नई दिल्ली, ‘नमो इंपैक्ट’ पुस्तक विमोचन के कार्यक्रम में विशेष अतिथि के तौर पर सांसद और संघनिष्ठ बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि विकसित भारत सिर्फ सड़कों, पुलों का नाम नहीं है। यह देश के सभी लोगों की आर्थिक सामाजिक धार्मिक और पारिवारिक संतुष्टि का नाम है। वे तीन मूर्ति के प्रधानमंत्री संग्रहालय में आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय और एकात्म मानववाद का उल्लेख करते हुए कहा, समाज का हित चिंतन और अंतिम आदमी की संतुष्टि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ध्येय है।
विकसित भारत के लिए संस्कृति, एकता और सेवा भावना जरूरी
यह वही भाव है जिसे 1950 में गुरुजी अर्थात गोलवल करजी ने व्यक्त करते हुए कहा था कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मातृभूमि तथा अपनी संस्कृति के प्रति चरित्र एवं मूलभूत एकता की अनुभूति के आधार पर लोगों में निस्वार्थ सेवा भावना का निर्माण करना चाहता है। बृजमोहन ने कहा कि राष्ट्र एक संस्कृतिक इकाई है,जहां सभी धर्मों के प्रति समादर का भाव है, लेकिन जब हम विकसित भारत का उल्लेख करते हैं तो साफ है कि हम देश को उसके अतीत का ठीक-ठाक ज्ञान कराना तथा उसकी महानताओं के प्रति प्रवृत्त करने के लिए ध्यान आकर्षित कराना भी चाहते हैं। अभिप्राय साफ है कि हम एक समाज थे, जिसकी पुण्य भूमि मातृभूमि थी, एक संस्कृति थी, इसलिए हम एक राष्ट्र थे।
2047 का विकसित भारत मोदी सरकार का सशक्त संकल्प
विकसित भारत की चेतना और संकल्प के सहायक बृजमोहन ने कहा कि यह नरेंद्र मोदी की दूर दृष्टि है कि कैसे वैयक्तिक विकास की पश्चिमी धारणा हमारी सामुदायिक विकास की अवधारणा में बदल जाती है। उन्होंने जल जीवन मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि सिर्फ घर नहीं घर में नल उज्ज्वला योजना की गैस भी जरूरी संकल्प है यह मोदी का विकास है। बृजमोहन ने अपनी धारदार शैली और प्रखर प्रांजल भाषा में कहा कि 2047 का विकसित भारत सिर्फ कल्पना नहीं केंद्र सरकार का सघन संकल्प है जहां चहुंओर खुशहाली हो, समृद्धि हो और संतुष्टि हो।















