नई दिल्ली। उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से आई मातृशक्ति की गरिमामयी सहभागिता के साथ विश्वमांगल्य सभा की दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रबोधन बैठक का शुभारंभ गुरुवार को नई दिल्ली स्थित ‘विश्व युवक केंद्र’ में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ.
“युगानुकूल मातृत्व (Contemporary Motherhood)” के मुख्य विचार-बिंदु पर आयोजित इस प्रबोधन बैठक के पहले दिन देश के चुनौतीपूर्ण सीमावर्ती क्षेत्रों— जम्मू, श्रीनगर, अनंतनाग, लेह-लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश और मणिपुर सहित अनेक राज्यों से आई लगभग 250 प्रमुख महिला कार्यकर्ताओं और प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

बैठक के उद्घाटन सत्र में विश्वमांगल्य सभा के संस्थापक एवं ‘गुरुजी श्री दत्ता पीठ परंपरा’ के 18वें पीठाधीश्वर परम पूज्य आचार्य स्वामी श्री जितेन्द्रनाथ जी महाराज का पावन सानिध्य प्राप्त हुआ. इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ प्रचारक व संगठन के मार्गदर्शक प्रशांत हलतरकर, विश्वमांगल्य सभा की राष्ट्रीय अध्यक्षा नलिनी हावरे तथा राष्ट्रीय संगठन मंत्री वृषाली जोशी मंच पर उपस्थित रहीं.
“मातृ निर्माण से राष्ट्र निर्माण” — पारिवारिक मूल्यों और संस्कारों के संरक्षण पर बल
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वमांगल्य सभा की राष्ट्रीय संगठन मंत्री वृषाली जोशी ने संगठन के ध्येय वाक्य को रेखांकित किया और कहा कि समाज को वैचारिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत करने के लिए मातृशक्ति का सुदृढ़ होना अनिवार्य है.

सत्र के प्रमुख विचार एवं संबोधन:
- वृषाली जोशी (राष्ट्रीय संगठन मंत्री): “मातृ निर्माण से राष्ट्र निर्माण’ के मूलमंत्र पर चलते हुए लाखों गृहस्थ महिला कार्यकर्ता और प्रचारिकाएं परिवार व समाज के प्रति दायित्व निभा रही हैं। भारतीय मातृत्व के सांस्कृतिक मूल्यों और भारतीयता से युक्त पारिवारिक वातावरण को सुरक्षित रखना आज की परम आवश्यकता है।”
- स्वामी श्री जितेन्द्रनाथ जी महाराज: “बदलते सामाजिक परिवेश और आधुनिक चुनौतियों के बीच मातृत्व की भूमिका, उसकी जिम्मेदारियों और भावी पीढ़ी के संस्कारों पर गंभीर व संवेदनशील चिंतन जरूरी है।”
- प्रशांत हलतरकर (वरिष्ठ प्रचारक): “किसी भी राष्ट्रनिष्ठ संगठन की वास्तविक शक्ति उसके समर्पित और स्थिर कार्यकर्ता होते हैं, जो संयुक्त परिवार की उदात्त भावना के साथ राष्ट्र निर्माण के कार्य को आगे बढ़ाते हैं।”
डॉ. मोहन भागवत जी करेंगे कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन व सार्वजनिक उद्बोधन
प्रबोधन बैठक के दूसरे दिन, शुक्रवार को कार्यक्रमों की विशेष श्रृंखला आयोजित की जा रही है:
1. कार्यकर्ता सत्र (प्रातः 9:00 बजे):
विश्व युवक केंद्र में आयोजित होने वाले विशेष कार्यकर्ता सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी उपस्थित कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे तथा आगामी वर्ष के संगठनात्मक प्रकल्पों और कार्यक्रमों की रूपरेखा पर संवाद करेंगे.
2. सार्वजनिक उद्बोधन (अपराह्न 4:00 बजे):
इसके बाद, नई दिल्ली स्थित अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में “युगानुकूल मातृत्व” विषय पर डॉ. मोहन भागवत का मुख्य सार्वजनिक उद्बोधन होगा. इस भव्य कार्यक्रम में उत्तर भारत के विभिन्न क्षेत्रों से लगभग 800 से 1,000 प्रबुद्ध महिलाओं, शिक्षाविदों और समाजसेविकाओं के शामिल होने की संभावना है.

विश्वमांगल्य सभा के अनुसार, यह दो दिवसीय प्रबोधन बैठक बदलते सामाजिक परिदृश्य में मातृत्व, परिवार संस्था, संस्कार संवर्धन और राष्ट्र निर्माण के गंभीर विषयों पर गहन विचार-विमर्श तथा संगठन के वार्षिक कार्यों के नियोजन का एक प्रमुख वैचारिक मंच है।













