'दिल्ली में संघ यात्रा' का प्रदर्शन: जानिए सुनील आंबेकर ने क्यों कहा- विभाजन के समय संघ की शक्ति उतनी नहीं थी, अन्यथा..
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‘दिल्ली में संघ यात्रा’ का प्रदर्शन: जानिए सुनील आंबेकर ने क्यों कहा- विभाजन के समय संघ की शक्ति उतनी नहीं थी, अन्यथा..

राजनीति करनी होती तो डॉ. हेडगेवार नया दल बना लेते: "दिल्ली में संघ यात्रा" के विमोचन पर बोले संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 22, 2026, 11:33 pm IST
inभारत, दिल्ली
Delhi Mein Sangh Yatra Sunil Ambekar RSS

नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर जी ने कहा कि 1942 से 1947 के बीच दिल्ली एवं सम्पूर्ण पंजाब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का तेजी से तथा बहुत गहराई से विस्तार हुआ। बड़ी संख्या में लोग संघ के साथ जुड़कर कार्य करने लगे तथापि देश के विभाजन के समय संघ की शक्ति उतनी नहीं थी अन्यथा देश का विभाजन भी नहीं होता। वह दिल्ली में शुक्रवार 22 मई 2026 को इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा प्रस्तुत डाक्यूमेंट्री “दिल्ली में संघ यात्रा” के प्रदर्शन के अवसर पर बोल रहे थे।

विभाजन की विभीषिका और स्वयंसेवकों का बलिदान: कराची में रहकर श्री गुरुजी ने किया था मार्गदर्शन

उन्होंने कहा कि जैसा डॉक्यूमेंट्री में भी प्रस्तुत किया गया उस समय श्री गुरुजी का निर्देश था कि विभाजन के बाद जो नया पाकिस्तान बन गया, उस क्षेत्र में जो हिंदू हैं उनकी पूरी तरह रक्षा होनी चाहिए और अंतिम व्यक्ति सुरक्षित रूप से आने तक स्वयंसेवक डटे रहें। इस कार्य में कितने अनगिनत स्वयंसेवकों का बलिदान हुआ, कितने लोगों को कष्ट हुआ, उसकी कोई गिनती नहीं है। विस्थापितों के लिए बहुत सारे कैंप्स लगाए गए उसमें कई लाखों लोग रहे। अगस्त 1947 के पहले पखवाड़े में जहाँ यहाँ सारी उथल-पुथल में सब लोग व्यस्त थे, तब श्री गुरुजी कराची में थे और उधर सारे स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन कर रहे थे कि किस तरीके से हिन्दू समाज की सुरक्षा का यह सारा कार्य किया जाए।

राजनीति नहीं, समाज में सांस्कृतिक जागरण था उद्देश्य: डॉक्टर हेडगेवार का मूल संकल्प

सुनील आंबेकर जी ने कहा कि अगर संघ, डॉक्टर हेडगेवार जी को राजनीति करनी होती तो वह एक नया राजनैतिक दल शुरू कर देते। लेकिन उन्हें तो समाज को खड़ा करना था, पूरे समाज के में एक सांस्कृतिक जागरण करना था। और इसीलिए उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बनाया। और समाज की सेवा, समाज का उत्थान, समाज को एक मजबूती के साथ खड़े करना, एक पूरे राष्ट्र को अपनी स्वयं के बल पर एक आत्मविश्वास के साथ खड़े करना, यही उसका उद्देश्य था।

सुनील आंबेकर जी ने कहा कि दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य का शुभारंभ संघ का प्रारंभिक काल में ही हो गया था। स्वयं आद्य सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार, जिन्होंने संघ की स्थापना की, उनके समय काल में ही दिल्ली में संघ कार्य प्रारंभ हुआ था। इसलिए संघ के 100 साल के इतिहास से दिल्ली का संघ कार्य बिल्कुल गहराई से जुड़ा हुआ है।

इतने वर्षों में देश के पटल पर जितनी भी घटनाएं हुईं, उन सब घटनाओं में दिल्ली का अपना एक महत्त्व रहा और स्वाभाविक रूप से दिल्ली में जो संघ कार्य रहा उसका भी अपना एक महत्त्वपूर्ण स्थान, महत्त्वपूर्ण योगदान उस सारी प्रक्रिया में रहा। जहाँ सत्ता का केंद्र होने के नाते दलों की राजनीति का भी केंद्र दिल्ली सतत बना रहा, स्वाधीनता के पश्चात भी। और उस परिस्थिति में, उस दौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शाखाओं के माध्यम से एक सामाजिक, सांस्कृतिक संगठन जो केवल अपने कुछ कार्यक्रमों तक सीमित न रहते हुए समस्त समाज को संगठित करने के ध्येय को लेकर चल पड़ा तथा यह कार्य लगातार अभी तक चलता आया।

दिल्ली में संघ के 100 साल: बीजारोपण से लेकर विस्तार तक की ऐतिहासिक साक्ष्यों वाली कहानी

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत संघचालक डॉ अनिल अग्रवाल ने कहा कि Continuity (निरन्तरता) Adaptivity (अनुकूलनशीलता) संघ कार्य विशेषता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत प्रचार प्रमुख रीतेश अग्रवाल ने कहा कि इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा प्रस्तुत यह डॉक्यूमेंट्री दिल्ली में संघ के बीजारोपण से लेकर उसके विस्तार तक की कहानी को साक्ष्यों, स्मृतियों और ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इसमें दिल्ली में संघ की शुरुआत, विभाजन का दर्द और उसकी विभीषिका के बीच किए गए संघ कार्य का चित्रण है। दिल्ली की पहली शाखा से आरम्भ होकर यह फिल्म आज की दिल्ली में संघ के व्यापक विस्तार तक की यात्रा को दर्शाती है। उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष पर अपनी दिल्ली अपनी बात द्वारा प्रकाशित विशेषांक “राष्ट्र सेवा के 100 वर्ष” की भी चर्चा की।

रीतेश अग्रवाल ने बताया कि पत्रिका के विशेषांक एवं डाक्यूमेंट्री के लिए दिल्ली के 60 से अधिक वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के औपचारिक एवं अनौपचारिक साक्षात्कार लिए गए, 85 से अधिक पुस्तकों का अध्ययन किया गया, समाचार पत्रों और लेखों को खंगाला गया तथा विभिन्न अभिलेखागार से सामग्री एकत्र की गई। इस प्रक्रिया में 100 घंटे से अधिक की वीडियो फुटेज देखी गई।

इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अभिलेखागार से पुराने वीडियो और साक्षात्कार देखे गए। पूर्व संघ अधिकारियों और सरसंघचालकों के भाषणों, साक्षात्कारों और उपलब्ध फुटेज का भी अध्ययन किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केन्द्रीय कार्यालय सचिव श्री अशोक पोरवाल जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत प्रचारक विशाल जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत सह कार्यवाह राजेश जी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केन्द्रीय कार्यालय व्यवस्था टोली सदस्य दिलीप जी तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र कार्यालय सचिव श्री राजवीर जी, इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष श्री अशोक सचदेवा जी इत्यादि की गरिमामय उपस्थिति रही।

Topics: Indraprastha Vishwa Samvad KendraSunil Ambekar RSSRSS 100 years historyDelhi Mein Sangh YatraShri Guruji Karachi 1947Dr Hedgewar Sangh SthapnaDr Anil Agarwal RSS
Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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