जोधपुर/पाली । राजस्थान के पाली जिले में संचालित एक ऐसा कन्या गुरुकुल इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ कड़े अनुशासन और सनातन संस्कारों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
इस गुरुकुल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी नींव रखने वाली साध्वी भगवती बाईजी स्वयं कभी औपचारिक स्कूल नहीं गईं, लेकिन आज वह लगभग 1300 बेटियों का भविष्य संवार रही हैं। गुरुकुल में पढ़ने वाली बच्चियां उन्हें आदर और प्यार से “दाताश्री” कहकर बुलाती हैं।
पाली शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर रोहट क्षेत्र के नया चेंडा गांव में स्थित ‘श्री राजेश्वर भगवान आंजणी माता कन्या गुरुकुल’ साढ़े 27 बीघा की विशाल भूमि में फैला हुआ है। यहां स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, आधुनिक भोजनशाला और स्टाफ क्वार्टर जैसी विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

गुरु की एक सीख ने बदल दी साध्वी भगवती बाईजी की राह
साध्वी भगवती बाईजी ने मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में वैराग्य धारण कर लिया था। वे रोहट क्षेत्र के पुराना चेंडा स्थित राजाराम महाराज की बगीची में साध्वी हंजाबाई की शिष्या बनीं। एक दिन जब उनकी गुरु ने उन्हें पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ने को कहा, तब उन्होंने बताया कि उन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता। गुरु ने तब सीख दी कि बिना शिक्षा के गूढ़ ज्ञान प्राप्त करना अत्यंत कठिन है।
गुरु की इसी बात ने उनके जीवन की धारा को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने आश्रम में ही कड़ा परिश्रम कर अक्षरों का ज्ञान लिया और बाद में गीता सहित कई धार्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। इसी आत्म-अनुभव के बाद उन्होंने ग्रामीण और वंचित वर्ग की बेटियों को शिक्षित करने का दृढ़ संकल्प लिया।
2013 में हुई शुरुआत, आज कॉलेज स्तर तक की शिक्षा
साध्वी भगवती बाईजी ने 2 मई 2013 को इस गुरुकुल की स्थापना की घोषणा की थी। उन्होंने तय किया कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे और अपनी व्यक्तिगत बचत से वे बालिकाओं के लिए स्कूल का निर्माण करवाएंगी। वर्ष 2016 में 164 बेटियों के साथ शुरू हुए इस संस्थान में आज कक्षा 6 से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई होती है। वर्ष 2022 से शुरू हुए कन्या महाविद्यालय में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस विषयों की उच्च शिक्षा हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में दी जा रही है।

गुरुकुल के कड़े नियम: मोबाइल फोन और जंक फूड पर पूर्ण प्रतिबंध
इस गुरुकुल की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे यहाँ का कड़ा और अनुशासित वातावरण है, जो बेटियों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है:
- नो मोबाइल पॉलिसी: गुरुकुल परिसर में छात्राओं के लिए मोबाइल फोन रखना पूरी तरह वर्जित है। परिजनों से बात करने के लिए एक विशेष कॉलिंग कार्ड दिया जाता है, जिसमें परिवार के केवल दो नंबर ही सेव रहते हैं।
- जंक फूड पर रोक: परिसर में बाजार के चिप्स, कुरकुरे या बिस्किट जैसी चीजें लाना मना है। छात्राओं के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए केवल पौष्टिक और सात्विक भोजन दिया जाता है।
- गौशाला का शुद्ध दूध-घी: गुरुकुल परिसर में ही 10 बीघा में एक विशाल गौशाला संचालित है। यहाँ मौजूद 125 दुधारू गोवंश का शुद्ध दूध और घी विशेष रूप से छात्राओं के भोजन में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा 450 अन्य निराश्रित गोवंश की सेवा भी यहाँ निरंतर की जाती है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया नए भवन का लोकार्पण
बेटियों की शिक्षा और संस्कारों के इस अनूठे मॉडल की सराहना शासन स्तर पर भी हो रही है। हाल ही में 30 अप्रैल को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस परिसर में नए कन्या महाविद्यालय भवन का आधिकारिक लोकार्पण किया था।

सुबह 5 बजे योग-व्यायाम से शुरू होने वाली और रात 11 बजे समाप्त होने वाली यहाँ की दिनचर्या का एकमात्र उद्देश्य बेटियों को केवल साक्षर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, अनुशासित और अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक नागरिक बनाना है।

















