"सनातन धर्म ही भारत की असली आत्मा है" : सरसंघचालक जी
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“सनातन धर्म भारत की आत्मा, इसके सिद्धांतों से दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार रहें”: सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी

केरल के तिरुवनंतपुरम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सनातन धर्म ही भारत की आत्मा है, जो पूरी दुनिया को 'वसुधैव कुटुंबकम' का मार्ग दिखा सकता है।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jun 13, 2026, 10:41 pm IST
in भारत, संघ को जानें, संघ @100, केरल
Mohan Bhagwat on Sanatan Dharma RSS Thiruvananthapuram Kerala Speech

तिरुवनंतपुरम (केरल)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने आज एक बड़े मंच से वैश्विक चुनौतियों और भारत की सांस्कृतिक संप्रभुता पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सनातन धर्म ही भारत की वास्तविक आत्मा है और भारतीय सभ्यतागत सोच में आज की आधुनिक दुनिया की जटिल चुनौतियों का स्थायी समाधान छिपा है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की 100 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा के उपलक्ष्य में केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम में एक कार्यक्रम में प्रबुद्ध समाज को संबोधित करते हुए, उन्होंने राष्ट्र के पुनरुत्थान और वैश्विक कल्याण (Global Welfare) के लिए संपूर्ण समाज से संगठित होने का पुरजोर आह्वान किया।

क्रांतिकारी विरासत को नमन और संघ संस्थापक का स्मरण

सरसंघचालक जी ने अपने उद्बोधन में भारत की समृद्ध और अदम्य क्रांतिकारी विरासत को याद किया। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व न्योछावर करने वाले महान स्वतंत्रता सेनानियों— नेताजी सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

इसके साथ ही उन्होंने संघ (आरएसएस) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन, संघर्ष और उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने डॉ. हेडगेवार को एक ऐसे अनूठे राष्ट्रभक्त के रूप में वर्णित किया, जिन्होंने बचपन से ही देश के प्रति असाधारण प्रतिबद्धता दिखाई, तमाम व्यक्तिगत कठिनाइयों और अभावों का सामना किया, परंतु कभी अपने कदम पीछे नहीं खींचे और अपना पूरा जीवन समाज सेवा व राष्ट्रीय जन-जागरण के लिए समर्पित कर दिया।

Mohan Bhagwat on Sanatan Dharma RSS Thiruvananthapuram Kerala Speech

विविधता का सम्मान और ‘वसुधैव कुटुंबकम’

सनातन धर्म और भारतीय पहचान के अंतर्संबंधों को समझाते हुए डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि भारत की असली ताकत उसकी सांस्कृतिक एकता में है।

उन्होंने कहा-

“पूजा-पद्धतियों और पंथों में बाहरी अंतर होने के बावजूद, भारत ऐतिहासिक रूप से अपने साझा सभ्यतागत मूल्यों के माध्यम से हमेशा से एक सूत्र में पिरोया रहा है। सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी द्वारा बताए गए ‘हिंदुस्तान’ के विचार का स्मरण करते हुए हमें यह समझना होगा कि सनातन धर्म हर प्रकार की विविधता का आदर करना सिखाता है, और साथ ही उस आंतरिक एकता को भी पहचानता है जो पूरे समाज को एक साथ बांधती है। हिंदुत्व कोई संकीर्ण विचार नहीं बल्कि सामाजिक एकजुटता की वह परम शक्ति है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’— अर्थात पूरी दुनिया को एक परिवार मानने के वैश्विक आदर्श को आत्मसात करती है।”

आधुनिक वैश्विक संकट और भारतीय ज्ञान परंपरा का शाश्वत विकल्प

वर्तमान वैश्विक परिदृश्य और भौतिकवादी अंधी दौड़ पर चिंता व्यक्त करते हुए सरसंघचालक जी ने देश के सामने और दुनिया के सामने भारत की ज्ञान संपदा का महत्व रखा-

  • विकास का असंतुलित मॉडल: मौजूदा वैश्विक विकास मॉडल (Development Models) तेजी से अपनी सीमाओं और असफलताओं का सामना कर रहे हैं। बेलगाम लालच और अत्यधिक भौतिकवाद ने पर्यावरण और समाज दोनों को संकट में डाल दिया है।
  • प्रकृति और प्रगति में सामंजस्य: भारतीय सोच दुनिया को एक ऐसा संतुलित मार्ग प्रदान करती है जो अंधाधुंध दोहन के बजाय विकास और प्रकृति के बीच गहरा सामंजस्य बिठाती है। यह संयम, जिम्मेदारी और स्थिरता (Sustainability) पर आधारित एक मजबूत विकल्प है।
  • प्राचीन ग्रंथों की प्रासंगिकता: जहाँ आधुनिक विज्ञान आज लगातार नई खोजें कर रहा है, वहीं हमारे प्राचीन ग्रंथ जैसे ‘योग वशिष्ठ’ और ‘पतंजलि योग सूत्र’ सदियों पहले से ही मानव मन, चेतना और अस्तित्व की प्रकृति की गहरी व प्रामाणिक समझ देते हैं, जो आज के तनावग्रस्त समाज के लिए बेहद प्रासंगिक हैं।

उन्होंने कहा कि भारत हजारों वर्षों से ऋषियों, मुनियों और संतों की कठिन तपस्या से बनी एक महान सभ्यता है। आज मानवता के सामने जो भी पर्यावरणीय और सामाजिक संकट खड़े हैं, उनका समाधान हमारी इसी जीवनशैली में निहित है। इसलिए भारत को इन सभ्यतागत विचारों को पूरी दुनिया के साथ साझा कर वैश्विक नेतृत्व के लिए खुद को तैयार करना चाहिए।

Mohan Bhagwat on Sanatan Dharma RSS Thiruvananthapuram Kerala Speech

“कमजोरी ही मृत्यु है”: राष्ट्र-निर्माण के लिए शक्ति और समय का संकल्प

डॉ. मोहन भागवत जी ने समाज को केवल सच्चाई की दुहाई देने के बजाय सामर्थ्यवान बनने की भी कड़ी सीख दी। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के अमर संदेश “कमज़ोरी ही मृत्यु है” का विशेष रूप से ज़िक्र किया।

उन्होंने कहा कि समाज को सत्य के पथ पर चलने के साथ-साथ अपने भीतर शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और संगठनात्मक शक्ति का विकास करना अनिवार्य है। इसके लिए उन्होंने प्रत्येक नागरिक को दैनिक जीवन में नियमित व्यायाम, बौद्धिक विमर्श और सेवा कार्यों को अपनाने की वकालत की।

राष्ट्र-निर्माण में व्यक्तिगत योगदान का आह्वान

उन्होंने देश के प्रत्येक हिंदू और राष्ट्रभक्त नागरिक से एक बड़ी भावुक और व्यावहारिक अपील की। उन्होंने आग्रह किया कि राष्ट्र के पुनर्निर्माण और भारत की इस बड़ी वैश्विक व सभ्यतागत जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए समाज का मजबूत होना जरूरी है, इसलिए हर व्यक्ति को सामाजिक और राष्ट्रीय कार्यों के लिए प्रतिदिन कम से कम ‘एक घंटा’ अवश्य समर्पित करना चाहिए।

Mohan Bhagwat on Sanatan Dharma RSS Thiruvananthapuram Kerala Speech

100 वर्ष की यात्रा और सेवा का महासागर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शताब्दी यात्रा और उसके धरातलीय कार्यों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े और संगठनात्मक रुख भी स्पष्ट किए:

संघ कार्य का आयामवास्तविक स्थिति और संगठनात्मक नीति
सक्रिय सेवा परियोजनाएंदेशभर में 1,30,000 से अधिक सेवा प्रकल्प संचालित
परियोजनाओं का आधारये सभी कार्य पूर्णतः सामाजिक भागीदारी और आमजन के स्वैच्छिक योगदान से संचालित होते हैं।
राजनीति पर संघ का रुखRSS कोई राजनीतिक संस्था नहीं है और न ही प्रत्यक्ष रूप से चुनावी राजनीति में भाग लेता है।
लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धतासंघ जागरूक मतदान, मतदाताओं की 100% भागीदारी और राष्ट्रीय मुद्दों पर आधारित जन-भागीदारी को बढ़ाकर लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए निरंतर काम करता है।

अपने संबोधन के समापन पर सरसंघचालक जी ने समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए ‘पंच परिवर्तन’ (सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्व का जागरण और नागरिक कर्तव्य) के विचार पर पुनः जोर दिया।

उन्होंने कहा कि दुनिया के लिए भारत का शाश्वत संदेश हमेशा से एकता, प्रगाढ़ सद्भाव, संयम और सामूहिक एकजुटता का रहा है। इस महान और कल्याणकारी भूमिका को वैश्विक पटल पर प्रभावी ढंग से निभाने के लिए आज भारत को आंतरिक रूप से परम समृद्ध, अत्यधिक मजबूत और पूर्णतः आत्मविश्वासी बनना ही होगा।

Topics: पंच परिवर्तन संघMohan Bhagwat on Sanatan Dharmaमोहन भागवत केरल भाषणThiruvananthapuram RSS Eventयोग वशिष्ठ पतंजलि सूत्रKerala News Breakingडॉ. केशव बलिराम हेडगेवारवसुधैव कुटुंबकमRSS 100 years journey
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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