मुरादाबाद। साल 2011 में मुरादाबाद जिले के मैनाठेर थाना क्षेत्र स्थित डींगरपुर में हुए बहुचर्चित बवाल और तत्कालीन डीएम-डीआईजी पर जानलेवा हमले के मामले में पुलिस प्रशासन ने अपना रुख और सख्त कर लिया है। बीते 28 मार्च 2026 को अदालत द्वारा 16 दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद और 55-55 हजार रुपये के जुर्माने की सजा के खिलाफ 6 दोषियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन्होंने अपनी सजा और जुर्माना कम करने की अपील दायर की है। इसके जवाब में मुरादाबाद पुलिस ने भी इन अपराधियों को उनके किए की पूरी सजा दिलाने का संकल्प लिया है।
हाईकोर्ट में दमदार पैरवी करेगा प्रशासन
एसएसपी सतपाल अंतिल ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ के तहत इन जघन्य अपराधियों की अपील का पुरजोर विरोध किया जाएगा। जिला प्रशासन शासन स्तर पर बेहतरीन तालमेल के साथ हाईकोर्ट में इस मामले की दमदार पैरवी करेगा, ताकि यह अपील सिरे से खारिज हो सके।
एसएसपी ने बताया कि पुलिस प्रशासन इस जघन्य अपराध के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। छह आरोपियों की सजा कम करने की गुहार को हाईकोर्ट में विफल करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। प्रशासन ने शासन स्तर पर अभियोजन विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर लिया है। पुलिस का एकमात्र लक्ष्य यह है कि उच्च न्यायालय में सरकार और पीड़ितों का पक्ष पूरी मजबूती के साथ रखा जाए।
सभी 16 दोषी मुरादाबाद से बरेली सेंट्रल जेल शिफ्ट
अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने और आजीवन कारावास की सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था में कोई कोताही नहीं बरती है। मुरादाबाद जेल में किसी भी तरह के संभावित गठजोड़, स्थानीय दबदबे या कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका को टालने के लिए मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सभी 16 दोषियों को मुरादाबाद जेल से हटाकर बरेली सेंट्रल जेल शिफ्ट कर दिया गया है।
ये हैं उम्रकैद की सजा पाने वाले दोषी:
मंजूर अहमद, अली, हाशिम, फिरोज, कमरुल, नाजिम, मुजीब, यूनुस, रिजवान, अम्बरीश, कासिम, मोबीन, परवेज आलम, मुजीब (अन्य), तहजीब आलम और जाने आलम। अदालत ने इन सभी पर भारी जुर्माना भी लगाया है।
किशोर न्याय बोर्ड के मामलों में 15 अगस्त तक होगी कार्रवाई
इस प्रकरण में पुलिस की सक्रियता केवल सजायाफ्ता कैदियों तक सीमित नहीं है। घटना के समय नाबालिग रहे छह अन्य अभियुक्तों का मामला वर्तमान में किशोर न्याय बोर्ड में विचाराधीन है, उन पर भी प्रशासन की पैनी नजर है। प्रशासन ने तय किया है कि आगामी 15 अगस्त से पहले-पहले कोर्ट के माध्यम से इन छह आरोपियों के खिलाफ भी उचित और सख्त कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा सुनिश्चित की जाए, ताकि 15 साल पुरानी इस घटना में संपूर्ण न्याय की प्रक्रिया अपने अंतिम मुकाम तक पहुंच सके।
फ्लैशबैक: क्या था 2011 का डींगरपुर बवाल?
- अफवाह और हिंसा: जुलाई 2011 में मैनाठेर थाने में एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद 6 जुलाई को ‘कुरान फाड़ने’ की झूठी अफवाह फैलाकर सुनियोजित हिंसा भड़काई गई थी।
- अधिकारियों पर जानलेवा हमला: उग्र भीड़ ने तत्कालीन जिलाधिकारी राजशेखर और डीआईजी/एसएसपी अशोक कुमार सिंह पर जानलेवा हमला कर दिया था।
- आगजनी और लूट: उग्र भीड़ ने 23वीं वाहिनी पीएसी की गाड़ी फूंक दी थी और डींगरपुर चौकी से सरकारी कारतूस लूट लिए थे।
- आरोपी: इस मामले में कुल 33 लोग नामजद थे, जिनमें से 3 की मौत हो चुकी है।
- ऐतिहासिक फैसला: 15 साल लंबी कानूनी लड़ाई और राज्य सरकार की सख्ती व पुलिस के वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन के दम पर एडीजे-02 (मुरादाबाद) की अदालत ने 28 मार्च 2026 को अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दोषियों को सजा दी।

















