झारखंड में रक्षक बने भक्षक? जेल में महिला का शोषण और गर्भपात की साजिश
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झारखंड की जेलों में रक्षक ही बन गए भक्षक? जेल में महिला का महीनों तक शोषण फिर रची जबरन गर्भपात की साजिश

रांची की होटवार जेल में महिला कैदी से महीनों यौन शोषण, झालसा की जांच में खुलासा। बाबूलाल मरांडी ने की बड़ी मांग। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

Written byरितेश कश्यपरितेश कश्यप — edited by Shivam Dixit
May 21, 2026, 05:00 pm IST
in भारत, विश्लेषण, मत अभिमत, झारखण्‍ड
Hotwar Jail Ranchi Woman Prisoner Exploitation

क्या एक सभ्य समाज में इसकी कल्पना की जा सकती है कि वह स्थान, जिसे कानून की भाषा में ‘सुधार गृह’ कहा जाता है, वही किसी महिला की अस्मत लूटने का सुरक्षित अड्डा बन जाए? झारखंड की राजधानी रांची में स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार (होटवार जेल) से जो वीभत्स खबरें निकलकर आ रही हैं, वे न केवल रूह कंपा देने वाली हैं बल्कि पूरी प्रशासनिक व्यवस्था और हेमंत सोरेन सरकार के सुशासन के दावों के मुंह पर एक करारा तमाचा है।

जब जेल की ऊंची दीवारें अपराधियों को रोकने के बजाय रक्षकों द्वारा किए जा रहे कुकर्मों को छिपाने की ढाल बन जाएं, तो समझ लेना चाहिए कि राज्य में ‘कानून का राज’ नहीं, बल्कि ‘अंधेर नगरी’ का दौर है । एक असहाय महिला कैदी के साथ जेल के भीतर महीनों तक हुआ यौन शोषण केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक पूरी व्यवस्था के सड़ने का प्रमाण है।

झालसा (JHALSA) की जांच में बड़ा खुलासा: प्रथम दृष्टया सच पाए गए महिला कैदी के आरोप, जाने पूरा मामला?

रांची की होटवार जेल में बंद एक 23 वर्षीय मुस्लिम महिला कैदी ने आरोप लगाया है कि जेल अधीक्षक (सुपरिटेंडेंट) कुमार चंद्रशेखर और जेलर ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए उसके साथ महीनों तक शारीरिक संबंध बनाए । यह मामला तब और अधिक जघन्य हो गया जब दावा किया गया कि महिला जेल के भीतर ही गर्भवती हो गई।

झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (JHALSA) की टीम ने जब जेल का दौरा किया और पीड़िता का बयान दर्ज किया, तो उन्होंने अपनी शुरुआती जांच में इन आरोपों को प्रथम दृष्टया  सत्य पाया है।

साक्ष्य मिटाने के लिए जबरन गर्भपात की साजिश: जेल प्रशासन के दावों पर उठे गंभीर सवाल

हैरानी की बात यह है कि जेल प्रशासन ने कथित तौर पर साक्ष्य मिटाने के लिए महिला को बीमारी के बहाने किसी निजी नर्सिंग होम में ले जाकर उसका जबरन गर्भपात कराने की साजिश रची। हालांकि, जेल प्रशासन इन आरोपों को खारिज करते हुए महिला को नशे की आदी बता रहा है, लेकिन सवाल यह है कि अगर शोषण नहीं हुआ, तो 17 मई को उसका प्रेग्नेंसी टेस्ट क्यों कराया गया? इसके साथ यह भी सवाल उठता है कि अगर महिला नशे करती थी तो जेल में नशा पहुंचा कहां से?

सरकार की चुप्पी पर सवाल? बाबूलाल मरांडी ने की जेल आईजी पर कार्रवाई की मांग

इस घटना ने झारखंड के सियासी पारे को गरमा दिया है। राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को कड़ा पत्र लिखकर जेल अधीक्षक और जेल आईजी सुदर्शन मंडल की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की है । श्री मरांडी ने सीधा आरोप लगाया है कि जेल आईजी स्वयं इस मामले को रफा-दफा करने और फाइलें गायब करने की साजिश में शामिल हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई नहीं होगी, तो यह माना जाएगा कि इस संस्थागत भ्रष्टाचार में स्वयं मुख्यमंत्री की मौन स्वीकृति है।

इस पूरे मामले पर झालसा की टीम ने जेल के अंदर कुछ कमियों को उजागर किया है। टीम ने जेल दौरे में पाया कि जेल के कई वार्डों में ‘शिकायत पेटी’ तक नहीं लगाई गई थी, ताकि कैदी अपनी बात रख सकें। कहीं ना कहीं यह जेल प्रशासन की उस सोची-समझी साजिश का हिस्सा लगता है जिसके तहत कैदियों की आवाज को जेल की दीवारों के भीतर दबा दिया जाए।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने इसे मानवता पर ‘कलंक’ बताते हुए कहा कि पीड़िता सलाखों के पीछे है और आरोपी अधिकारी अपनी कुर्सियों पर बैठकर सबूतों से खेल रहे हैं । भाजपा प्रवक्ता अजय शाह ने अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर को ‘आदतन अपराधी’ बताते हुए उनके पुराने इतिहास (देवघर और हजारीबाग में शोषण के आरोप) का हवाला देकर उन्हें बर्खास्त करने की मांग की है। राफिया ने आलमगीर आलम पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जिस समय यह घिनौनी घटना जेल के भीतर हो रही थी, उस वक्त आलमगीर आलम भी उसी जेल में बंद थे।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “अपने ही समाज की एक बेटी पर हुए अत्याचार पर वे चुप रहे; जेल से निकलने के बाद उन्हें माला तो पहनाई गई, लेकिन पीड़िता के न्याय के लिए उनके मुँह से एक शब्द नहीं निकला”।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी होटवार जेल के इस मामले पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने इसे मानवाधिकारों का उल्लंघन’ और जेलों में ‘महिला सुरक्षा’ पर एक बड़ा खतरा बताया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

क्या यह पहली घटना है? होटवार से लेकर धनबाद और पलामू तक दागदार रहा है झारखंड की जेलों का इतिहास

जी नही, झारखंड की जेलों में यह पहली घटना नहीं कही जा सकती और हेमंत सरकार इसे पहली घटना कहकर पल्ला नहीं झाड़ सकती। राज्य की जेलें और संरक्षण गृह लंबे समय से अपराध के सुरक्षित ठिकाने बने हुए हैं।

उदाहरण के तौर पर इसी होटवार जेल का एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें शराब और जीएसटी घोटाले के आरोपी कैदी हाफ पैंट पहनकर हरियाणवी गानों पर डांस कर रहे थे। यह बताता है कि रसूखदारों के लिए जेल जेल नहीं, बल्कि अय्याशी का अड्डा है। इसके अलावा, वर्ष 2022 में होटवार जेल में 150 से अधिक मोबाइल सिम सक्रिय पाए गए थे, जिनसे कैदी बाहर रंगदारी मांग रहे थे।

दिसंबर 2024 : पलामू (सुदना) स्थित बालिका गृह में बच्चियों का यौन शोषण

बात सिर्फ रांची की होटवार जेल की ही नहीं है। ऐसा ही एक मामला दिसंबर 2024 को झारखंड के पलामू (सुदना) स्थित एक बालिका गृह में बच्चियों के यौन शोषण का मामला सामने आया था। आरोप है कि इस बालिका गृह के संचालक और एक महिला कर्मी ने बच्चियों को दिवाली और छठ के बहाने अपने घर ले जाकर उनके साथ कुकर्म किया। यह घटना बिहार के मुजफ्फरपुर कांड की याद दिलाती है।

दिसंबर 2023: धनबाद जेल के भीतर गैंगस्टर अमन सिंह की गोली मारकर हत्या

दूसरी घटना धनबाद जेल की है। दिसंबर 2023 में धनबाद जेल के भीतर गैंगस्टर अमन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी । सुरक्षित कहे जाने वाले स्थान पर हथियार पहुंचना जेल प्रशासन की मिलीभगत का सबसे बड़ा सबूत है।

अक्टूबर 2025: जमशेदपुर की घाघीडीह जेल के वार्डन द्वारा मासूम से छेड़खानी

अक्टूबर 2025 में जमशेदपुर की घाघीडीह जेल के वार्डन को 9 साल की मासूम बच्ची के साथ छेड़खानी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जब जेल के रक्षक बाहर मासूमों को नहीं छोड़ रहे, तो सलाखों के पीछे बंद महिलाओं की सुरक्षा की क्या गारंटी है?

सुरक्षा की स्थिति तो दयनीय है ही अब अगर स्वास्थ्य की स्थिति देखें तो पूरे राज्य में इस समय रांची, जमशेदपुर, हजारीबाग, देवघर, दुमका और गिरिडीह में 6 केंद्रीय जेल के अलावा 16 जिला जेल और 6 उप-जेल संचालित हैं। इन सभी केंद्रों पर कैदियों के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए एक व्यापक चिकित्सा ढांचे की आवश्यकता होती है। जबकि सरकारी आंकड़ों के अनुसार झारखंड की जेलों में डॉक्टरों की भारी कमी है। स्वीकृत 43 पदों में से 42 पद खाली (97% रिक्ति) पड़े हैं।

इन सब घटनाओं के साथ जेल के अंदर 262 हिरासत में मौत के मामलों को देखते हुए हाल ही में झारखंड हाई कोर्ट ने भी न्यायिक जांच न कराने पर “प्रशासनिक अराजकता” की बात कही है। एक रिपोर्ट के अनुसार बिरसा मुंडा जेल में ही पिछले 3 वर्ष में 38 मौतें हुई हैं ।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि हेमंत सरकार में ‘बेटी बचाओ’ और ‘महिला सुरक्षा’ के दावे इन जेलों की कालकोठरियों में दम तोड़ रहे हैं। जब जेल अधीक्षक जैसे शीर्ष अधिकारी ही महिला कैदियों की अस्मत के सौदागर बन जाएं, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे की जा सकती है? अब तो लोग भी सवाल करने लगे हैं कि झारखंड की जेलें अपराधियों को सुधारने के बजाय उन्हें संरक्षण देने और नए अपराधों को जन्म देने का केंद्र बन गई हैं?

Topics: hotwar jail ranchiHemant Soren governmentKumar Chandrashekhar Jail SuperintendentJHALSA Report JharkhandBabulal Marandi LetterJharkhand Crime NewsBirsa Munda Central Jail
रितेश कश्यप
रितेश कश्यप
डेढ़ दशक से पत्रकारिता में सक्रिय। राजनीति, सामाजिक और सम-सामायिक मुद्दों पर पैनी नजर। कर्मभूमि झारखंड।   [Read more]
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