रायगड़ा में राष्ट्र सेविका समिति ओडिशा प्रांत का 15 दिवसीय प्रवेश एवं प्रबोध वर्ग सम्पन्न, नारी शक्ति की भूमिका पर बल
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रायगड़ा में राष्ट्र सेविका समिति ओडिशा प्रांत का 15 दिवसीय प्रवेश एवं प्रबोध वर्ग सम्पन्न, नारी शक्ति की भूमिका पर बल

राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने, समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Jun 3, 2026, 12:05 pm IST
in ओडिशा

भुवनेश्वर : राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाने, समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने तथा सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह बात राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख नीता देवी ने रायगड़ा में आयोजित 15 दिवसीय प्रवेश एवं प्रबोध वर्ग के समापन समारोह को संबोधित करते हुए कही।  नीता देवी ने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति महिलाओं के व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण के कार्य में सतत रूप से जुटी हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का मुख्य उद्देश्य भारतीय समाज में हिन्दू महिलाओं को जागृत, संगठित और संस्कारित कर उन्हें राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करना है।

समिति महिलाओं में कर्तव्यबोध, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति का विकास करते हुए उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार करती है। व्यक्तित्व निर्माण पर बल उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में चाहे पुरुष हो या महिला, एक योग्य, सुसंस्कृत और चरित्रवान व्यक्ति का निर्माण समाज, राज्य और राष्ट्र के हित के लिए अनिवार्य माना गया है। इसी आदर्श को साकार करने का उद्देश्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और राष्ट्र सेविका समिति दोनों का है।

 

ये संगठन व्यक्तित्व निर्माण, संस्कार, राष्ट्रभक्ति तथा सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित कर एक सशक्त एवं समरस समाज के निर्माण के लिए कार्य कर रहे हैं। संघ की स्थापना और विचारधारा नीता देवी ने अपने संबोधन में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने वर्ष 1925 में विजयादशमी के पावन अवसर पर हिन्दू समाज को एक सूत्र में संगठित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी। उन्होंने कहा कि आज संघ अपने शताब्दी वर्ष में शौर्य, संगठन और राष्ट्रीय एकता के संकल्प के साथ गौरवपूर्ण रूप से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि इसी विचारधारा से प्रेरित होकर, 11 वर्ष बाद पूजनीया लक्ष्मीबाई केलकर ने राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की महत्त्वपूर्ण भूमिका को ध्यान में रखते हुए राष्ट्र सेविका समिति की स्थापना की। उनका उद्देश्य भारत की दिव्य नारी शक्ति को संगठित, सुसंस्कृत, सक्षम और राष्ट्रभक्त व्यक्तित्व के रूप में विकसित करना था। भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान नीता देवी ने कहा कि भारतीय चिंतन में नारी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि शक्ति, संस्कार, त्याग और सृजन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की संरचना स्त्री और पुरुष दोनों के समान योगदान पर आधारित है। ऐसे में भारतीय संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि समाज और परिवार के निर्माण में नारी अनेक रूपों में अपना दायित्व निभाती है—कभी माता, कभी बहन और कभी पुत्री के रूप में। इन सभी भूमिकाओं के माध्यम से वह परिवार और समाज को संस्कारों से समृद्ध करती है। एक स्वस्थ, सशक्त और संगठित हिन्दू समाज के निर्माण में महिलाओं का योगदान अद्वितीय और अपरिहार्य है। राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भूमिका उन्होंने कहा कि भारतीय नारी केवल परिवार की आधारशिला ही नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की भी एक महत्वपूर्ण शक्ति है।

समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महिलाओं की भूमिका सदैव प्रेरणादायी रही है। उनके मार्गदर्शन से सेविकाओं को राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति अपने दायित्वों को और अधिक प्रभावी ढंग से निभाने की प्रेरणा मिलती है। नीता देवी ने कहा कि भारत केवल एक भूमि का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह एक महान तपोभूमि और सजीव मातृशक्ति का स्वरूप है। उन्होंने सभी को आह्वान किया कि वे अपनी मातृभूमि के प्रति समर्पित और उत्तरदायी बनें। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना उन्होंने कहा कि भारत संपूर्ण विश्व को अपना परिवार मानता है और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना के माध्यम से समस्त मानवता के कल्याण की कामना करता है। भारतीय नारी ने अपने विविध स्वरूपों और दायित्वों के माध्यम से एक स्वस्थ, सुसंस्कृत और संगठित समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और एक शाश्वत तथा गौरवशाली भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया है।

बालिका शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज जन्म लेने वाली प्रत्येक बालिका केवल घर की चारदीवारी तक सीमित रहने के लिए नहीं जन्म लेती। उन्होंने भारत की महान विभूतियों और प्रेरणादायी महिलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि नारी का जीवन परिवार, समाज, राज्य, राष्ट्र और विश्व के निर्माण की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी से जुड़ा हुआ है। सेविकाओं के लिए आह्वान नीता देवी ने उपस्थित सेविकाओं का आह्वान किया कि वे वर्तमान समय की चुनौतियों और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना निडरता, साहस और आत्मविश्वास के साथ करें। उन्होंने उन्हें सनातन मूल्यों से प्रेरित होकर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने तथा भारत को सनातन संस्कृति की पवित्र भूमि के रूप में विश्व के समक्ष नेतृत्व प्रदान करने के लिए सदैव तत्पर रहने का संदेश दिया।

उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति में नारी के योगदान, उसके महत्व तथा देश के प्रत्येक कोने में महिलाओं द्वारा निभाई जा रही भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। जनजातीय समाज से प्रेरक उदाहरण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जनजातीय महिला एवं शराब विरोधी आंदोलन की नेता सुमनी झोडिया ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षा औपचारिक रूप से सीमित रही, लेकिन जनजातीय क्षेत्रों में शराब के कारण परिवारों और समाज को हो रहे नुकसान को देखकर उन्होंने इसके खिलाफ आंदोलन शुरू किया। उन्होंने बताया कि यह आंदोलन कठिनाइयों और खतरों से भरा था, लेकिन प्रशिक्षण और जागरूकता के बाद उन्होंने इसे और आगे बढ़ाया। प्रशासन का सहयोग मिलने से इस अभियान को सफलता भी प्राप्त हुई। उन्होंने इसे सामाजिक परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण अनुभव बताया। प्रशिक्षण शिविर का आयोजन महिलाओं में कर्तव्यबोध, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित कर उन्हें समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए तैयार करने के उद्देश्य से राष्ट्र सेविका समिति, ओडिशा प्रांत द्वारा यह 15 दिवसीय प्रवेश एवं प्रबोध वर्ग आयोजित किया गया था। यह शिविर रायगड़ा स्थित एमआईटीएस कॉलेज परिसर में 16 मई से प्रारंभ होकर 1 जून को संपन्न हुआ।

इस शिविर में ओडिशा के विभिन्न जिलों से 100 से अधिक सेविकाओं ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान उनके बौद्धिक, मानसिक और शारीरिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। विविध प्रशिक्षण गतिविधियाँ प्रवेश एवं प्रबोध वर्ग में सेविकाओं को योगाभ्यास, शारीरिक प्रशिक्षण तथा घोष अभ्यास का प्रशिक्षण दिया गया। घोष अभ्यास के अंतर्गत बांसुरी, आनक तथा अन्य वाद्ययंत्रों के संचालन का अभ्यास कराया गया। देशभक्ति गीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से उनमें राष्ट्रभावना का जागरण किया गया। प्रतिदिन आयोजित बौद्धिक सत्रों और चर्चाओं के माध्यम से समिति की पदाधिकारियों ने समाज, राष्ट्र और विश्व से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। इन सत्रों का उद्देश्य सेविकाओं में जागरूकता, नेतृत्व क्षमता, संगठन कौशल तथा राष्ट्र सेवा की भावना का विकास करना था। शाखा और आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर में ‘शाखा’ को व्यक्तित्व निर्माण का मूल आधार बताया गया। सेविकाओं को दण्ड, जेष्ठी, नियुद्ध तथा मुष्टिका प्रहार जैसी आत्मरक्षा विधाओं का प्रशिक्षण दिया गया। इनका उद्देश्य आत्मविश्वास, अनुशासन, साहस और नेतृत्व क्षमता का विकास करना था। दैनिक कार्यक्रमों में श्लोक अभ्यास, समिति प्रार्थना, योगाभ्यास और खेलों के माध्यम से मानसिक, बौद्धिक और शारीरिक विकास पर बल दिया गया। इससे उनमें संगठन भावना, टीमवर्क और राष्ट्रसेवा के संस्कार विकसित हुए। वरिष्ठ पदाधिकारियों की उपस्थिति इस कार्यक्रम में राष्ट्र सेविका समिति की अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख नीता देवी के साथ ओडिशा, अंडमान, सिक्किम एवं पश्चिम बंगाल क्षेत्र की क्षेत्र प्रचारिका लतिका पाढी , ओडिशा प्रांत कार्यवाहिका आरती वैशाख तथा सह-कार्यवाहिका वैजयंती राणा उपस्थित रहीं। सभी ने सेविकाओं का मार्गदर्शन किया और उन्हें राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

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