कोल्लम (दक्षिण केरल) । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने संघ की वैचारिक स्पष्टता और सामाजिक स्वीकार्यता को संगठन की 100 साल की यात्रा का मुख्य आधार बताया है। केरल के कोल्लम (चिन्नाकड़ा) स्थित नानी होटल में आयोजित ‘प्रबुद्ध पौर संगम’ को संबोधित करते हुए।
उन्होंने कहा कि स्वयंसेवकों के अथक परिश्रम और समाज के सक्रिय सहयोग ने ही संघ को आज इस शिखर पर पहुँचाया है। यह कार्यक्रम संघ की शताब्दी (Sangh Shatabdi) के उपलक्ष्य में आयोजित वैचारिक सभाओं की श्रृंखला का हिस्सा था, जिसका विषय “संघ की वैचारिक नींव” रखा गया था।

भारतीय लोकाचार और ‘हिंदुत्व’ की परिभाषा
सुनील आंबेकर ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि संघ ने औपनिवेशिक मानसिकता से प्रभावित समाज को भारतीय मूल्यों के अनुरूप ऊपर उठाने का कार्य किया है। उन्होंने हिंदुत्व की व्याख्या करते हुए कहा:
“हिंदुत्व वह तत्व है जो हमारे पूरे समाज को आपस में जोड़ता है और आपसी बंधनों को मजबूत करता है। जो कोई भी भारतीय जीवन मूल्यों का पालन करता है, वह हिंदू है। यह कोई संकुचित धर्म (Religion) नहीं है; बल्कि यह एक जीवन पद्धति और एक संस्कृति है।”
उन्होंने आगे कहा कि हिंदू धर्म कई मतों और विश्वासों का संगम है। धर्म वह आचार संहिता है जो इन सभी मतों को सही मार्ग पर ले जाती है। हिंदुत्व में ऐसा कुछ भी नहीं है जो विभाजन पैदा करे; यह पूरी तरह से समावेशी है।
“समाज में संगठन नहीं, बल्कि समाज का संगठन है संघ”
संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार (डॉक्टर जी) के विजन को याद करते हुए आंबेकर जी ने कहा कि उन्होंने संघ की कल्पना ‘समाज के भीतर एक संगठन’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘पूरे समाज के संगठन’ के रूप में की थी। संघ किसी भी धर्म के विरुद्ध नहीं है और इसमें कोई भी शामिल हो सकता है। आज समय की मांग है कि बिना किसी भेदभाव के समाज के हर व्यक्ति तक पहुँचा जाए।

टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया पर युवाओं का नियंत्रण
कार्यक्रम के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में सुनील आंबेकर ने आधुनिक तकनीक और युवाओं की भूमिका पर कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है जहाँ सोशल मीडिया के माध्यम से हर कोई अपनी पसंद-नापसंद व्यक्त कर सकता है।
उन्होंने कहा- हमारे देश के युवा विवेकशील हैं और संवैधानिक मूल्यों के प्रति गहराई से प्रतिबद्ध हैं। बंगाल में 93% मतदान होना इस लोकतांत्रिक परिपक्वता का प्रमाण है। तकनीक का युग होने के नाते बदलाव निश्चित हैं, लेकिन हमें तकनीक को अपनी संस्कृति के अनुरूप ढालना होगा। सोशल मीडिया हमें नियंत्रित न करे, बल्कि हमें इसे नियंत्रित करना होगा।

लघु फिल्म ‘संघम’ (Sangham) का विमोचन
इस कार्यक्रम में सुनील आंबेकर जी ने विश्व संवाद केंद्र (VSK) कोच्चि द्वारा तैयार की गई लघु फिल्म ‘संघम’ का विमोचन किया।
फिल्म का विषय: यह फिल्म केरल में आरएसएस के इतिहास, उसके क्रमिक विकास और सामाजिक उत्थान में उसके योगदान को रेखांकित करती है।
निर्माण: फिल्म का निर्देशन पत्रकार श्रीजीत नरिपट्टा ने किया है, जबकि लियो देवसी ने रचनात्मक निर्देशक के रूप में कार्य किया है।

इस गरिमामय कार्यक्रम में दक्षिण केरल प्रांत प्रचारक एस. सुदर्शनन, प्रचार प्रमुख एम. गणेशन, संपर्क प्रमुख सी.सी. सेल्वन, डॉ. आर.के. भूदेशी, कोल्लम महानगर सह संघचालक डॉ. जी. मोहन, एस.आर. सजीव और एस. रंजन सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।














