फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने एयर इंडिया फ्लाइट 171 के क्रैश की AAIB की अंतरिम रिपोर्ट पर शंका जताई है। पायलट्स का कहना है कि रिपोर्ट में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी को जानबूझकर छोड़ दिया गया लगता है।
FIP का मुख्य आरोप
FIP ने कहा कि AAIB की रिपोर्ट में कॉकपिट वार्निंग डेटा को शामिल नहीं किया गया, जो दोनों इंजनों के बंद होने से पहले इलेक्ट्रिकल फेलियर की ओर इशारा करता है। पायलट्स की संस्था का दावा है कि उन्होंने खुद बोइंग 787 सिमुलेटर पर टेस्ट कराए, जिनमें रिपोर्ट की टाइमलाइन में गलतियां निकलकर आई हैं। FIP ने सरकार को चिट्ठी लिखकर अनुरोध किया है कि AAIB फाइनल रिपोर्ट जारी करने से पहले सिमुलेटर टेस्ट जरूर कराए। 12 जून 2025 को हुए इस हादसे की जांच अभी चल रही है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कहा
शुक्रवार को मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस में FIP के प्रेसिडेंट कैप्टन सी. रंधावा ने विस्तार से बात रखी। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिकल फेलियर होने पर कॉकपिट में कई सावधानी वाले मैसेज आते हैं, साथ में ऑडियो अलर्ट भी बजते हैं। ये सब कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में रिकॉर्ड होते हैं। लेकिन अंतरिम रिपोर्ट में इस वार्निंग सीक्वेंस को नहीं दिखाया गया।
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फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर पर सवाल
कैप्टन रंधावा ने पूछा कि एयरक्राफ्ट का टेल हिस्सा ज्यादातर intact मिला था, फिर फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (जो टेल में लगा होता है) इतना ज्यादा डैमेज क्यों हुआ? उन्होंने याद दिलाया कि ये रिकॉर्डर सिर्फ बिजली पर चलता है। इससे इलेक्ट्रिकल पावर सप्लाई में समस्या होने का संकेत मिलता है।
सिमुलेटर टेस्ट के नतीजे
AAIB ने FIP के कई अनुरोधों के बावजूद खुद सिमुलेटर टेस्ट करने से मना कर दिया था। इसके बाद FIP ने 10 टेस्ट खुद कराए। टेस्ट में पता चला कि इंजन बंद होने के बाद Ram Air Turbine (RAT) – जो इमरजेंसी पावर सप्लाई है – को डिप्लॉय होने और हाइड्रॉलिक प्रेशर बहाल करने में 18 सेकंड लगते हैं। लेकिन AAIB की रिपोर्ट में कहा गया था कि RAT सिर्फ 4 सेकंड में डिप्लॉय हो गया था, जब फ्यूल कंट्रोल स्विच को कटऑफ पोजीशन पर ले जाया गया।
हडसन मिरेकल का उदाहरण
कैप्टन रंधावा ने 2009 के ‘मिरेकल ऑन द हडसन’ का जिक्र किया। उस वक्त US एयरवेज के कैप्टन चेस्ले ‘सुली’ सुलेनबर्गर ने इंजन फेल होने के बाद प्लेन को हडसन नदी में उतारा था। शुरू में जांच एजेंसी ने पायलट को गलत ठहराया था। लेकिन 30-35 सिमुलेटर टेस्ट करने के बाद पता चला कि प्लेन रनवे तक वापस नहीं पहुंच सकता था। तब जाकर पायलट को क्लियर किया गया।
रंधावा ने कहा, “वहां पायलट जिंदा थे और खुद अपनी बात रख सके। यहां हमारे कैप्टन नहीं रहे, इसलिए उनकी तरफ से कोई बोलने वाला नहीं है।”











