मध्य प्रदेश

कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन को नामांकन रद्द होने के बाद SC से भी झटका, कोर्ट ने याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान अनुच्छेद 32 के तहत हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता।

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कुलदीप सिंह

सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में अपने नामांकन रद्द किए जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस तरह की याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती।

क्या था पूरा मामला?

मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव हो रहा था। कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया था। नामांकन दाखिल करने के बाद स्क्रूटनी के दौरान बीजेपी के राज्य महासचिव राहुल कोठारी ने आपत्ति लगाई। उनका कहना था कि मीनाक्षी ने अपने नामांकन के साथ दिए गए हलफनामे में एक मामले की पूरी जानकारी नहीं दी थी।

ये मामला तेलंगाना के हैदराबाद का था। 2025 में एक निजी शिकायत में मीनाक्षी नटराजन का नाम एक प्रत्युत्तरकर्ता के रूप में आया था। शिकायत किसी कांग्रेस नेता के कथित अनुचित व्यवहार से जुड़ी थी और मीनाक्षी पर आरोप था कि उन्होंने उस नेता के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की। ध्यान दें कि पुलिस की कोई एफआईआर नहीं थी, बल्कि सीधे कोर्ट में निजी शिकायत दाखिल की गई थी और नोटिस जारी हुए थे।

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रिटर्निंग ऑफिसर (RO) ने आपत्ति मानते हुए मीनाक्षी का नामांकन रद्द कर दिया। इसके बाद कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

12 जून 2026 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.के. मिश्रा और ए.एस. चंदूरकर की बेंच ने इस याचिका पर सुनवाई की। मीनाक्षी की तरफ से सीनियर वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने दलील दी कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (RoP Act) के तहत नामांकन रद्द करने के लिए आरोप तय होना जरूरी है। इस मामले में अभी आरोप तय नहीं हुए थे, सिर्फ नोटिस जारी हुए थे। इसलिए नामांकन रद्द करना गलत था।

कोर्ट ने सिंघवी से पूछा कि क्या कोई ऐसा फैसला है जिसमें नामांकन प्रक्रिया के बाद कोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर का आदेश पलटा हो? सिंघवी ने कहा कि तथ्यों के आधार पर कोर्ट कानून लागू करेगा।

बीजेपी पक्ष की दलील

बीजेपी उम्मीदवार की तरफ से सीनियर एडवोकेट मुकुल रोहतगी ने याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि नामांकन रद्द होने से किसी मौलिक अधिकार का उल्लंघन नहीं होता। इसलिए संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में सीधे याचिका नहीं दायर की जा सकती। उन्होंने अनुच्छेद 329 का हवाला दिया, जो चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद कोर्ट के हस्तक्षेप पर रोक लगाता है। उनका तर्क था कि गलती हो या सही, मामले को ट्रिब्यूनल (चुनाव अदालत) के पास ही जाना चाहिए।

वहीं शीर्ष अदालत ने नटराजन की याचिका खारिज कर दी। बेंच ने साफ कहा कि चुनाव शुरू होने के बाद अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती। मीनाक्षी को चुनाव पिटीशन दायर करके मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में राहत मांगने की सलाह दी गई। कोर्ट ने मामले की मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं की।

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