किशनगंज अदालत का बड़ा फैसला: अवैध प्रवेश पर बांग्लादेश मूल के अमेरिकी नागरिक को सजा
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किशनगंज अदालत का बड़ा फैसला: अवैध प्रवेश पर बांग्लादेश मूल के अमेरिकी नागरिक को सजा

भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के मामले में किशनगंज की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बांग्लादेश मूल के अमेरिकी नागरिक को दोषी ठहराया है।

Written byसुबोध कुमार साहासुबोध कुमार साहा
Jun 2, 2026, 01:22 pm IST
inबिहार

किशनगंज। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में प्रवेश करने के मामले में किशनगंज की अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बांग्लादेश मूल के अमेरिकी नागरिक को दोषी ठहराया है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-प्रथम की अदालत ने विदेशी अधिनियम के तहत आरोपी शफीउल आलम को दो वर्ष छह माह के साधारण कारावास तथा 10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर उसे एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

यह निर्णय वर्ष 2025 के सत्र परीक्षण वाद संख्या 110 तथा दिघलबैंक थाना कांड संख्या 38/2024 से संबंधित है। लोक अभियोजन पक्ष के अनुसार, 30 मार्च 2024 को भारत-नेपाल सीमा पर तैनात एसएसबी की 12वीं वाहिनी को सूचना मिली थी कि नेपाल के रास्ते एक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक दिघलबैंक बाजार क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है। सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एसएसबी ने शफीउल आलम को गिरफ्तार किया था। उसके साथ पश्चिम बंगाल के मालदा निवासी मुहम्मद मुखलेश को भी हिरासत में लिया गया था, जिस पर अवैध प्रवेश में सहयोग करने का आरोप था।

जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

गिरफ्तारी के समय शफीउल आलम के पास से कई क्रेडिट, डेबिट और कैसीनो कार्ड, न्यू जर्सी का ड्राइविंग लाइसेंस, अमेरिकी डॉलर, नेपाली मुद्रा तथा अन्य दस्तावेज बरामद किए गए थे। जांच में पता चला कि वह पिछले 17 वर्षों से अमेरिका में रह रहा था, जबकि उसका टूरिस्ट वीजा मई 2023 और पासपोर्ट नवंबर 2023 में समाप्त हो चुका था।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि नेपाल के काकरभिट्टा से भारत होते हुए बांग्लादेश पहुंचाने के लिए एक लाख रुपये की डील हुई थी। आरोपी पिछले लगभग एक वर्ष से काठमांडू में रह रहा था और वहां एक कैसीनो में जुआ खेलता था। उसके मोबाइल फोन की जांच में सोने के बिस्किट, प्राचीन सिक्कों, बहुमूल्य आभूषणों तथा विभिन्न देशों के लोगों के पासपोर्ट की तस्वीरें मिलने की जानकारी भी जांच एजेंसियों को मिली थी।
जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया कि आरोपी के पास भारत में प्रवेश के लिए कोई वैध दस्तावेज नहीं था और उसने अधिकृत मार्ग का भी उपयोग नहीं किया था। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। लगभग दो वर्ष तक चली सुनवाई के बाद अदालत ने उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई।

सीमा सुरक्षा और अवैध घुसपैठ पर फिर छिड़ी बहस

इस फैसले के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध घुसपैठ, सीमा सुरक्षा और पहचान संबंधी मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है। जानकारों का मानना है कि अदालत का यह निर्णय विदेशी नागरिकों द्वारा अवैध तरीके से भारत में प्रवेश करने के मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक संदेश के रूप में देखा जाएगा। सीमा प्रबंधन, दस्तावेज सत्यापन और अवैध आव्रजन की रोकथाम को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की भूमिका भी एक बार फिर केंद्र में आ गई है।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी नागरिकों के लिए भारत में प्रवेश और निवास संबंधी नियम स्पष्ट हैं तथा इनके उल्लंघन पर कठोर कार्रवाई का प्रावधान है। किशनगंज अदालत का यह फैसला इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

Topics: घुसपैठबांग्लादेशी घुसपैठियांअमेरिकी नागरिक
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