Explainer: सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने से क्यों बौखलाया कांग्रेस-लेफ्ट इकोसिस्टम?
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Explainer: सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने से क्यों बौखलाया कांग्रेस-लेफ्ट इकोसिस्टम?

कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया गया। 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे नरसंहार में हिंदुओं के रक्षक गोपाल पाठा की वीरगाथा और उनकी ऐतिहासिक भूमिका जानिए।

Written byअभय कुमारअभय कुमार — edited by कुलदीप सिंह
Jun 22, 2026, 11:44 am IST
inविश्लेषण
Suvendu Adhikari

शुभेंदु अधिकारी

कोलकाता म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ने एक अधिसूचना जारी कर इस कॉरपोरेशन के अंतर्गत आने वाले सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड कर दिया है। सिर्फ बंगाल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे भारत के लिए गोपाल मुखर्जी उर्फ़ गोपाल पाठा बहुत ही महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। उन्होंने कोलकाता के 16 अगस्त 1946 के नरसंहार में न केवल हिंदुओं को बचाया बल्कि हिंदुओं पर जुल्म ढाने वाले अतिक्रमियों को सबक भी सिखाया था।

ये सभी अतिक्रमी एक ख़ास समुदाय के ही थे। गोपाल मुखर्जी की अन्य कई कारणों से भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 15 अगस्त 1947 को जब भारत स्वतंत्र हो रहा था तब गांधी जी कोलकाता में ही थे और मुसलमानों के एक समूह ने गांधी जी पर आक्रमण करने का कार्यक्रम बना लिया तो गोपाल मुखर्जी ने ही गांधी जी को सुरक्षित किया था। उस समय अंग्रेजों ने भी गांधी जी से हाथ खींच लिया था।

मुस्लिम लीग के ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ में हिन्दुओं को गोपाल पाठा ने बचाया

16 अगस्त 1946 को मुस्लिम लीग द्वारा घोषित ‘डायरेक्ट एक्शन डे’ के दौरान जब कलकत्ता में हिंदुओं का नरसंहार हो रहा था, तब गोपाल चंद्र मुखोपाध्याय (गोपाल पाठा) ने अपनी जान की परवाह किए बिना ‘भारत जातीय वाहिनी’ नामक संगठन बनाकर हिंदुओं की रक्षा की थी। गोपाल मुखर्जी उर्फ गोपाल पाठा का कई अन्य महत्वपूर्ण योगदान देश को है। डायरेक्ट एक्शन डे सरकार द्वारा एक प्रायोजित नरसंहार था, जिसका उद्देश्य पूरी तरह से हिंदुओं को कोलकाता से भगा देना था। जिससे, कि विभाजन में कोलकाता को भी पूर्वी पाकिस्तान में मिलाया जा सके। देश के वर्तमान भौगोलिक स्थिति को बनाये रखने में गोपाल पाठा की बड़ी भूमिका रही है।

इसे भी पढ़ें: पहाड़ों पर भीड़ का कहर: ग्लेशियर पिघल रहे, भाखड़ा बांध भर चुका

कांग्रेस ने गोपाल मुखर्जी को किया किनारे

स्वतंत्रता के बाद कांग्रेस की सरकारों ने गोपाल मुख़र्जी को कोई भी महत्व नहीं दिया। क्योंकि, उसे सिर्फ जवाहरलाल नेहरू को ही महिमामंडित करना था। कांग्रेसी सरकार किसी भी ऐसे प्रतीक या किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार का गौरव या सम्मान नहीं देना चाहती थी, जिसने हिंदुओं के लिए काम किया हो। कांग्रेसी सरकारों के द्वारा गोपाल मुखर्जी का नाम सारे स्थानों से निकाल दिया गया था। बल्कि नरसंहार के जनक सुहरावर्दी का नाम अवश्य रखा गया था। कांग्रेस के बाद की कम्युनिस्ट सरकारों ने भी इस मामले में कांग्रेस की सरकारों के मार्ग पर ही चलना तय किया था।

सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड करने पर सबसे अधिक प्रतिकार करने वालो में माकपा के मोहम्मद सलीम और कांग्रेस पार्टी के पवन खेड़ा शामिल हैं। ऐसा अनुमान है कि ये दोनों अपने पार्टी नेतृत्व के इशारे पर ऐसा कर रहे हैं। माकपा और कांग्रेस पार्टियों में भाजपा विरोध के नाम पर एका अवश्य हैं मगर आपसी राजनीति में एक दूसरे के धुर विरोधी हैं।

Topics: गोपाल मुखर्जी रोडसुहरावर्दी एवेन्यू नाम बदलावगोपाल पाठागोपाल चंद्र मुखोपाध्यायडायरेक्ट एक्शन डे 1946
अभय कुमार
अभय कुमार
अभय कुमार, सीएसडीएस (CSDS ), इप्सोस (IPSOS) सहित कई रिसर्च और मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं। भारतीय राजनीति सामाजिक और अंतरराष्ट्रीय मामलो से जुड़े मुद्दों पर खास दिलचस्पी है और इसके लिए लिखते रहते हैं। [Read more]
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