हरियाणा

आधुनिक विज्ञान और संस्कृत का अनोखा संगम! VHP के ‘अखिल भारतीय शिक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ में जुटे देशभर के विद्वान

गुरुग्राम के अशोक सिंहल वैदिक अनुसंधान संस्थान में विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के दस दिवसीय 'अखिल भारतीय संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण वर्ग' का शुभारंभ हुआ है।

Published by
Shivam Dixit



गुरुग्राम । विश्व हिन्दू परिषद (VHP) के अशोक सिंहल वैदिक अनुसंधान संस्थान में आयोजित दस दिवसीय ‘अखिल भारतीय संस्कृत शिक्षक प्रशिक्षण वर्ग’ में देश भर से आए विद्वानों ने संस्कृत भाषा के महत्व, इसके संरक्षण और आधुनिक विज्ञान के साथ इसके समन्वय पर गहन मंथन किया।

“संस्कृत भारत की सनातन धरोहर की जीवंत प्रतिध्वनि”

विहिप के संरक्षक व विहिप संस्कृत आयाम के पालक दिनेश चन्द्र ने प्रशिक्षण वर्ग को संबोधित करते हुए कहा कि संस्कृत भाषा भारत की सनातन धरोहर की जीवंत प्रतिध्वनि है।

“अपने अप्रतिम गुणों और वैशिष्ट्य के कारण वैदिक युग में भी देववाणी प्रतिष्ठित थी और आज भी इसकी वैश्विक व्याप्ति है। हमें ऐसे अध्येताओं को तैयार करना होगा जो संस्कृत को समकालीन परिवेश में सूचना तकनीक (Information Technology) और वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) के साथ लेकर आगे बढ़ें।”
– दिनेश चन्द्र

धर्म, संस्कृति और भाषाओं की हो रही पुनर्प्रतिष्ठा: डॉ. सुरेंद्र जैन

वर्ग के उद्घाटन सत्र में विहिप के संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन ने देश में हो रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि यह देश का सौभाग्य है कि विगत 12 वर्षों से गौरव के प्रतीकों को अपनाने के साथ-साथ धर्म, संस्कृति, इतिहास, शिक्षा, कला और भाषाओं की पुनर्प्रतिष्ठा के लिए अत्यंत प्रभावी और ऐतिहासिक कार्य हो रहे हैं। ऐसे समय में संस्कार, दीक्षा और संस्कृति की पर्याय ‘देववाणी’ (संस्कृत) के प्रोत्साहन और संरक्षण के लिए व्यापक संभावनाएं उत्पन्न हुई हैं।

 

संस्कृत जीवन की दिशा निर्धारित करने वाली कालजयी शक्ति

प्रो. रमेश कुमार पांडेय के विचार-

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित ‘संस्कृत भारती’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष और श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश कुमार पांडेय ने गुरु के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “संस्कार, ज्ञान, विचार दृष्टि और सभी गुणों को विकसित करने वाले गुरू का जीवन में विशिष्ट महत्व है। संस्कृत गुरु और गुरुत्व को प्रतिष्ठित करने वाली सात्त्विक वाणी है; जीवन की दिशा निर्धारित करने वाली यह एक कालजयी शक्ति है।”

आधुनिक अनुसंधान और संस्कृत का समन्वय

विहिप संस्कृत आयाम के प्रमुख प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने विज्ञान और संस्कृत के बीच के संबंध को स्पष्ट करते हुए कहा कि आज विश्व यदि विज्ञान, अंतरिक्ष और सूचना तकनीक के क्षेत्र में नवीनतम अनुसंधान और निष्कर्ष में संलग्न है, तो युगों से मौजूद संस्कृत भाषा के व्यापक विश्लेषण और शोध का उत्साह भी उसी अनुपात में मौजूद है। विहिप का ‘संस्कृत आयाम’ इसी दृष्टि को धरातल पर उतारने के लिए दृढ़ संकल्पित है।

इस अवसर पर विहिप के अंतरराष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा जी ने संगठन के सभी आयामों का विस्तृत परिचय दिया। उन्होंने भारत में सनातन धर्म के प्रसार और विश्व भर में हिन्दुत्व की प्रतिष्ठा के लिए सभी से एकजुट होने का सशक्त आह्वान किया।

“संस्कृत बने युवाओं की जीविका और स्वाभिमान का शस्त्र”

राष्ट्रीय संस्कृत आयाम के सह-आयाम प्रमुख और हरियाणा संस्कृत अकादमी के पूर्व निदेशक डॉ. दिनेश शास्त्री ने संस्कृत वर्ग में उपस्थित सम्मानित अतिथियों और राष्ट्रीय प्रतिनिधियों का गर्मजोशी से स्वागत किया।

उन्होंने अपने स्वागत भाषण में विहिप के लक्ष्य को स्पष्ट करते हुए कहा, “संस्कृत को केवल संभाषण तक सीमित न रखकर शास्त्र विमर्श और लोकवाणी बनाना है। इसके साथ ही इसे राष्ट्रभक्त युवा शक्ति की जीविका (Livelihood) और स्वाभिमान का शस्त्र बनाना ही हमारा मुख्य लक्ष्य है।”

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