भारत की संप्रभुता और अखंडता के समक्ष जनसांख्यिकी का परिवर्तन बहुत बड़ा और गंभीर संकट बनकर चुका है। देश में कांग्रेस पार्टी नीत सरकारों और प्रदेशों खासकर बंगलादेश से सटे राज्यों असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में लम्बे समय तक कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों की सरकारों में दशकों तक हमारे देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती गई। जिससे कि अवैध घुसपैठिये और रोहिंग्या ने इस खतरे को और ज्यादा गहरा कर दिया था।
लेकिन, अब केंद्र में भाजपा नीत नरेंद्र मोदी के दृढ़ नेतृत्व में ऐसी सरकार है जो समस्याओं को टालने की बजाय उन्हें जड़ से खत्म करने का साहस और नीयत रखती है। केंद्र के साथ ही असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी भाजपा के दृढ़ निश्चय की सरकारों के बनने के बाद अब इस समस्या के समाधान को काफी गति मिली है। इन सभी सरकारों के प्रयासों के कारण घुसपैठ की दिशा में पहला समाधान हुआ है कि घुसपैठिये अब देश में प्रवेश करने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं। वही कई दशकों से देश में रह रहे घुसपैठिये अब देश छोड़कर भाग भी रहे हैं।
पीएम मोदी ने लाल किले से दी थी चेतावनी
इसी राष्ट्रीय चेतना के अंतर्गत 15 अगस्त 2025 को लाल किले से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने इस सोची समझी साजिश के खिलाफ एक कठोर चेतावनी दी थी और स्पष्ट किया था कि घुसपैठिए हमारे युवाओं की आजीविका छीन रहे हैं। हमारी संस्कृति पर प्रहार कर रहे हैं और हमारी सीमाओं को असुरक्षित बना रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनको बख्शा नहीं जाएगा। लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने एक हाई पावर डेमोग्राफी मिशन शुरू करने का निर्णय किया था। इसी संकल्प को धरातल पर उतारते हुए मोदी सरकार ने अब इस जनसांख्यिकीय आक्रमण के खिलाफ ऐतिहासिक महा अभियान शुरू किया है। इस बड़े खतरे का स्थाई समाधान निकालने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा घोषित की गई हाई लेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज के गठन की घोषणा केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने की है।
जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर को उच्च स्तरीय समिति की कमान
इस उच्च स्तरीय समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जस्टिस प्रकाश प्रभाकर नावलेकर जी को सौंपी गई है। इस समिति में देश के जनगणना आयुक्त के साथ-साथ रिटायर्ड आईएएस दुर्गाशंकर मिश्रा, रिटायर्ड आईपीएस बालाजी श्रीवास्तव और प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. शामिका रवि जैसी बेहद सक्षम विभूतियों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। यह शक्तिशाली समिति पूरे देश में अवैध प्रवासियों के कारण आ रहे असामान्य जनसंख्या बदलावों की गहन जांच करेगी और एक निश्चित समय सीमा के भीतर इसका कानूनी समाधान प्रस्तुत करेगी।
जनसांख्यकी परिवर्तन है सोची समझी साजिश
गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने पूरी गंभीरता के साथ स्पष्ट किया है कि सीमाओं पर हो रहा यह जनसांख्यिकी परिवर्तन कोई प्राकृतिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह एक सोची समझी रणनीति और साज़िश का हिस्सा है। अवैध घुसपैठ के कारण असम में मुस्लिम आबादी वर्ष 1951 में केवल 24.68% से बढ़कर लगभग 40% तक पहुंच गया है। इसी तरह पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वर्ष 1951 में मुस्लिम आबादी 55% थी जो वर्ष 2011 तक बढ़कर 66% हो गई।
इसके ठीक विपरीत हिंदू आबादी के प्रतिशत में लगातार बड़ी गिरावट दर्ज की गयी है। रिपोर्ट्स और दस्तावेजों से इन घुसपैठियों के जिस खतरनाक संचालन की विधि का पर्दाफाश हुआ है वो रोंगटे खड़े कर देने वाला है। झारखंड के संथाल परगना और साहिबगंज जैसे आदिवासी क्षेत्रों में यह घुसपैठिए गरीब आदिवासी परिवारों को झांसे में लेते हैं और मात्र ₹5,000 का छोटा सा कर्ज देखते ही देखते ₹50,000 के भारी-भरकम बोझ में बदल दिया जाता है। जब यह गरीब परिवार कर्ज नहीं चुका पाते तो पैसे के बदले उनकी मासूम बेटियों से जबरन विवाह की शर्त रखी जाती है। इस विवाह के सहारे यह घुसपैठिए समाज में कानूनी मान्यता पा लेते हैं और फिर अपनी पत्नियों को मुखौटा बनाकर आदिवासी भूमि कानूनों का अनुचित लाभ उठाते हैं। झारखंड के पाकुड़, साहिबगंज और बरहेट जैसे जिलों में बसे जमाई टोला इसके उदाहरण हैं।
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वनवासियों की जमीनों पर कब्जा
फर्जी दान पत्र और आधार व राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल करके आदिवासियों की जमीन हड़प ली जाती हैं और स्थानीय राजनीति व सरकारी लाभों पर पूरी तरह कब्जा कर लिया जाता है। साल 2018 की रिपोर्ट बताती है कि प्रतिबंधित और राष्ट्र विरोधी संगठन पीएफआई के सदस्यों ने इसी साजिश के तहत संथाल परगना में लगभग 10,000 एकड़ भूमि पर अवैध कब्जा कर लिया था। यह वही संगठन है जो साल 2047 तक भारत को एक विशेष राज्य में बदलने का खुला देशद्रोही कार्यावली लेकर काम कर रहा था।
सिलीगुड़ी कॉरिडोर में जनसाख्यकी परिवर्तन बना राष्ट्रीय खतरा
पूर्वोत्तर के राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाले 22 कि.मी. के सिलीगुड़ी कॉरिडोर जैसे संवेदनशील इलाके के आसपास होने वाला जनसांख्यिकीय बदलाव भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन चुका है। इसके अलावा एनसीआरबी 2024 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में विदेशी नागरिकों द्वारा किए जाने वाले अपराधों में अकेले बांग्लादेशी घुसपैठियों की हिस्सेदारी 64% से भी अधिक है। मई 2025 में पश्चिम बंगाल की विशेष कार्य बल ने बीरभूम जिले से जमातुल मुजाहदीन बांग्लादेश यानी जेएमबी के दो खूंखार आतंकवादियों को गिरफ्तार किया था जो भारत के खिलाफ बड़े बम धमाकों और जिहाद के लिए स्थानीय लोगों की भर्ती की साजिश रच रहा था।
यह साबित करता है कि यह घुसपैठ सिर्फ रोजगार की तलाश नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ एक सुनियोजित आतंक का जरिया है। पिछली सरकारों ने दशकों तक वोट बैंक के लालच में इस गंभीर खतरे की तरफ से अपनी आंखें मूंदे रखी थी। कांग्रेस और उसके सहयोगियों की तरह केवल हवा में बातें करने और समस्या को टालने के बजाय, मोदी सरकार इस लड़ाई को उसके तार्किक और स्थाई अंत तक लेकर जा रही है।
हर घुसपैठिए की पहचान कर उसे देश से बाहर करेंगे: अमित शाह
गृह मंत्री श्री अमित शाह जी ने साफ शब्दों में निर्देश दिया है कि हर एक घुसपैठिए की पहचान की जाएगी और उन्हें देश से बाहर निकाला जाएगा। उन्होंने इस अभियान की तुलना धुर नक्सलवाद विरोधी अभियान से करते हुए बीएसएफ को पूरी ताकत और अटूट संकल्प के साथ जुटने का आदेश दिया है।
यह हाई पावर डेमोग्राफी मिशन भारत की संस्कृति, सीमाओं, आदिवासी बहनों, बेटियों और हमारी जमीनों की रक्षा करने वाला एक अभेद्य नागरिक ढाल साबित होने जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में अब भारत मूकदर्शक बनकर अपनी बर्बादी नहीं देखेगा, बल्कि जो गलतियां पिछले दशकों में की गई हैं, उन्हें अब मोदी सरकार द्वारा पूरी ताकत से कानूनी रूप से और हमेशा के लिए ठीक किया जा रहा है।

















