गत 26 मई को पुणे में विचारक एवं लेखक श्री रमेश पतंगे द्वारा लिखित पुस्तक ‘समाज संघटनेचा वारसा आणि संघ’ का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री भैयाजी जोशी ने कहा कि हिंदू और हिंदुत्व की अवधारणा सार्वकालिक और वैश्विक है। उन्हें किसी संप्रदाय की संकुचित सीमा में बिठाना उचित नहीं है। हम वास्तव में कौन हैं, इस स्वत्व का बोध हिंदुओं को हुआ तो समाज में व्याप्त सभी भेदभाव अपने आप समाप्त हो जाएंगे।
उन्होंने कहा कि विदेशी आक्रमणों के कारण हम अपनी व्यापक जीवन दृष्टि भूल गए और संकुचितता में फंस गए। इस भूली हुई नींव को फिर से मजबूत बनाकर समाज में एकात्मता निर्माण करने का काम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कर रहा है। उन्होंने कहा कि हिंदुत्व कोई संप्रदाय नहीं, बल्कि एक जीवन-दृष्टि है। इस पर आधारित जीवन-मूल्य कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक सबके लिए एक जैसे हैं।
हमारी भाषा, भगवान, तीर्थस्थल और धर्म-ग्रंथ किसी एक जाति के नहीं, बल्कि सबके हैं। श्री रमेश पतंगे ने कहा कि भगवान बुद्ध ने जिस तरह भारतीय ज्ञान मार्ग पर चलते हुए ज्ञान प्राप्त कर सारनाथ में धम्मचक्र प्रवर्तन किया और गिने-चुने लोगों के साथ संघ शुरू किया, वही समानता डॉ. हेडगेवार की संघ स्थापना में दिखती है।
बुद्ध के बाद पैदा हुए खालीपन को आगे गोरखनाथ और वारकरी-धारकरी संप्रदाय ने दूर किया। वही वैचारिक यात्रा गुरु नानकदेव, स्वामी दयानंद, वीर सावरकर, डॉ. बाबा साहेब आंबेडकर से डॉ. हेडगेवार तक जारी रही। इस संपूर्ण वैचारिक परंपरा का दर्शन जन साधारण को हो, इसलिए इस पुस्तक का लेखन किया है। कार्यक्रम का आयोजन भारतीय विचार साधना प्रकाशन ने किया था।

















