देश की सर्वोच्च इंजीनियरिंग संस्था आईआईटी ने छात्रों के प्रोफाइल से जेईई और गेट की रैंक हटाने का फैसला किया है। इसके साथ ही प्लेसमेंट में नौकरी का ऑफर देकर बाद में मुकरने वाली कंपनियों पर भी सख्ती की जा रही है। यह फैसला ऑल आईआईटी प्लेसमेंट कमेटी (AIPC) की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। AIPC सभी 23 आईआईटी के प्लेसमेंट और इंटर्नशिप को समन्वय करने वाली आधिकारिक संस्था है।
रिज्यूमे से क्यों हटाई जा रही जानकारी?
मुख्य वजह यह है कि रिक्रूटर्स कभी-कभी जेईई रैंक, गेट स्कोर या प्रतिशत देखकर यह अंदाजा लगा लेते थे कि छात्र सामान्य श्रेणी का है या आरक्षित श्रेणी का। AIPC के संयोजक और आईआईटी गुवाहाटी के कंप्यूटर साइंस प्रोफेसर जॉन जोस के मुताबिक, प्रवेश परीक्षा तो सिर्फ एक समय का प्रदर्शन दिखाती है, जबकि आईआईटी की डिग्री चार साल की लगातार मेहनत, स्किल्स और उपलब्धियों को दर्शाती है।
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अब छात्रों को रिज्यूमे में अपनी CPI (क्यूमुलेटिव परफॉर्मेंस इंडेक्स), प्रोजेक्ट्स, इंटर्नशिप, रिसर्च वर्क और आईआईटी के दौरान की अन्य उपलब्धियों को जगह देनी होगी। जेईई-गेट जैसे स्कोर सिर्फ तभी बताने होंगे जब कोई कंपनी खास तौर पर मांगे। ये स्टैंडर्ड प्लेसमेंट रिज्यूमे का हिस्सा नहीं रहेंगे।
कंपनियों पर सख्ती का फैसला
एक और बड़ी समस्या यह थी कि कुछ कंपनियां छात्रों को जॉब ऑफर दे देती हैं, लेकिन बाद में महीनों में ऑफर वापस ले लेती हैं। इससे छात्र प्लेसमेंट प्रक्रिया से बाहर हो जाते हैं और दूसरे मौके भी गंवा बैठते हैं। प्रोफेसर जोस ने बताया कि अब आईआईटी प्लेसमेंट ऑफिस ऐसे मामलों का रिकॉर्ड रखेंगे और कंपनी से स्पष्टीकरण मांगेंगे। अगर जवाब संतोषजनक नहीं निकला तो उस कंपनी को दो साल तक आईआईटी के प्लेसमेंट ड्राइव में भाग लेने से रोका जा सकता है।
प्लेसमेंट रिपोर्टिंग में भी बदलाव
प्लेसमेंट की सफलता को मापने का तरीका भी बदला जा रहा है। पहले सिर्फ सबसे ऊंचे पैकेज की खबरें ज्यादा चलती थीं। अब आईआईटी मीडियन सैलरी (मध्यमान वेतन) पर जोर देंगे। इससे पूरे बैच के प्लेसमेंट का ज्यादा सही और वास्तविक आंकड़ा सामने आएगा।











