भारत ने ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भी किस प्रकार बनाए रखी तेल आपूर्ति ?
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भारत ने ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भी किस प्रकार बनाए रखी तेल आपूर्ति ?

ईरान-अमेरिका युद्ध के बावजूद भारत ने तेल आयात को पटरी पर ला दिया। जून 2026 में आयात बढ़कर 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन पहुंचा, जिसमें रूस का योगदान 54% रहा। जानें कैसे रूस, UAE और अन्य देशों ने मदद की।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jun 22, 2026, 11:22 am IST
inभारत, बिजनेस
India russian oil Imports

प्रतीकात्मक तस्वीर

खाड़ी में ईरान और अमेरिका के युद्ध के कारण दुनियाभर में तेल का संकट पैदा हो गया। लेकिन, इस संकट में भी भारत ने इस परेशानी का तोड़ निकालते हुए तेल सप्लाई को बनाए रखा। इसी क्रम में कच्चा तेल आयात जून में सामान्य स्तर पर लौट आया है। पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परेशानियों के बाद अब स्थिति सुधर गई है। केपलर डेटा के मुताबिक, जून में भारत ने औसतन 5 मिलियन बैरल प्रति दिन से थोड़ा ज्यादा तेल आयात किया है। यह अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के औसत 4.9 मिलियन बैरल प्रति दिन से ज्यादा है। तेल मंत्रालय के आंकड़े भी करीब 5 मिलियन बैरल रोजाना ही दिखाते हैं।

पहले आई थी गिरावट

28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद मार्च में आयात 14% घटकर 4.5 मिलियन बैरल प्रति दिन रह गया था। फरवरी में यह 5.2 मिलियन बैरल था। मई में सुधार हुआ और आयात 4.96 मिलियन बैरल तक पहुंच गया। सरकारी आंकड़ों में मई का आंकड़ा 5 मिलियन बैरल था।

रूस का रिकॉर्ड योगदान

जून में रूस ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। उसने 2.7 मिलियन बैरल प्रति दिन तेल भेजा, जो भारत के कुल आयात का 54% है। केपलर के लीड एनालिस्ट निखिल दुबे कहते हैं कि रूस के ज्यादा बैरल भारत के लिए उपलब्ध हो गए। यूक्रेन के हमलों से रूसी रिफाइनरी प्रभावित हुईं और चीन की मांग कम रहने से रूस का तेल भारत की तरफ ज्यादा आया। गुजरात में रूस-समर्थित न्यारा एनर्जी की रिफाइनरी ने अपना रखरखाव शटडाउन पूरा किया, जिससे भी रूसी तेल की खपत बढ़ी।

इसे भी पढ़ें: ट्रंप की धमकियों के बाद स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान बातचीत तनावपूर्ण, ईरानी टीम ने किया वॉकआउट

मार्च में रिफाइनरियों ने रूसी तेल की खरीद दोगुनी कर दी थी। अमेरिका ने ग्लोबल ऑयल प्राइस स्थिर रखने के लिए प्रतिबंधों में छूट दी। समुद्र में पहले से तैर रहे रूसी कार्गो ने भी मदद की।

दूसरे देशों ने भी साथ दिया

ईरान युद्ध से अचानक सप्लाई प्रभावित होने पर भारतीय रिफाइनरियों ने दुनिया भर से विकल्प तलाशे। मार्च में अंगोला ने 3.34 लाख बैरल रोजाना भेजे और भारत का तीसरा सबसे बड़ा सप्लायर बन गया। वेनेजुएला मार्च से महत्वपूर्ण स्रोत बना। जून में यह चौथा सबसे बड़ा सप्लायर रहा – 2.92 लाख बैरल रोजाना, यानी कुल आयात का 6%।

संयुक्त अरब अमीरात जून में दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है – 5.73 लाख बैरल रोजाना। मार्च में हार्मुज से परेशानी हुई तो UAE ने फुजैरा टर्मिनल से लोडिंग शुरू की, जिससे आपूर्ति जल्दी सामान्य हुई। सऊदी अरब ने भी मार्च-अप्रैल में यानबू (रेड सी) टर्मिनल से सप्लाई जारी रखी। लेकिन मई-जून में उसका तेल महंगा पड़ने से आयात कम हो गया। इस तरह अलग-अलग देशों से तेल लेने की रणनीति ने भारत को हार्मुज संकट का असर कम करने में मदद की। रूस की मजबूत आपूर्ति और दूसरे विकल्पों ने मिलकर आयात को फिर पटरी पर ला दिया है।

Topics: ईरान अमेरिका युद्ध तेल संकटरूस भारत तेल आयातभारत कच्चा तेल आयातभारत तेल आयात जून 2026
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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