21 जून 2026 को सम्पूर्ण विश्व 12वाँ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मना रहा है। इस वर्ष का विषय है- “स्वस्थ आयु के लिए योग” (Yoga for Healthy Ageing)। यह विषय केवल एक वार्षिक अभियान का संदेश नहीं, बल्कि बदलती वैश्विक जनसांख्यिकी, बढ़ती जीवन प्रत्याशा और स्वस्थ, सक्रिय एवं गरिमामय जीवन की आवश्यकता का वैश्विक उत्तर है।
विशेष महत्व की बात यह है कि जिस समय भारत आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सुशासन, विकास, सेवा और जनकल्याण के 12 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा का उत्सव मना रहा है, उसी समय विश्व 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भी साक्षी बन रहा है। यह मात्र एक संयोग नहीं, बल्कि उस परिवर्तनकारी दृष्टि का प्रतीक है जिसने भारत की प्राचीन योग परंपरा को वैश्विक जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।
कोलकाता से विश्व तक : योग का महोत्सव
इस वर्ष का मुख्य राष्ट्रीय आयोजन पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के ऐतिहासिक रेड रोड पर आयोजित हो रहा है, जहाँ स्वयं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी लाखों योग साधकों के साथ योगाभ्यास का नेतृत्व कर रहे हैं। इस आयोजन में अभूतपूर्व जनभागीदारी के माध्यम से नया गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। देशभर में दिल्ली के लाल किला, मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया, हरिद्वार के हर की पौड़ी, अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट सहित 12 प्रतिष्ठित स्थलों पर विशेष योग सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। वहीं संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क से लेकर टाइम्स स्क्वायर तक, एशिया, यूरोप, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और लैटिन अमेरिका के लगभग 2,500 स्थानों पर भारतीय दूतावासों, सामुदायिक संगठनों और योग संस्थाओं के सहयोग से योग दिवस मनाया जा रहा है। यह दर्शाता है कि योग आज केवल भारत का नहीं, सम्पूर्ण मानवता का साझा सांस्कृतिक और स्वास्थ्य संबंधी आंदोलन बन चुका है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी : योग को वैश्विक पहचान दिलाने वाले युगद्रष्टा
सबसे पहले मैं आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रति अपनी हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ, जिन्होंने भारत की प्राचीन योग परंपरा को विश्व मंच पर स्थापित कर उसे वैश्विक जन-कल्याण का माध्यम बनाया। 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 69वें सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी जी ने कहा था- “Yoga is an invaluable gift from our ancient tradition. Yoga embodies unity of mind and body, thought and action.”
प्रधानमंत्री जी के इस ऐतिहासिक आह्वान को अभूतपूर्व समर्थन प्राप्त हुआ। मात्र ढाई महीनों के भीतर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रिकॉर्ड 177 देशों के समर्थन के साथ 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में किसी प्रस्ताव को प्राप्त यह सबसे व्यापक समर्थन था। 21 जून 2015 को प्रथम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया और तब से योग मानवता को जोड़ने वाली वैश्विक शक्ति के रूप में निरंतर विस्तार प्राप्त कर रहा है।
आज 180 से अधिक देशों में योग दिवस का आयोजन भारत की सांस्कृतिक कूटनीति, सॉफ्ट पावर और प्रधानमंत्री मोदी जी के वैश्विक नेतृत्व की प्रभावशीलता का जीवंत प्रमाण है।
योग : भारत का सबसे बड़ा सभ्यतागत योगदान
योग शब्द संस्कृत की ‘युज्’ धातु से बना है, जिसका अर्थ है- जोड़ना, मिलाना, एकत्व स्थापित करना। योग शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वय का विज्ञान है। यह केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति है। महर्षि पतंजलि ने योग की परिभाषा देते हुए कहा – “योगश्चित्तवृत्तिनिरोधः।” अर्थात् चित्त की वृत्तियों का निरोध, विचारों का संतुलन और मन की स्थिरता ही योग है। भगवद्गीता में भगवान श्रीकृष्ण योग को जीवन-दर्शन के रूप में प्रस्तुत करते हैं – “योगः कर्मसु कौशलम्।” अर्थात् कर्मों को उत्कृष्टता और समभाव के साथ करना ही योग है। इसी प्रकार – “समत्वं योग उच्यते।” अर्थात् सुख-दुःख, लाभ-हानि और सफलता-असफलता में संतुलित रहना ही योग है। यही कारण है कि योग आज तनावग्रस्त, विभाजित और तेज़ी से बदलती दुनिया को संतुलन, शांति और आत्मबोध का मार्ग प्रदान कर रहा है।
योग और आयुष : भारत की ज्ञान परंपरा का पुनर्जागरण
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में 9 नवंबर 2014 को आयुष विभाग को पूर्ण मंत्रालय का दर्जा प्रदान किया गया। यह निर्णय भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों – योग, आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी – को नई ऊर्जा देने वाला ऐतिहासिक कदम सिद्ध हुआ। आज आयुष क्षेत्र करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य का आधार बन चुका है। गुजरात के जामनगर में स्थापित WHO Global Centre for Traditional Medicine भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को वैश्विक मान्यता दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। ‘Heal in India’, आयुष वीज़ा, मेडिकल वैल्यू टूरिज्म और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ता जोर भारत को विश्व का अग्रणी वेलनेस हब बना रहा है।
विकसित भारत @2047 और योग की भूमिका
प्रधानमंत्री मोदी जी ने भारत के सामने वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य केवल आर्थिक प्रगति का नहीं, बल्कि स्वस्थ, सक्षम, आत्मविश्वासी और उत्पादक समाज के निर्माण का भी संकल्प है। एक स्वस्थ नागरिक ही विकसित राष्ट्र की वास्तविक शक्ति होता है। योग और आयुर्वेद इसी दृष्टि के सबसे प्रभावी साधन हैं। योग न केवल रोगों की रोकथाम करता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, कार्यक्षमता, उत्पादकता और जीवन-गुणवत्ता को भी बढ़ाता है। इसलिए योग विकसित भारत की मानव पूंजी को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 : “स्वस्थ आयु के लिए योग” क्यों महत्वपूर्ण है?
इस वर्ष की थीम “Yoga for Healthy Ageing” वर्तमान समय की सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक आवश्यकता को संबोधित करती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार आने वाले दशकों में वृद्धजन आबादी तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में केवल लंबा जीवन पर्याप्त नहीं है; स्वस्थ, सक्रिय और स्वावलंबी जीवन अधिक महत्वपूर्ण है।
योग –
- शारीरिक संतुलन और लचीलापन बढ़ाता है
- अस्थियों और मांसपेशियों को मजबूत बनाता है
- रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य में सुधार करता है
- तनाव, अवसाद और चिंता को कम करता है
- स्मरण शक्ति और मानसिक एकाग्रता को बनाए रखने में सहायता करता है
- वृद्धावस्था में आत्मनिर्भरता और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है
इसी संदर्भ में केंद्रीय आयुष राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने कहा है कि बढ़ती जीवन प्रत्याशा के इस युग में स्वस्थ और गरिमामय वृद्धावस्था की कला सीखना आवश्यक है, और योग इसका सर्वश्रेष्ठ माध्यम है।
12 वर्ष सरकार के, 12 वर्ष योग दिवस के
वर्ष 2026 एक ऐतिहासिक संगम का वर्ष है। एक ओर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत विकास, सुशासन, स्वास्थ्य, डिजिटल परिवर्तन, आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिष्ठा के 12 वर्षों का उत्सव मना रहा है। दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी अपने 12वें संस्करण में प्रवेश कर चुका है। इन दोनों यात्राओं का मूल भाव समान है–भारत की प्राचीन शक्ति को आधुनिक विश्व के कल्याण से जोड़ना। जिस प्रकार पिछले 12 वर्षों में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है, उसी प्रकार योग ने भी विश्व के करोड़ों लोगों के जीवन को स्पर्श किया है। यह 12 वर्ष केवल एक कार्यक्रम की सफलता नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक विरासत और वैश्विक नेतृत्व की विजयगाथा हैं।
योग : एक दिवस नहीं, जीवन-पद्धति
आज आवश्यकता है कि हम योग को केवल 21 जून तक सीमित न रखें। योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं। अपने परिवार, विशेषकर बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों को योग से जोड़ें। स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज और स्वस्थ राष्ट्र की आधारशिला योग ही बन सकता है। आइए, हम सब संकल्प लें कि योग को केवल उत्सव नहीं, जीवन का संस्कार बनाएँगे।
भगवद्गीता के शब्दों में- “योगः कर्मसु कौशलम्।” अर्थात् योग को जीवन-कौशल बनाकर हम स्वयं को, अपने समाज को और अपने राष्ट्र को अधिक सक्षम, स्वस्थ और समृद्ध बना सकते हैं। अंत में वैदिक भावना के साथ-
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः।
सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु।
मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत्॥
अर्थात् सभी सुखी हों, सभी निरोग हों, सभी मंगल का अनुभव करें और कोई भी दुःख का भागी न बने।
इसी मंगलकामना के साथ –
जय हिन्द!
जय भारत!

















