पिथौरागढ़ | हिमालय के दुर्गम और उच्च क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं का पहुंचना किसी संजीवनी से कम नहीं है। इसी दिशा में एक ऐतिहासिक और सेवाभावी कदम उठाते हुए सीमान्त सेवा फाउंडेशन ने 14,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित पवित्र आदि कैलाश में एक अत्याधुनिक ‘मोबाइल मेडिकल यूनिट’ (MMU) की शुरुआत की है। इस सुविधा से आदि कैलाश दर्शन के लिए आने वाले हजारों तीर्थयात्रियों को अब स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थितियों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
वरिष्ठ प्रचारक और केंद्रीय मंत्रियों ने किया शुभारंभ
इस जीवनदायिनी सेवा का भव्य शुभारंभ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक शिव प्रकाश जी, माननीय केंद्रीय राज्यमंत्री अजय टम्टा जी एवं माननीय केन्द्रीय राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा जी के कर कमलों द्वारा किया गया। अतिथियों ने इस पहल को सीमान्त क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा के लिए मील का पत्थर बताया।
सीमान्त सेवा फाउंडेशन का यह चलता-फिरता चिकित्सालय उच्च हिमालयी क्षेत्र में रहने वाले हमारे ग्रामीण भाइयों, विशेषकर वनवासी समुदाय और देश की रक्षा में अडिग हमारे सैनिकों के लिए एक बड़ा वरदान साबित होगा।
पहाड़ों पर मिलेंगी शहरों जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं
अक्सर ऊंचाई वाले इलाकों में ऑक्सीजन की कमी और ठंड के कारण यात्रियों और स्थानीय लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। अब इस मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए पहाड़ों पर ही निम्नलिखित जीवनरक्षक सुविधाएं मिल सकेंगी:
- एक्स-रे (X-ray) की त्वरित सुविधा
- हृदय की निगरानी के लिए ईसीजी (ECG)
- फेफड़ों की जांच के लिए पीएफटी (PFT)
- सभी प्रकार की रक्त जांच (Blood Investigations)
नाबी गांव में लगा पहला सफल कैंप: 66 मरीजों ने लिया लाभ
योजना के शुरू होते ही यह यूनिट धरातल पर सक्रिय हो गई है। 15 मई 2026 को व्यास घाटी के नाबी (Nabi) गांव में आदि कैलाश एमएमयू कैंप (Aadi Kailash MMU Camp) का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय लोगों और यात्रियों ने भारी उत्साह के साथ स्वास्थ्य लाभ लिया।
प्रथम कैंप की रिपोर्ट (15 मई 2026):
- कुल ओपीडी (OPD): 66 मरीज
- रक्तचाप (BP) की जांच: 50 व्यक्ति
- शुगर (Sugar) टेस्ट: 03 व्यक्ति
- एक्स-रे (X-ray): 01 व्यक्ति
- ड्रेसिंग (Dressing): 01 व्यक्ति
दुर्गम सीमांत क्षेत्रों में सीमान्त सेवा फाउंडेशन की यह पहल न केवल स्वास्थ्य के मोर्चे पर सुरक्षा प्रदान कर रही है, बल्कि दूरस्थ गांवों से पलायन रोकने और ग्रामीणों में विश्वास जगाने का भी एक मजबूत माध्यम बन रही है।











