्ठ अधिवक्ता, सर्वोच्च न्यायालय) |
डॉक्टर, इंजीनियर से लेकर गृहणियों तक ने लिया शौर्य का प्रशिक्षण
इस शिक्षा वर्ग की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें समाज के प्रत्येक वर्ग, विधा और आधुनिक प्रोफेशन से जुड़ी महिलाओं ने सहभागिता की।
शिक्षार्थियों की विविध शैक्षणिक एवं सामाजिक पृष्ठभूमि
प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली बहनों में उच्च शिक्षित डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता (लॉयर्स), पीएचडी स्कॉलर्स, शिक्षिकाएं, प्रशासनिक कर्मचारी, कॉरपोरेट/निजी क्षेत्र (Private Sector) में कार्यरत कामकाजी महिलाएं, गृहिणियां और युवा विद्यार्थी मुख्य रूप से शामिल रहीं। यह विविधता दर्शाती है कि समिति का कार्य समाज के हर स्तर पर आधुनिक और प्रबुद्ध महिलाओं के बीच तेजी से पैठ बना रहा है।
शारीरिक शौर्य प्रदर्शन और घोष वादन से दी मानवंदना
समापन कार्यक्रम के दौरान मैदान पर शिक्षार्थी बहनों ने अपने कड़े पंद्रह दिवसीय कड़े प्रशिक्षण का जीवंत प्रदर्शन किया, जिसे देखकर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। बहनों द्वारा प्रस्तुत मुख्य शारीरिक और सांस्कृतिक विषय निम्नलिखित थे-
- शारीरिक विधाएं: आत्मरक्षा और शौर्य के प्रतीक दंड (Lathi), यष्टि, नियुद्ध (सशस्त्र/निःशस्त्र युद्ध कला) का हैरतअंगेज प्रदर्शन।
- आध्यात्मिक संतुलन: शारीरिक और मानसिक एकाग्रता के लिए उत्कृष्ट योग विधाओं का सामूहिक प्रदर्शन किया गया।
- पारंपरिक खेल: महाराष्ट्र और भारतीय संस्कृति की पहचान माने जाने वाले पारंपरिक और ऊर्जावान लेज़िम (Lezim) नृत्य का शानदार प्रदर्शन।
- घोष वाद्य प्रदर्शन: अलग-अलग तरह के घोष वाद्यों (Band Instruments) का अत्यंत अनुशासित और सुमधुर वादन कर भारत माता को सामूहिक मानवंदना अर्पित की गई।
सर्वोच्च न्यायालय की मुख्य अतिथि अधिवक्ता महामाया चटर्जी ने भी प्रशिक्षणार्थियों के अनुशासित प्रदर्शन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
समारोह के समापन पर सभी संभागियों ने राष्ट्र और समाज की सेवा के संकल्प को और सुदृढ़ करते हुए अपने-अपने नियत कार्यक्षेत्रों की ओर प्रस्थान किया।













