चीन की सांस्कृतिक क्रांति में नरभक्षण: गुआंग्शी की वह भयावह कहानी जिस पर आज भी कम होती है चर्चा
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चीन की सांस्कृतिक क्रांति में नरभक्षण: गुआंग्शी की वह भयावह कहानी जिस पर आज भी कम होती है चर्चा

चीन में माओ के दौर में हुई 'सांस्कृतिक क्रांति' (Cultural Revolution) के नाम पर कैसे लाखों निर्दोष लोगों की हत्याएं छिपा ली गईं? गुआंगशी प्रांत के नरसंहार और कम्युनिस्ट शासन के काले इतिहास पर विशेष विश्लेषण।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by Shivam Dixit
Jun 20, 2026, 09:00 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
China Cultural Revolution History Mass Killings Mao

चित्र साभार - The Washington Post

जब भी कहीं नरभक्षण की बात आती है, तो यह कहा जाता है कि यह प्रायः अकालग्रस्त क्षेत्रों में होता है, जहाँ लोग भूख से इतना परेशान हो जाएँ कि आपस में एक-दूसरे को मारकर खाने लगें, क्योंकि उनके पास खाने के लिए कुछ शेष ही न हो।

मगर क्या कभी यह सुना है कि राजनीतिक विरोध करने वालों का मांस खाया गया हो और इसे क्रांति कहा गया हो? और उस पर बात भी न होती हो? क्या कभी ऐसा सुना है कि कोई दल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता में इस सीमा तक चला गया हो कि उसने अपने विरोधियों को मारकर खाया हो या फिर जिंदा ही उनका मांस काटकर खाया हो? यह कल्पना ही सिहराने वाली है, मगर यह सब हुआ था और यह सब कुछ ही दशक पहले चीन में हुआ था, जब कथित “कल्चरल रेवोल्यूशन” हो रहा था।

चीन की सांस्कृतिक क्रांति और उस पर उठते सवाल

भारत में चीन-प्रेमी लोग चीन के दीवाने हैं। चीन को लेकर उन्हें लगता है कि मानवता का दरिया तो यहीं से फूटकर निकला है या निकलता है। और इसी के नीचे वे लाखों लोगों की हत्याएँ छिपा ले जाते हैं। ये हत्याएँ क्यों हुई थीं, किसने की थीं, सब कुछ शीशे की तरह साफ होने के बाद भी इन लाखों हत्याओं पर कभी बात नहीं होती है।

जब इन दिनों चीन के सुपरपावर होने की लगातार बातें हो रही हैं और यह कहा जा रहा है कि चीन की तरफ देखना चाहिए, तो आइए चलते हैं कुछ ही दशक पहले हुई कल्चरल रेवोल्यूशन में और विशेषकर गुआंग्शी में, जहाँ पर जो घटा, वह मानवता के इतिहास में शायद ही कभी घटा हो।

माओ जेदोंग की सांस्कृतिक क्रांति और गुआंग्शी में नरभक्षण

चीन में माओ जेदोंग के आदेश पर कल्चरल रेवोल्यूशन अर्थात सांस्कृतिक क्रांति हुई। और इसी क्रांति में गुआंग्शी प्रांत में राजनीतिक विरोधियों के शरीर इंसानों के आहार बन गए। जी हाँ! इस कथित कल्चरल रेवोल्यूशन में, जो 1966-1976 तक चली थी, इस हिंसा में 10 से 20 लाख के करीब लोग मारे गए थे। और उनके तरीके भी बहुत वीभत्स थे। मगर इन हत्याओं में सबसे भयानक था गुआंग्शी में हुआ घटनाक्रम, जहाँ पर केवल हत्याएँ ही नहीं हुई थीं, बल्कि नरमांस भक्षण भी हुआ था।

चीन ने पहले नकारा, फिर बताया ‘विचलन’

पहले तो चीन ने इस पूरे घटनाक्रम को नकारने का ही प्रयास किया, मगर जब वह इसे नकार नहीं सका तो इसे “विचलन” कहकर पल्ला झाड़ लिया। मगर क्या नरमांस भक्षण ऐसी घटना है, जिसे इस तरह भुला दिया जाए?

इस पूरी घटना को वैसे तो दबाने का प्रयास किया गया, उस पर कुछ भी लिखने को हतोत्साहित किया गया, मगर फिर भी Scarlet Memorial नामक पुस्तक में लेखक ने यहाँ पर घटी घटनाओं को लिखा है और बताया है कि कैसे सैकड़ों लोगों को मारकर खाया गया।

Scarlet Memorial में दर्ज भयावह घटनाएँ

कैसे कुछ महिलाएँ भी इन सबमें शामिल रहीं। गुआंग्शी में विरोधियों को शांत करने के लिए मशीनगन का सहारा लिया गया था। लेखक इस पुस्तक की प्रस्तावना में एक इन्वेस्टिगेटर पत्रकार से जब पूछते हैं कि क्या उसे गुआंग्शी में हुए मानव भक्षण के विषय में पता था, तो उसने कहा कि हाँ। और जब उससे पूछा कि फिर उसने इस पर क्यों कुछ नहीं लिखा, तो उसने कहा था कि यह “too evil” था।

चार पुरानी चीज़ों को मिटाने के नाम पर हिंसा

यह कथित क्रांति चार तत्वों को मिटाने के लिए थी—पुराने विचार, पुरानी संस्कृति, पुरानी आदतें और पुराने रीति-रिवाज। और इसी दौरान ये लाखों हत्याएँ हुई थीं।

पूर्व गुरिल्ला लड़ाके का दावा

इस पुस्तक में पूर्व सीसीपी गुरिल्ला लड़ाके Xie ने बताया कि कैसे मानव लिवर का भक्षण होता है और उसने यह भी बताया कि गुआंग्शी में कल्चरल रेवोल्यूशन के दौरान नरमांस खाया गया था। उसने खुद लिवर खाया था।

लेखक ने बातों-बातों में अचानक से पूछा कि “क्या लिवर उबालकर ज्यादा बेहतर था या फिर बारबेक्यू होकर?” तो Xie का कहना था कि “वैसे तो बारबेक्यू किया गया लिवर ज्यादा स्वादिष्ट था, मगर कल्चरल रेवोल्यूशन के दौरान उसका स्वाद ‘ब्लडी’ था।”

लेखक का कहना था कि उन्हें बहुत अजीब लग रहा था, जब उनके सामने इस तरह की नरमांस भक्षण की बातें हो रही थीं, मगर फिर भी वे इसलिए Xie के शुक्रगुजार थे कि कम से कम उसने यह माना कि गुआंग्शी में ये सब कल्चरल रेवोल्यूशन के दौरान हुआ था और यह सब कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि यह इतिहास की निरंतरता थी। यह वह मान चुका था कि उसने सिविल वॉर के दौरान एक जासूस का लिवर पिया था।

जिंदा लोगों के अंग निकालकर खाने के आरोप

एक पूर्व वृद्ध गुरिल्ला फाइटर, जिस पर बाद में दक्षिणपंथी होने का आरोप लगा दिया गया था, उसकी हत्या इसी क्रांति के दौरान की गई। उसके बड़े बेटे ने विरोध किया, तो दिन में उसकी आलोचना की गई और रात में उसका जिंदा रहते ही लिवर निकाल लिया गया और दस से ज्यादा लोगों में यह बाँटा गया।

लोगों का मानना था कि अविवाहित व्यक्ति का लिवर खाने से आदमी के अंदरूनी अंग मजबूत होते हैं और बीमारियाँ ठीक हो जाती हैं।

हालाँकि इसमें शामिल पार्टी के दो कैडरों को कुछ सजा मिली, मगर आम लोगों को नहीं। इसलिए उन्होंने मिलकर कुछ पैसा परिवार को दे दिया।

वुशुआन जिले की घटनाएँ

एक और घटना को बताते हुए वे लिखते हैं कि मानव मांस भक्षण की घटनाएँ कुछ जिलों में हुईं, जिनमें सबसे उल्लेखनीय वुशुआन की घटनाएँ थीं।

जब भी किसी पीड़ित को उसकी बुराई या उसने क्या किया, यह बताने के लिए सड़कों पर घुमाया जाता था, बुजुर्ग महिलाएँ अपनी सब्जी की टोकरियाँ लेकर इकट्ठा हो जाती थीं। जैसे ही पीड़ित को मार दिया जाता, भीड़ तुरंत आगे बढ़ जाती। सबसे आगे वाले अच्छे-अच्छे मांस के टुकड़े ले लेते। जो बाद में आते, वे हड्डियाँ आपस में बाँट लेते।

पार्टी अधिकारियों पर भी लगे नरभक्षण के आरोप

काफी सारे कैडर (पार्टी अधिकारी) भी नरभक्षण में शामिल थे। उदाहरण के लिए, वांग वेनलियू (महिला), जिन्हें कई क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लेने के बाद वुशुआन क्रांतिकारी समिति की उपाध्यक्ष बना दिया गया था, पुरुष जननांगों (private parts) को खाने में विशेषज्ञ बन गई थीं।

जब एक केंद्रीय कार्य टीम ने यह खास विकृति (perversion) चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति को रिपोर्ट की, तो उच्चस्तरीय पार्टी अधिकारी स्तब्ध रह गए। जब यह पूछा गया कि इसे अभी तक हटाया क्यों नहीं गया, तो यह कहा गया कि वह केवल कुछ ही अंग खाती थी, इसलिए कोई खास कार्रवाई नहीं हुई। उसका पद केवल कम कर दिया गया।

जिंदा लोगों के अंग निकालने की घटनाएँ

ऐसी भी घटनाएँ थीं, जिनमें जिंदा ही लोगों के अंग खाने के लिए निकाल दिए जाते थे।

ऐसा सैकड़ों लोगों के साथ किया गया था। मगर चीन से प्यार करने वाले लोग कभी भी इन पर बात नहीं करते हैं। इतना ही नहीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बात करने वाले लोग यह भी नहीं बताते कि आखिर उन लोगों के नाम तो जाहिर हों जिन्होंने इस तरह का घिनौना कृत्य किया या फिर इस पुस्तक का ही उन्होंने कभी नाम लिया हो।

आधिकारिक और निजी शोध में क्या सामने आया?

इंटरनेट पर इसके विषय में खंगालने पर यह पता चलता है कि आधिकारिक रिकॉर्ड्स के अनुसार कम से कम 302 लोग नरभक्षण का शिकार हुए, तो वहीं निजी शोध के अनुसार लगभग 421 लोग नरभक्षण का शिकार हुए थे।

ऐसा भी माना जाता है कि चीन में इस मांस भक्षण पर किताबें, लेख और शोध प्रतिबंधित हैं और इंटरनेट पर भी जानकारी दबाने का प्रयास किया जाता है।

Topics: China Cultural RevolutionMao Zedong HistoryGuangxi Massacre ChinaCommunist Party SecretsPanchjanya World Feature
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