वंदे मातरम् के 150 वर्ष: चांदनी चौक पर ‘वंदे मातरम् गाथा’ का आयोजन
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वंदे मातरम् के 150 वर्ष: चांदनी चौक पर आयोजित हुई ‘वंदे मातरम् गाथा’, भारती दीक्षित ने बताया गीत का अनसुना इतिहास

इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती एवं दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में वंदे मातरम् की 150वीं जयंती पर चांदनी चौक में 'वंदे मातरम् गाथा' का विशेष आयोजन किया गया।

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 23, 2026, 08:18 pm IST
inभारत, संघ @100, दिल्ली, काम की खबरें
Vande Mataram 150th Anniversary Bharti Dixit

दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के कार्यक्रम में वक्तव्य देतीं भारती दीक्षित

नई दिल्ली | इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती एवं दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के संयुक्त तत्वावधान में वंदे मातरम की 150वीं जयंती पर शनिवार को दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, चांदनी चौक में ‘वंदे मातरम् गाथा’ विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

1875 से 2026 तक का सफर: बंकिमचंद्र चटर्जी और उपन्यास ‘आनंद मठ’ का वो अमर इतिहास

वंदे मातरम की गाथा अपनी जुबानी में सुप्रसिद्ध किस्सागो और चित्रकार भारती दीक्षित ने ओजपूर्ण भाव के साथ सुनाया। ‘वंदे मातरम’ गीत बंकिमचंद्र चटर्जी ने 1875 में लिखा। 1882 में जब ‘आनंद मठ’ उपन्यास उन्होंने लिखा, इस गीत को उपन्यास में स्थान दिया गया। उपन्यास में संन्यासी भवानंद इस गीत को भाव में डूबकर गाता है। बाद में यह गीत संन्यासियों को राष्ट्र के प्रति समर्पण और निष्ठा से भर देता है।

भारती दीक्षित ने इसके लिखे जाने से लेकर बाद में वंदे मातरम् से संबंधित जो भी महत्वपूर्ण घटनाएं घटीं– उन सबको समाहित कर किस्सागो रूप में प्रस्तुत किया। कैसे 1896 में कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में युवा कवि रवींद्रनाथ ठाकुर के सुमधुर कंठ के गान ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि रवींद्रनाथ ठाकुर द्वारा फिर से 1906 के कांग्रेस के वार्षिक अधिवेशन में गाया गया और इसे राष्ट्रीय प्रसिद्धि मिली। बंगाल विभाजन के विरुद्ध यह जनता को एकीकृत करने का निमित्त बन गया। बंगाल से होते हुए 1907 में नागपुर और फिर 1907 में ही जर्मनी, फिर ब्रिटेन। अंग्रेज जितना ही इसे रोकने की कोशिश करते रहे, इस पर प्रतिबंध लगाते रहे, यह उतना ही प्रसिद्ध होता गया।

भारती दीक्षित ने वंदे मातरम् के स्वतंत्रता संग्राम में महत्व से लेकर अब तक के इसके सफर को ओजपूर्ण भाव के साथ प्रस्तुत किया। दर्शक-श्रोता भाव में डूबे हुए सुनते रहे, समय का जैसे लोप हो गया था। 50 मिनट की प्रस्तुति ने लोगों को अपने में बांधे रखा।

जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर: विनोद बब्बर

कार्यक्रम के प्रारंभ में अपने स्वागत वक्तव्य में इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के अध्यक्ष विनोद बब्बर ने वंदे मातरम की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि:

रावण पर विजय के पश्चात् जब विभीषण ने भगवान श्रीरामचंद्र से श्रीलंका में ही कुछ दिन रुकने का आग्रह किया तब उन्होंने कहा, ‘जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है और मुझे अपनी जन्मभूमि की याद आ रही है इसलिए मुझे जाना होगा।’

उन्होंने इस बात को भी रेखांकित किया कि भले ही वंदे मातरम् गीत बंकिमचंद्र चटर्जी ने लिखा है, लेकिन वंदे मातरम का भाव अथर्ववेद में “माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः” के रूप में सदियों से विद्यमान है।

उपस्थिति और संचालन

  • मंच का संचालन इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती के उपाध्यक्ष मनोज शर्मा ने किया।
  • परिषद् गीत सुनीता बुग्गा ने प्रस्तुत किया।
  • आरके पुरम विभाग अध्यक्ष मलखान सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

इस अवसर पर निम्नलिखित महानुभावों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही-

  • नीलम राठी (अ.भा. राष्ट्रीय मंत्री, अखिल भारतीय साहित्य परिषद्)
  • संजीव सिन्हा (केंद्रीय कार्यालय मंत्री)
  • रजनी मान (साहित्य परिक्रमा प्रबंधक)
  • बृजेश गर्ग (संयुक्त महामंत्री, इंद्रप्रस्थ साहित्य भारती)
  • अक्षय अग्रवाल (कोषाध्यक्ष)
  • सारिका कालरा (दक्षिणी विभाग अध्यक्ष)
  • जयसिंह आर्य, जगदीश सिंह, नीलम भागी, नवीन नीरज, मुन्ना रजक, प्रशांत सिंह सहित अनेक साहित्यकार एवं विद्यार्थी।
Topics: Vande Mataram 150 YearsBharti Dixit KissaDelhi Public Library EventBankim Chandra Chatterjee Anand MathNational Song India HistoryIndraprastha Sahitya Bharti
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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