
बांग्लादेश में सरकार के आने के बाद कुछ भी नहीं बदला है। हालत यह है कि हिन्दू अपनी ही जमीन पर अपने खर्चे पर अपने ही आराध्य की प्रतिमा का निर्माण नहीं करा सकते, क्योंकि जिहादी तत्व ऐसा होने नहीं देंगे। पिछले ही सप्ताह जब बांग्लादेश के रंगपुर में गैबन्ध जिले में प्रभु श्रीराम की निर्माणाधीन प्रतिमा को तोड़ने की धमकी दी। खबर चर्चा में आई थी, तभी ऐसा प्रतीत होने लगा था कि अब यह प्रतिमा नहीं बन पाएगी।
और ऐसा ही हुआ। अब खबर आ रही है कि बांग्लादेश की सरकार ने कट्टरपंथियों की धमकी के आगे घुटने टेकते हुए इस परिसर और प्रतिमा के निर्माण को निलंबित कर दिया है।
ianslive.in ने स्थानीय मीडिया के हवाले से बताया कि बांग्लादेश के अधिकारियों ने गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में स्थित श्री श्री राधा गोविंदा और काली मंदिर में भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी मूर्ति के निर्माण कार्य को रोकने का आदेश दिया है। बांग्लादेशी मीडिया की जो रिपोर्ट्स हैं उनके अनुसार गुरुवार शाम मंदिर के ऑडिटोरियम में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में मंदिर के सलाहकार श्यामलाल कुमार महंत ने इस प्रतिमा के निर्माण को रोकने के निर्णय की घोषणा की।
इस घोषणा के सामने आते ही इस घोषणा की तीखी प्रतिक्रिया हुई है। इस निर्णय का विरोध करने वालों का कहना है कि इस प्रतिमा के निर्माण का निलंबन इस प्रोजेक्ट का विरोध करने वाले इस्लामी समूहों के दबाव में किया गया है।
बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरींन ने अपने एक्स हैंडल पर बांग्लादेश सरकार के कट्टरपंथियों के आगे घुटने टेकने का उल्लेख किया और राम मंदिर के निर्माण को लेकर दी जा रही धमकियों और मजहबी उन्माद की भी निंदा की। उन्होनें यह भी प्रश्न किया कि एक ऐसे देश में जहां पर हजारों की संख्या में मस्जिदें हैं, वहाँ पर केवल एक हिन्दू प्रार्थना स्थल से लोगों को क्या समस्या हो सकती है?
उन्होंने लिखा कि अगर धार्मिक स्वतंत्रता सभी के लिए है, तो वह केवल बहुसंख्यकों पर ही नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों पर भी लागू होनी चाहिए।“ बांग्लादेशी पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने भी इस मंदिर के निर्माण को रोके जाने के निर्णय पर अपना क्षोभ व्यक्त किया है।