गायत्री मंत्र के जप से जीवन में आती है सकारात्मक ऊर्जा और विवेक: डॉ. प्रणव पण्ड्या
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गायत्री मंत्र के जप से जीवन में आती है सकारात्मक ऊर्जा और विवेक: डॉ. प्रणव पण्ड्या

अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि माँ गायत्री सद्बुद्धि प्रदान करती हैं और ओंकार के चिंतन से मन में श्रेष्ठ विचार विकसित होते हैं, जिससे साधक का जीवन आध्यात्मिक आनंद और शांति से परिपूर्ण होता है। इससे उपासक का मन स्वर्गीय अनुभव से भर जाता है।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Mahak Singh
Jun 24, 2026, 02:43 pm IST
in उत्तराखंड
प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

हरिद्वार: अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि माँ गायत्री सद्बुद्धि प्रदान करती हैं और ओंकार के चिंतन से मन में श्रेष्ठ विचार विकसित होते हैं, जिससे साधक का जीवन आध्यात्मिक आनंद और शांति से परिपूर्ण होता है। इससे उपासक का मन स्वर्गीय अनुभव से भर जाता है।

गायत्री साधना की महत्ता

वे गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित गायत्री जयंती पर्व के मुख्य सभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गायत्री साधना मनुष्य के अंत:करण को परिष्कृत करती है और उसे श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा देती है। जब व्यक्ति के विचार पवित्र होते हैं, तब उसके कर्म भी उत्कृष्ट बनते हैं। गायत्री मंत्र का नियमित जप एवं ध्यान व्यक्ति के भीतर सकारात्मक ऊर्जा, आत्मविश्वास और विवेक का संचार करता है। इसी के माध्यम से व्यक्ति स्वयं के साथ-साथ समाज और राष्ट्र के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि युगऋषि परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा ने अपने जीवन में साधना, स्वाध्याय और सेवा का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत किया। उन्होंने मानव मात्र के उत्थान, नैतिक जागरण और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

संस्था की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि गायत्री आध्यात्मिक चेतना की देवी हैं, जबकि सावित्री भौतिक सृजन और जीवन की संरचनाओं की अधिष्ठात्री शक्ति हैं। जो साधक इन दोनों स्वरूपों के समन्वित दर्शन को समझकर अपने जीवन में उतार लेता है, वह माँ आदिशक्ति की विशेष अनुकम्पा का अधिकारी बन जाता है। उन्होंने कहा कि जब तक साधना को जीवन के व्यवहार, कर्म और संस्कारों में नहीं उतारा जाता, तब तक वह केवल शब्द बनकर रह जाती है। वास्तविक साधना वही है, जो व्यक्ति के जीवन में परिवर्तन लाए और उसके व्यक्तित्व को दिव्यता की दिशा में अग्रसर करे। गायत्री को अंगीकार करने पर साधक के जीवन में अनेक सकारात्मक परिवर्तन विभिन्न रूपों में प्रकट होते हैं। गायत्री जयंती के अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुखद्वय से पावन गुरुसत्ता के प्रतिनिधि स्वरूप सैकड़ों नये साधकों को गायत्री महामंत्र से दीक्षित कराया, तो वहीं मुण्डन, उपनयन सहित विभिन्न संस्कार भी बड़ी संख्या में नि:शुल्क सम्पन्न कराये गये। इस अवसर पर प्रमुखद्वय ने गुरु की छाया में, हमें भक्ति दो माँ सहित 30 प्रज्ञागीतों के कराओके म्यूजिक ट्रैक का विमोचन किया। इस दौरान देश-विदेश से आये हजारों साधकों ने प्रतिभाग किया।

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