भारत और फ्रांस के बीच 114 राफेल फाइटर जेट के लिए हुआ समझौता एक और कदम आगे बढ़ गया है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने लेटर ऑफ रिक्वेस्ट (LoR) तैयार कर लिया है, जो अब कुछ हफ्तों में फ्रांस को भेजा जाएगा। रक्षा सूत्रों ने यह जानकारी दी है।
दरअसल, LoR एक ऐसा दस्तावेज होता है, जिसका इस्तेमाल बड़े रक्षा सौदों को शुरू करने के लिए किया जाता है। इसके तहत दो सरकारों के बीच काम किया जाता है। इस डील की अनुमानित कीमत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये है।
डील में क्या-क्या शामिल है
इस सौदे के तहत कुल 114 जेट्स में से करीब 90 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे। फ्रांस की कंपनी डसॉल्ट एविएशन किसी भारतीय कंपनी के साथ पार्टनरशिप में मेक इन इंडिया के तहत यह काम करेगी। बाकी 24 जेट्स फ्रांस से तैयार हालत में आएंगे। इन जेट्स में लगभग 50% हिस्सा भारतीय कंपोनेंट्स का होगा। ये 4.5 जनरेशन के मल्टी-रोल फाइटर जेट्स हैं, जो भारतीय वायुसेना (IAF) के लिए खरीदे जा रहे हैं।
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IAF चीफ की फ्रांस यात्रा
भारतीय वायुसेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह जून की शुरुआत में फ्रांस जाने वाले हैं। ठीक उसके बाद प्रधानमंत्री मोदी 15 से 17 जून तक फ्रांस जाएंगे, जहां G7 समिट में हिस्सा लेंगे। सिंह की यह यात्रा डील को अंतिम रूप देने में मदद करेगी। अंतिम अनुबंध इस साल के अंत तक साइन होने की उम्मीद है। इसके लिए कीमत की आखिरी बातचीत और कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी जरूरी होगी।
पहले से मौजूद राफेल और नौसेना का सौदा
भारतीय वायुसेना के पास पहले से ही 36 राफेल जेट्स हैं, जो सितंबर 2016 के इंटर-गवर्नमेंट एग्रीमेंट के तहत आए थे। नौसेना अलग से 26 राफेल मरीन विमान खरीद रही है, जो कैरियर ऑपरेशन्स के लिए हैं। इनका समझौता अप्रैल 2025 में साइन हो चुका है।
MRFA प्रोग्राम और जरूरत
यह पूरी परियोजना मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) प्रोग्राम के तहत चल रही है। इसका मकसद वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी को पूरा करना है। फिलहाल IAF के पास 29 स्क्वाड्रन हैं, जबकि जरूरत 42.5 स्क्वाड्रन की है। यह दो मोर्चों (पाकिस्तान और चीन) पर सुरक्षा के लिए जरूरी माना जाता है।
पाकिस्तान J-35 पांचवीं पीढ़ी के 40 फाइटर जेट्स लेने की प्रक्रिया में है। इस बीच भारत HAL को Tejas Mk-1A विमानों की डिलीवरी तेज करने के लिए कह रहा है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने कहा था कि इस वित्तीय वर्ष में 10 Tejas Mk-1A डिलीवर हो सकते हैं।
वहीं भारत का अपना AMCA 2035 तक सेवा में आने वाला है, इसलिए तत्काल जरूरत को देखते हुए रूस के Su-57 पर भी ध्यान दिया जा रहा है। AMCA प्रोग्राम के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम, L&T और भारत फोर्ज के कंसोर्टियम को प्रोटोटाइप बनाने के लिए चुना गया है।

















