बांग्लादेश में कहने के लिए निर्वाचित सरकार आ गई है, मगर अभी भी हिंदुओं की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। सरकार बनने के बाद कुछ दिनों तक ऐसा लग रहा था कि हालात सुधरेंगे, मगर जो मामले सामने आए हैं, उन्हें देखकर ऐसा लगता नहीं है कि अल्पसंख्यकों की स्थिति में सुधार आया है। इस साल पहले चार महीनों में ही अल्पसंख्यकों पर हमले की 505 वारदात सामने आ चुकी हैं।
बांग्लादेशी अल्पसंख्यकों के लिए मानवाधिकार कांग्रेस (HRCBM) ने अपनी नई रिपोर्ट ‘उत्पीड़न जारी है: बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों पर लगातार हमले’ में लिखा कि जनवरी से लेकर अप्रैल 2026 के बीच बांग्लादेश के सभी 8 डिवीजन और 62 जिलों में अल्पसंख्यकों के प्रति हिंसा की 505 घटनाएं सामने आई हैं।
इनमें हत्या, संदिग्ध मौतें, शारीरिक हमले, अपहरण, यौन हिंसा, मंदिरों और धार्मिक संस्थानों पर हमले, जमीन पर कब्ज़ा, आगजनी, लूटपाट, डराना-धमकाना और बेअदबी से जुड़े मामले शामिल हैं। इस रिपोर्ट की सच्चाई अब एक और घटना से परिलक्षित होती है, जो हाल ही में सामने आई है। बांग्लादेश के रंगपुर में गैबन्ध जिले में प्रभु श्रीराम की निर्माणाधीन प्रतिमा को तोड़ने की धमकी दी गई है।
पत्रकार सालाह उद्दीन शोएब चौधरी ने एक्स पर लिखा कि बांग्लादेश में सनातन प्रोजेक्ट के खिलाफ जिहाद हो रहा है। जिहादियों ने बांग्लादेश में सभी प्रतिमाएं तोड़ने की धमकी दी है। इन धमकियों को तब और बल मिला जब जिहादियों ने गाइबांधा के एक मंदिर में बन रही भगवान राम की मूर्ति को गिराने की धमकी दी। उन्होंने भगवान राम की मूर्ति को ‘हिंदुत्व’ का प्रतीक मानकर उसे निशाना बनाया है और मुसलमानों से कहा है कि अगर सरकार इस प्रोजेक्ट में दखल देकर मूर्ति को नहीं गिराती है, तो वे खुद कार्रवाई करें।
Jihad against Sanatan project in Bangladesh. Jihadists threaten to demolish all idols in Bangladesh!
These threats were reverberated as Jihadists threatened to demolish a statue of Lord Ram, which is under construction, at a temple in Gaibandha. They have targeted the statue of…
— Salah Uddin Shoaib Choudhury (@salah_shoaib) June 8, 2026
सरकार को धमकाया गया कि अगर वे नहीं करेंगे तो आम मुसलमान करेगा। अब आम मुसलमान कैसे यह कर सकता है? यह वह तब कर सकता है, जब उसे यह आश्वासन हो कि उस पर कोई भी कार्रवाई नहीं होगी।
प्रभु श्रीराम की निर्माणाधीन प्रतिमा से क्या समस्या है? दरअसल समस्या इससे कहीं अधिक बड़ी है। शोएब चौधरी के अनुसार हुसैनपुर यूनियन के रामचंद्रपुर गांव में स्थित धार्मिक परिसर बांग्लादेश में हिंदुओं के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थ और सांस्कृतिक स्थलों में से एक बन गया है। स्थानीय पुजारी हरीदास बाबू ने इस प्रोजेक्ट को शुरू किया था। यहां पूरे बांग्लादेश से पर्यटक और श्रद्धालु आते हैं।
बांग्लादेश की सबसे बड़ी कृष्ण प्रतिमा भी यहीं
यहीं पर बांग्लादेश की सबसे बड़ी कृष्ण प्रतिमा है और जिसका उद्घाटन 25 नवंबर 2025 को राजशाही में भारत के असिस्टेंट हाई कमिश्नर मनोज कुमार ने किया था और उसके बाद से ही यहाँ पर पूरे देश से लोग आ रहे हैं। मगर अब इस पूरे स्थल को लेकर यह विवाद हो गया है कि इसे रॉ का समर्थन है। इस परिसर में विभिन्न देवी देवताओं की 144 प्रतिमाओं का निर्माण सम्मिलित है, और उसमें प्रभु श्रीराम और महादेव की भी प्रतिमाएं हैं। जहां समर्थक इसे बांग्लादेश की धार्मिक विविधता और सांस्कृतिक विरासत का केंद्र मानते हैं तो विरोधी अब राजनीतिक निशाना साध रहे हैं।
ममता बनर्जी के बयान के बाद निशाना तेज
ममता बनर्जी के ओसमान हादी की हत्या वाले बयान के बाद इस परिसर पर निशाना और तेज हो गया है। इसके बाद से ही अमेरिका में बैठे हुए पाकिस्तानी और तुर्की समर्थक हैंडल इस मंदिर को लेकर जहर फैला रहे हैं और बिना सबूत के यह कह रहे हैं कि इस परियोजना में भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का हाथ है। वे कट्टरपंथियों को इस परिसर के खिलाफ भड़का रहे हैं। वे इसे भारतीय प्रभाव का विस्तार कह रहे हैं। बिना किसी भी प्रमाण के उन्होंने प्रोजेक्ट के केयरटेकर हरिचंद्र तारोनी दास पर भारतीय खुफिया एजेंसियों से जुड़े होने का आरोप लगाना शुरू कर दिया। blitz में उन्होंने अपनी रिपोर्ट में भी दावा किया कि पाकिस्तान और तुर्की का समर्थन करने वाले कुछ प्रचारक इस तरह के बदनाम करने वाले प्रोपेगेंडा को जारी रखने के लिए फ्रांस और अमेरिका की जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी लिखा कि ये ऑनलाइन एक्टिविस्ट बांग्लादेशी लोगों को भारत के खिलाफ जिहाद छेड़कर ‘ग़ज़वा-ए-हिंद’ को हकीकत में बदलने के लिए उकसा रहे हैं। साथ ही अपने फ़ॉलोअर्स से बांग्लादेश में हिंदुओं का बड़े पैमाने पर कत्लेआम शुरू करने का भी आह्वान कर रहे हैं। देखना होगा कि बांग्लादेश में बन रहे इस धार्मिक और सांस्कृतिक परिसर की रक्षा बांग्लादेश की सरकार कर पाती है या नहीं!

















