VHP (विश्व हिंदू परिषद) के जॉइंट जनरल सेक्रेटरी डॉ. सुरेंद्र जैन ने सुप्रीम कोर्ट के कल दिए गए अहम फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह फैसला संविधान की बुनियादी भावना, सामाजिक न्याय और कानून के राज को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि धर्म बदलने के बाद कोई भी व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) की संवैधानिक कैटेगरी में नहीं आता है और इसलिए उसे SC/ST (अत्याचार रोकथाम) एक्ट के तहत सुरक्षा नहीं मिल सकती है। यह फ़ैसला संविधान (शेड्यूल कास्ट) ऑर्डर, 1950 की भावना के मुताबिक भी है, जिसमें साफ़ तौर पर कहा गया है कि सिर्फ़ हिंदू, सिख और बौद्ध मत को मानने वाले ही शेड्यूल कास्ट कैटेगरी में आते हैं।
धर्मांतरण के बाद जाति आधारित लाभ पर रोक
उन्होंने कहा कि इस फैसले से उस ट्रेंड पर रोक लगेगी जिसमें कुछ लोग धर्म बदलने के बाद भी अपनी पुरानी जाति के आधार पर कानूनी फायदे लेने की कोशिश करते हैं। इस निर्णय से धर्मांतरण माफिया पर गहरी चोट लगी है। ईसाई व मुस्लिम नेता एक ओर तो कहते हैं कि उनका धर्म समतावादी है, उनके यहां जाति-पाति की व्यवस्था नहीं है वहीं, दूसरी ओर वे दलित ईसाई व दलित मुस्लिम जैसे शब्दों की रचना करके उनके लिए आरक्षण की मांग करते हैं जिससे उनके धर्मांतरण के कुचक्रों को गति मिल सके। डॉ जैन ने कहा कि अब भारत की धरती में उनके कुचक्र नहीं चल सकेंगे।
अनुसूचित जाति के अधिकार और संरक्षण का उद्देश्य ऐतिहासिक सामाजिक अन्याय को दूर करना है, जो विशेष रूप से हिन्दू समाज की संरचना में उत्पन्न हुआ था। अतः जब कोई व्यक्ति स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन करता है, तो वह उस सामाजिक संदर्भ से भी स्वयं को अलग कर लेता है, जिसके आधार पर ये विशेष अधिकार प्रदान किए गए हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति पुनः हिन्दू, सिख या बौद्ध धर्म में लौटता है और समाज द्वारा उसे स्वीकार किया जाता है, तभी वह पुनः अनुसूचित जाति के अधिकारों का पात्र बन सकता है। अंत में डॉ. जैन ने कहा कि यह निर्णय देश में सामाजिक समरसता, पारदर्शिता और न्याय की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विहिप के कार्यकर्ता देशभर में ऐसे लोगों की सूची बनाएंगे जिन्होंने अनुसूचित समाज के अधिकारों पर डाका डाला है और उनसे वे अधिकार छीनकर उन लोगों दिलाए जा सकें जो उनके वास्तविक अधिकारी हैं।

















