खाड़ी संकट के बीच बीते कुछ दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता का आखिरकार अंत हो गया है। अमेरिका ने एक बार फिर से ईरान पर हमला शुरू कर दिया है। हालांकि, इस हमले को लेकर अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड का कहना है कि उसने ये हमले आत्मरक्षा में किए हैं।
सेंटकॉम ने एक बयान जारी कर ईरान पर आरोप लगाया है कि होर्मुज स्ट्रेट के आसपास ईरानी नावें मिसाइल लॉन्च साइटें और बारूदी सुरंगे बिछाने की कोशिशें कर रही थी। जिसके कारण ये हमला किया गया। अमेरिका सेना का कहना है कि सेना चल रहे संघर्ष-विराम के दौरान “संयम बरतते हुए” US सेना की रक्षा करेगी। हालांकि, अमेरिकी सेना के हमले कुछ समय पहले ही दक्षिणी ईरानी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में धमाके हुए थे। इसके बाद ईरानी समाचार एजेंसी मेहर ने हालात नियंत्रण में होने की बात कही थी।
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डोनाल्ड ट्रंप ने अब नई बात शुरू की
इस बीच हर पल अपना बयान बदलने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब अब्राहम समझौते की बातें शुरू कर दी हैं। उनका कहना है कि ईरान के साथ युद्ध खत्म के लिए किसी भी समझौते की पहली शर्त ये है कि उसमें सउदी अरब और पाकिस्तान शामिल हों, ताकि इजरायल के साथ संबंधों को सामान्य बनाया जा सके। साथ ही उन्होंने सऊदी अरब और कतर को उन देशों के तौर पर बताया जिन्हें पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन के साथ-साथ “तुरंत” इन समझौतों पर दस्तखत कर देने चाहिए।
क्या है पूरा मामला
द गॉर्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान यूएई और बहरीन इसमें शामिल हुए थे। उस दौरान मध्यस्थता कर रहा था। इस बार अमेरिका सउदी अरब से भी यही चाहता है। लेकिन सउदी का कहना है कि वो फिलिस्तीन राष्ट्र को पूर्ण दर्जा मिलने के बाद ही इसमें शामिल होगा। वहीं पाकिस्तान के तो इजरायल के साथ कोई कूटनीतिक संबंध ही नहीं हैं।
वहीं ट्रंप ने अब्राहम समझौते का जिक्र करके ईरान संकट के बीच एक अलग ही मुद्दा छेड़ दिया है। ईरान का कहना है कि शांति वार्ता में ये मुद्दा पहले से शामिल ही नहीं था। उल्लेखनीय है कि डोनाल्ड ट्रंप कुख्यात ही इसी के लिए हैं।















