प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय 6 दिवसीय अत्यंत महत्वपूर्ण विदेशी दौरे पर हैं। इसका पहला पड़ाव फ्रांस का खूबसूरत शहर नीस (Nice) है जहां वो पहुंच चुके है। यह दौरा भारत और फ्रांस के द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। साथ ही वैश्विक पटल पर भी भारत की साख को मजबूत करेगा। फ्रांस के बाद पीएम मोदी स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा पर भी जाने वाले हैं। चलिए पीएम मोदी के इस मेगा दौरे के सभी मुख्य चरणों, ‘भारत इनोवेट्स 2026’ की शुरुआत, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली अहम बैठक और G-7 सम्मेलन के एजेंडे के बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
भारत इनोवेट्स 2026 से मिलेगा भारतीय स्टार्टअप्स को ग्लोबल बूस्ट
पीएम मोदी का सबसे बाद पड़ाव और आकर्षण है ‘भारत इनोवेट्स 2026’ (Bharat Innovates 2026) प्रोग्राम, जिसका उद्घाटन पीएम करेंगे। रविवार को पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों संयुक्त रूप से इस कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे।
पहले जानते हैं कि क्या है भारत इनोवेट्स? यह अपनी तरह का पहला ऐसा प्रोग्राम है जहां वैश्विक मंच पर भारत की तकनीकी और उद्यमिता क्षमता को प्रदर्शित किया जाएगा। इस मेगा इवेंट में भारत के 120 टॉप इनोवेटर्स, 500 से अधिक बड़े अंतरराष्ट्रीय निवेशक, कई वैश्विक कंपनियों के CEO और भारत के लगभग 15 उच्च शिक्षा संस्थान शामिल हो रहे हैं।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की मौजूदगी में होने वाले इस कार्यक्रम का सीधा उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप्स को दुनिया भर के निवेशकों के सामने पेश करना है, जिससे देश में विदेशी निवेश (FDI) के नए रास्ते खुलेंगे। इससे भारतीय स्टार्टअप्स को ग्लोबल बूस्ट मिलेगा।
राष्ट्रपति मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता
‘भारत इनोवेट्स’ के मंच पर जाने से पहले पीएम मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों के बीच एक बेहद उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक होगी। इस वार्ता में दोनों देशों के बीच की ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटिजिक पार्टनरशिप’ को और मजबूत करने का खाका तैयार किया जाएगा। दोनों नेताओं के बीच मुख्य रूप से ग्रीन एनर्जी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) इनोवेशन और रक्षा सुरक्षा जैसे वैश्विक मुद्दों पर 12 अहम समझौते होने की उम्मीद है।
इसके बाद, प्रधानमंत्री फ्रांस के एवियन शहर के लिए रवाना होंगे, जहां वे 52वें जी-7 शिखर सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में हिस्सा लेंगे। भारत को इस प्रतिष्ठित मंच पर आमंत्रित किया जाना यह दिखाता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति में भारत की भूमिका कितनी अनिवार्य हो चुकी है। इस बार भारत के साथ ब्राजील, मिस्र, केन्या और दक्षिण कोरिया जैसे विकासशील देशों को भी इस आउटरीच सत्र में शामिल होने का मौका मिला है।
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डोनाल्ड ट्रंप के साथ होगी अहम बैठक
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठक को पीएम मोदी के इस विदेशी दौरे का सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। लगभग 16 महीनों के लंबे अंतराल के बाद दोनों दिग्गज नेता एक मेज पर होंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने इस बैठक की पुष्टि कर दी है, हालांकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने अभी तक रणनीतिक कारणों से इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की है।
अआपको बता दें कि दोनों नेताओं की पिछली मुलाकातों के मुकाबले आज की भू-राजनीतिक स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। हाल ही में ओमान के तट पर हुए अमेरिकी मिसाइल हमले में 3 निर्दोष भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी जिसके बाद भारत और अमेरिका के राजनयिक संबंधों में थोड़ी कड़वाहट और तनाव देखा गया है। ऐसे संवेदनशील माहौल में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की यह मुलाकात वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद निर्णायक होने वाली है।
स्लोवाकिया की पहली ऐतिहासिक यात्रा
फ्रांस दौरे के आखिरी चरण में 18 जून को पीएम मोदी पेरिस पहुंचेंगे जहां वे राष्ट्रपति मैक्रों के साथ यूरोप के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप शो ‘वीवा टेक’ में शिरकत करेंगे। यहां वे दुनिया भर के तकनीकी दिग्गजों को संबोधित करेंगे और फ्रांस में रह रहे भारतीय समुदाय के साथ बातचीत भी करेंगे।
फ्रांस का अपना दौरा पूरा करने के बाद पीएम मोदी सीधे स्लोवाकिया के लिए उड़ान भरेंगे। साल 1993 में एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आने के बाद से स्लोवाकिया की यात्रा करने वाले पीएम मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनेंगे।
पीएम मोदी भी अपनी इस यात्रा को लेकर बहुत उत्सुक हैं। फ्रांस पहुंचते ही जिस गर्मजोशी से उनका स्वागत हुआ, उसने पीएम का दिल जीत लिया। इसकी खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी कुछ तस्वीरें साझा की। पीएम मोदी की यह यात्रा मध्य यूरोप के देशों के साथ भारत के व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को एक नया आयाम देगी।















