नई दिल्ली। Nation First Policy Research and Change Foundation (NFPRC) द्वारा आज इंडिया हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में सांसदों और विधायकों के लिए एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में लोकसभा, राज्यसभा और विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के लगभग 80 जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में स्वास्थ्य, शिक्षा, डिजिटल संवाद, सुशासन और विकसित भारत@2047 से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जनप्रतिनिधियों को नीति विशेषज्ञों के साथ संवाद का एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना था, जहां वे बेहतर शासन व्यवस्था, प्रभावी क्रियान्वयन, संस्थागत समन्वय और क्षेत्रीय स्तर पर परिणाम आधारित कार्यप्रणाली पर विचार-विमर्श कर सकें।
NFPRC Foundation के अध्यक्ष तरुण चुघ ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि आयुष्मान भारत, नई शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल संवाद जैसे परिवर्तनकारी प्रयास विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बन रहे हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जनकेंद्रित शासन, प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीक आधारित संवाद व्यवस्था को और मजबूत बनाना अत्यधिक आवश्यक है।
“आयुष्मान भारत ने स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दी”
लोकसभा सांसद डॉ. सी. एन. मंजूनाथ ने “आयुष्मान भारत: भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की नई नींव” विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि PM-JAY और हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर के माध्यम से देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं की गांव-गांव तक पहुंच विकसित भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

सत्र के प्रमुख बिंदु:
- डिजिटल हेल्थ सिस्टम का विस्तार।
- स्वास्थ्य बीमा की क्लेम प्रक्रिया का सरलीकरण।
- ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- स्वास्थ्य ढांचे के आधुनिकीकरण पर जोर।
नई शिक्षा नीति 2020 और डिजिटल शिक्षा पर विशेष चर्चा
Central Square Foundation के सीनियर डायरेक्टर सौरभ चोपड़ा ने नई शिक्षा नीति 2020 को भारत की शिक्षा क्रांति का आधार बताया। उन्होंने कहा कि मातृभाषा आधारित शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट (कौशल विकास), डिजिटल लर्निंग और आधुनिक शिक्षा मॉडल देश के युवाओं को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण और तकनीक आधारित शिक्षा भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
“डिजिटल संवाद जनप्रतिनिधियों को जनता से जोड़ने का सबसे प्रभावी माध्यम”
लोकसभा सांसद डॉ. संबित पात्रा ने रणनीतिक डिजिटल संचार पर एक प्रभावशाली प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म आज जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच संवाद का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुके हैं।
- उन्होंने मीडिया सहभागिता, सोशल मीडिया प्रबंधन और सूचना के त्वरित प्रसार पर चर्चा की।
- संकट की स्थिति में प्रभावी संवाद रणनीतियों को साझा किया।
- उन्होंने बताया कि पारदर्शी और सक्रिय संवाद ही जनता के बीच विश्वास को मजबूत बनाता है।
- डॉ. पात्रा ने क्षेत्रीय भाषाओं और स्थानीय मीडिया की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया, जिससे जनप्रतिनिधि जनता से अधिक गहराई से जुड़ सकते हैं।
कोविड प्रबंधन पर विशेष वीडियो संदेश
कार्यक्रम के दौरान WTO जिनेवा में भारत के स्थायी मिशन में काउंसलर एवं “How India Braved the Covid-19 Pandemic” पुस्तक के लेखक श्री आशीष चंदोरकर का वीडियो संदेश भी प्रदर्शित किया गया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोविड-19 महामारी का सामना दृढ़ नेतृत्व, तकनीक आधारित प्रबंधन और जनभागीदारी के माध्यम से सफलतापूर्वक किया। उन्होंने CoWIN प्लेटफॉर्म और दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में भारत की ऐतिहासिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया।

शोध आधारित संवाद और क्षमता निर्माण पर जोर
कार्यक्रम के समापन पर NFPRC Foundation के बोर्ड सदस्य श्री अभिनव प्रकाश ने सभी वक्ताओं और जनप्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने संकल्प दोहराया कि NFPRC भविष्य में भी शोध आधारित संवाद, नीति विमर्श और जनप्रतिनिधियों के क्षमता निर्माण के लिए ऐसे कार्यक्रम आयोजित करता रहेगा।
पूरी कार्यशाला में शासन व्यवस्था को मजबूत बनाने, डिजिटल सिस्टम को बेहतर करने और सरकारी योजनाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। उपस्थित प्रतिभागियों ने ऐसे निष्पक्ष और शोध आधारित मंचों की जमकर सराहना की, जो जनप्रतिनिधियों को बेहतर निर्णय लेने और अपने अनुभव साझा करने का उत्कृष्ट अवसर प्रदान करते हैं।

















