
मुंबई / जयपुर। भारतीय मेधा ने वैश्विक विज्ञान के मंच पर एक बार फिर इतिहास रच दिया है। राजस्थान की माटी में जन्मे विख्यात सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी (Theoretical Physicist) प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन को भौतिकी के क्षेत्र का अत्यंत प्रतिष्ठित ‘वुल्फ पुरस्कार’ (Wolf Prize) प्रदान किया गया है।
प्रो. जैन ने ‘कम्पोजिट फर्मियन्स’ (Composite Fermions) की क्रांतिकारी खोज करके क्वांटम पदार्थ (Quantum Matter) के रहस्यों के प्रति वैश्विक समझ को पूरी तरह बदल दिया था। वे इस सर्वोच्च सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले भारतीय बन गए हैं, जो पूरे देश के लिए अत्यंत गर्व का विषय है।
यह ऐतिहासिक पुरस्कार बीती 18 जून को इज़राइल की संसद ‘नेसेट’ (Knesset) में आयोजित एक भव्य अंतरराष्ट्रीय समारोह के दौरान प्रदान किया गया। इज़राइल के राष्ट्रपति इसाक हर्ज़ोग ने प्रो. जैनेंद्र के. जैन को यह गौरवमयी मेडल सौंपकर सम्मानित किया।
“इस सर्वोच्च सम्मान से मैं बहुत गौरवान्वित और विनम्र महसूस कर रहा हूँ। भौतिकी (Physics) ने मुझे जीवन में उससे कहीं अधिक दिया है, जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी, जब मैंने राजस्थान के एक सुदूर ग्रामीण इलाके में एक युवा लड़के के रूप में अपना यह सफर शुरू किया था। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली मानता हूँ और अपने पूज्य शिक्षकों, होनहार छात्रों, सहयोगियों, परिवार और मित्रों के साथ-साथ उन सभी वैज्ञानिकों का आभारी हूँ, जिनके मूलभूत कार्यों ने मेरे शोध की मजबूत नींव रखी थी।” – प्रो. जैनेंद्र के. जैन
प्रोफेसर जैनेंद्र के. जैन का जीवन और उनकी शैक्षणिक यात्रा देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणा का एक अप्रतिम स्रोत है। उनके जीवन के मुख्य पड़ावों को नीचे दी गई तालिका के माध्यम से समझा जा सकता है:
| जीवन / शैक्षणिक यात्रा | ऐतिहासिक एवं शैक्षणिक विवरण |
|---|---|
| मूल जन्म स्थान एवं बचपन | राजस्थान में थार मरुस्थल के किनारे बसे एक छोटे से ऐतिहासिक कस्बे सांभर (Sambhar) में पले-बढ़े। |
| उच्च शिक्षा (भारत) | • बैचलर डिग्री: महाराजा कॉलेज, जयपुर • मास्टर डिग्री: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), कानपुर |
| उच्च शिक्षा (विदेश) | • PhD की डिग्री: स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क (USA) |
| वर्तमान प्रतिष्ठित पद | पेंसिल्वेनिया स्टेट यूनिवर्सिटी (USA) में इवान पुघ यूनिवर्सिटी प्रोफेसर और एबरली फैमिली चेयर इन फिजिक्स के पद पर कार्यरत। |
| भारतीय संस्थान की स्थापना | हाल ही में भारत में स्थापित ‘लोढ़ा थ्योरेटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट’ (LTPI) के संस्थापक निदेशक। |
जब प्रो. जैनेंद्र केवल 12 वर्ष के थे, तब कोलकाता में उनके परिवार की कार एक ट्राम से टकरा गई थी। इस भीषण सड़क दुर्घटना में उनकी माँ का असमय निधन हो गया था और जैनेंद्र स्वयं गंभीर रूप से घायल हो गए थे। ऐसी विकट परिस्थिति में विख्यात चिकित्सक डॉ. पी.के. सेठी और कुशल कारीगर राम चंद्र शर्मा द्वारा भारत में ही विकसित किए गए विश्व प्रसिद्ध और कम लागत वाले ‘जयपुर फुट’ (Jaipur Foot) प्रोस्थेटिक (कृत्रिम अंग) ने उन्हें सहारा दिया। इसी स्वदेशी तकनीक की बदौलत वे फिर से चलने और अपनी पढ़ाई को अटूट हौसले के साथ जारी रखने में सक्षम हो सके।
कम उम्र में ही बच्चों की एक पत्रिका में महान भारतीय भौतिक विज्ञानी सत्येंद्र नाथ बोस और अल्बर्ट आइंस्टीन के बीच वैज्ञानिक संवाद की कहानी ने उनके बाल मन पर गहरी छाप छोड़ी थी। वर्ष 1981 में महज 21 वर्ष की आयु में वे पहली बार उच्च अनुसंधान के लिए अमेरिका रवाना हुए और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
प्रो. जैन ने वर्ष 1989 में येल यूनिवर्सिटी में एक युवा पोस्टडॉक्टरल स्कॉलर के रूप में कार्य करते हुए इस पुरस्कार-विजेता विषय की खोज की थी। आज कई दशकों बाद, कम्पोजिट फर्मियन्स पर उनका यह अग्रणी शोध आधुनिक ‘कंडेंस्ड मैटर फिजिक्स’ (ठोस अवस्था भौतिकी) की एक केंद्रीय अवधारणा बन चुका है।
इज़राइल में वुल्फ फाउंडेशन द्वारा वर्ष 1978 से प्रतिवर्ष दिया जाने वाला यह पुरस्कार उन उत्कृष्ट भौतिक विज्ञानियों को ही सम्मानित करता है जिनकी खोजों ने मानव ज्ञान की सीमाओं को व्यापक विस्तार दिया हो। विज्ञान जगत में इसकी साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वुल्फ पुरस्कार पाने वाले सत्ताइस (27) महान वैज्ञानिकों को बाद में दुनिया का सर्वोच्च ‘नोबेल पुरस्कार’ भी मिल चुका है।
प्रो. जैनेंद्र के. जैन ने अब तक 250 से अधिक उच्च-स्तरीय साइंटिफिक आर्टिकल्स लिखे हैं। उनका प्रसिद्ध मोनोग्राफ ‘Composite Fermions’ वर्ष 2007 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस द्वारा प्रकाशित किया गया था।
प्राप्त अन्य राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय सम्मान:
उनका विज़न अब लोढ़ा थ्योरेटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट (LTPI) के माध्यम से अपनी मातृभूमि भारत तक फैला हुआ है। वे थ्योरेटिकल फिजिक्स में बुनियादी और उच्च स्तरीय रिसर्च के लिए भारत का पहला पूर्णतः प्राइवेट फंडिंग वाला एडवांस सेंटर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
वे उम्मीद जताते हैं कि LTPI देश में एक ऐसा अनूठा माहौल तैयार करेगा, जहाँ भारत के युवा वैज्ञानिक बड़े, मौलिक और महत्वाकांक्षी आइडियाज़ पर काम कर सकें, दुनिया भर के बेहतरीन रिसर्चर्स के साथ सीधे नेटवर्क में जुड़ सकें और फिजिक्स के सबसे गहरे व अनसुलझे सवालों पर स्वतंत्र विचार कर सकें।