टीकमगढ़ (मध्य प्रदेश)। केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में इतिहास और प्राचीन भारतीय ज्ञान का एक अभूतपूर्व खजाना सामने आ रहा है। जिले के विभिन्न प्राचीन मंदिरों, पुस्तकालयों और व्यक्तिगत संग्रहों से सदियों पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित पांडुलिपियां (Ancient Manuscripts) प्राप्त हो रही हैं।
इन अमूल्य पांडुलिपियों का तेजी से डिजिटलाइजेशन (Online Digitization) किया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में विशेषज्ञ इनका गहन अध्ययन कर सकें। अब तक जिले में कुल 825 पांडुलिपियों को ऑनलाइन किया जा चुका है, जिनमें से 234 पांडुलिपियों को ‘भारत ज्ञान मंडप’ द्वारा आधिकारिक रूप से स्वीकृत (Approve) भी किया जा चुका है।
प्राचीन जैन भूगोल और ‘जम्बूद्वीप’ का दुर्लभ मानचित्र आया सामने
मिशन के तहत मिली सबसे आश्चर्यजनक और ऐतिहासिक खोजों में एक विशाल हस्तलिखित नक्शा (Ancient Map) शामिल है। ज्ञान भारतम् मिशन की नोडल टीम के सदस्य अनुपम दीक्षित ने बताया कि प्रारंभिक वैज्ञानिक दृष्टि से यह चित्र किसी प्राचीन जैन या भारतीय ब्रह्माण्ड-विज्ञान (Cosmology) का हस्तलिखित मानचित्र प्रतीत होता है।
“इस प्राचीन मानचित्र में कुछ बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट शब्द पहचाने जा सकते हैं— जैसे भरत क्षेत्र, ऐरावत क्षेत्र, विदेह, गंगा, सिन्धु, लवण समुद्र और मेरु (जो संभवतः मानचित्र के मध्य भाग में है)। ये सभी नाम जैन आगमों और प्राचीन जैन भूगोल में वर्णित ‘जम्बूद्वीप’ की संरचना से पूरी तरह मेल खाते हैं। चित्र के केंद्र में एक वृत्ताकार संरचना है, जिसके चारों ओर विशाल पर्वत-मालाएं और विभिन्न क्षेत्र दिखाए गए हैं। बाहर की ओर समुद्र और द्वीपों की परतें बनी हैं तथा किनारों पर स्पष्ट रूप से प्राचीन नदियों और क्षेत्रों के नाम अंकित हैं। यह त्रिलोक या लोकविज्ञान से संबंधित कोई अत्यंत दुर्लभ जैन चित्र हो सकता है।” – अनुपम दीक्षित, नोडल टीम
कहाँ से मिलीं कितनी पांडुलिपियां?
टीकमगढ़ जिले के अलग-अलग स्थानों, जैन मंदिरों और प्रबुद्ध नागरिकों के निजी संग्रह से प्राप्त हुई इन हस्तलिखित प्राचीन पांडुलिपियों और शिलालेखों का सांख्यिकीय विवरण नीचे दी गई तालिका में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है-
| प्राप्ति स्थल / स्रोत (Source of Manuscripts) | प्राप्त हस्तलिखित पांडुलिपियों की संख्या |
|---|---|
| माझ पंचायती जैन मंदिर | 247 |
| बाजार जैन मंदिर | 141 |
| खरगापुर जैन मंदिर | 121 |
| दरगुवां जैन मंदिर | 107 |
| जिला पुस्तकालय (District Library) | 75 |
| नया जैन मंदिर | 62 |
| अजनौर जैन मंदिर | 25 |
| बड़ागांव फलहोड़ी जैन मंदिर | 13 |
| व्यक्तिगत संग्रह (संजय जैन- 7, अजीत श्रीवास्तव- 6, क्षत्रपाल सिंह सोलंकी- 4, दुष्यंत द्विवेदी- 3, शिवराज सिंह श्रीवास्तव- 1) | 21 |
| सुनहरा तालाब माडूमर | 03 (दुर्लभ प्राचीन शिलालेख) |
| कुल डिजिटलाइज्ड पांडुलिपियां | 825 |
खरगापुर जैन मंदिर में मिली ज्योतिष गणना की पुस्तक और लकड़ी का ‘पाशा’
इस खोज के एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डालते हुए लाइब्रेरियन विजय मेहरा ने बताया कि खरगापुर के ऐतिहासिक जैन मंदिर से ज्योतिष विज्ञान (Astrology) से जुड़ी एक बेहद ही खास प्राचीन पुस्तक प्राप्त हुई है। इस पुस्तक के साथ ही एक प्राचीन लकड़ी का पाशा (Dice) भी मिला है।
- अंकों और अक्षरों का रहस्य: प्राप्त हुए इस प्राचीन लकड़ी के पाशे पर कुछ विशेष अंक और प्राचीन अक्षर खुदे हुए हैं।
- गणना की अनूठी पद्धति: जानकारों का मानना है कि प्राचीन समय में हमारे मनीषी और ज्योतिषाचार्य इस पाशे के माध्यम से जटिल ज्योतिषीय गणनाएं (Calculations) किया करते थे।
- शोध के बाद खुलेंगे नए रहस्य: विजय मेहरा के अनुसार, इस पाशे और पुस्तक की विस्तृत जांच एवं राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों द्वारा अध्ययन किए जाने के बाद यह खोया हुआ ज्ञान आधुनिक ज्योतिष विज्ञान के लिए एक युगांतकारी मोड़ साबित हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, जिले भर से मिली इन अलग-अलग विधाओं की पांडुलिपियों में ब्रह्मांड विज्ञान के साथ-साथ प्राचीन आयुर्वेद, खगोल शास्त्र और मानव जीवन को निरोगी बनाने वाले विभिन्न असाध्य रोगों के उपचार से जुड़ी अत्यंत उपयोगी सामग्रियां भी प्राप्त हुई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हमारे प्राचीन मनीषियों, ऋषियों एवं विद्वानों द्वारा संजोए गए इस सार्वभौमिक ज्ञान का लाभ आने वाले समय में न केवल भारत को बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण को मिलेगा।

















