अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर दिन एक नया दावा करते हैं और अगले ही दिन फिर एक नई बात। इसी क्रम में एक बार फिर से खाड़ी संकट के बीच उन्होंने दावा किया है कि ईरान के साथ शांति समझौता लगभग तैयार हो गया है। उन्होंने कहा कि कुछ आखिरी बिंदुओं पर अभी बात चल रही है और जल्द ही इसे औपचारिक रूप से घोषित किया जाएगा। इस डील के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) खोल दिया जाएगा, जो तेल निर्यात के लिए बहुत महत्वपूर्ण रास्ता है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि अमेरिका, ईरान और दूसरे देशों के बीच यह समझौता “लार्जली नेगोशिएटेड” हो चुका है। उन्होंने पाकिस्तान के जरिए मध्यस्थता, खाड़ी देशों और इजरायल के साथ हुई बातचीत का जिक्र किया।
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समझौते की मुख्य बातें
पाकिस्तान के एक सूत्र ने बताया कि ईरान और पाकिस्तान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव दिया है, जिसमें युद्ध खत्म करने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलने की बात है। एक क्षेत्रीय अधिकारी के मुताबिक, डील में ये मुद्दे शामिल हो सकते हैं:
- युद्ध का आधिकारिक तौर पर खत्म होना
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दो महीने तक बातचीत
- ईरान द्वारा जलडमरूमध्य खोलना
- अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगे ब्लॉकेड को हटाना
ट्रंप ने बताया कि उन्होंने सऊदी अरब, यूएई, कतर, मिस्र, जॉर्डन, बहरीन, पाकिस्तान के आर्मी चीफ असिम मुनीर, तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन और इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से फोन पर बात की। साथ ही उन्होंने अपने सलाहकारों स्टीव विटकॉफ, दामाद जेरेड कुशनर और जेडी वेंस के साथ बैठक भी की।
क्या कहता है ईरान
ईरान की फार्स न्यूज एजेंसी (जो इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी है) ने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य अभी भी ईरान के नियंत्रण में रहेगा। रूट, समय, तरीका और परमिट देने का पूरा अधिकार ईरान के पास रहेगा। ईरान के टॉप नेगोशिएटर ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ से मुलाकात के बाद कहा कि अपने राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं होगा। ईरान चाहता है कि युद्ध पहले पूरी तरह खत्म हो, उसके बाद परमाणु कार्यक्रम पर बात हो। साथ ही वे फ्रोजन एसेट्स (करीब 25 बिलियन डॉलर) वापस चाहते हैं और युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई की मांग भी रखी है।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि यह सब फरवरी में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए युद्ध के साथ शुरू हुआ। ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर डील नहीं बनी तो फिर हमले शुरू हो जाएंगे। उन्होंने कहा था कि डील ऐसी होनी चाहिए जिसमें अमेरिका को सब कुछ मिले। अभी तक डील के सटीक ब्यौरे सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, लेकिन यह माना जा रहा है कि लड़ाई रुक जाएगी और लेबनान में भी संघर्ष थम सकता है। परमाणु समझौते पर 30-60 दिनों में आगे बात होगी।

















