जोधपुर : स्वयं कभी स्कूल नहीं गईं, आज 1300 बेटियों को गुरुकुल में 'दाताश्री' दे रही हैं आधुनिक शिक्षा और संस्कार
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जोधपुर : स्वयं कभी स्कूल नहीं गईं, आज 1300 बेटियों को गुरुकुल में ‘दाताश्री’ दे रही हैं आधुनिक शिक्षा और संस्कार

पाली के नया चेंडा गांव में साढ़े 27 बीघा में फैला है यह अनोखा गुरुकुल। मोबाइल पूरी तरह बैन, गौशाला के शुद्ध दूध-घी से सजती है थाली। जानिए पाली (जोधपुर) के श्री राजेश्वर भगवान आंजणी माता कन्या गुरुकुल की कहानी

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 19, 2026, 11:34 pm IST
inभारत, शिक्षा, राजस्थान
Bhagwati Baiji Datashri addressing girls at Sri Rajeshwar Bhagwan Anjani Mata Kanya Gurukul Pali

जोधपुर/पाली । राजस्थान के पाली जिले में संचालित एक ऐसा कन्या गुरुकुल इन दिनों देश भर में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ कड़े अनुशासन और सनातन संस्कारों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

इस गुरुकुल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसकी नींव रखने वाली साध्वी भगवती बाईजी स्वयं कभी औपचारिक स्कूल नहीं गईं, लेकिन आज वह लगभग 1300 बेटियों का भविष्य संवार रही हैं। गुरुकुल में पढ़ने वाली बच्चियां उन्हें आदर और प्यार से “दाताश्री” कहकर बुलाती हैं।

पाली शहर से लगभग 50 किलोमीटर दूर रोहट क्षेत्र के नया चेंडा गांव में स्थित ‘श्री राजेश्वर भगवान आंजणी माता कन्या गुरुकुल’ साढ़े 27 बीघा की विशाल भूमि में फैला हुआ है। यहां स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, आधुनिक भोजनशाला और स्टाफ क्वार्टर जैसी विश्वस्तरीय बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

Bhagwati Baiji Datashri addressing girls at Sri Rajeshwar Bhagwan Anjani Mata Kanya Gurukul Pali

गुरु की एक सीख ने बदल दी साध्वी भगवती बाईजी की राह

साध्वी भगवती बाईजी ने मात्र 23 वर्ष की अल्पायु में वैराग्य धारण कर लिया था। वे रोहट क्षेत्र के पुराना चेंडा स्थित राजाराम महाराज की बगीची में साध्वी हंजाबाई की शिष्या बनीं। एक दिन जब उनकी गुरु ने उन्हें पवित्र श्रीमद्भगवद्गीता पढ़ने को कहा, तब उन्होंने बताया कि उन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता। गुरु ने तब सीख दी कि बिना शिक्षा के गूढ़ ज्ञान प्राप्त करना अत्यंत कठिन है।

गुरु की इसी बात ने उनके जीवन की धारा को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने आश्रम में ही कड़ा परिश्रम कर अक्षरों का ज्ञान लिया और बाद में गीता सहित कई धार्मिक ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। इसी आत्म-अनुभव के बाद उन्होंने ग्रामीण और वंचित वर्ग की बेटियों को शिक्षित करने का दृढ़ संकल्प लिया।

2013 में हुई शुरुआत, आज कॉलेज स्तर तक की शिक्षा

साध्वी भगवती बाईजी ने 2 मई 2013 को इस गुरुकुल की स्थापना की घोषणा की थी। उन्होंने तय किया कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे और अपनी व्यक्तिगत बचत से वे बालिकाओं के लिए स्कूल का निर्माण करवाएंगी। वर्ष 2016 में 164 बेटियों के साथ शुरू हुए इस संस्थान में आज कक्षा 6 से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई होती है। वर्ष 2022 से शुरू हुए कन्या महाविद्यालय में आर्ट्स, कॉमर्स और साइंस विषयों की उच्च शिक्षा हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में दी जा रही है।

Bhagwati Baiji Datashri addressing girls at Sri Rajeshwar Bhagwan Anjani Mata Kanya Gurukul Pali

गुरुकुल के कड़े नियम: मोबाइल फोन और जंक फूड पर पूर्ण प्रतिबंध

इस गुरुकुल की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे यहाँ का कड़ा और अनुशासित वातावरण है, जो बेटियों को मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है:

  • नो मोबाइल पॉलिसी: गुरुकुल परिसर में छात्राओं के लिए मोबाइल फोन रखना पूरी तरह वर्जित है। परिजनों से बात करने के लिए एक विशेष कॉलिंग कार्ड दिया जाता है, जिसमें परिवार के केवल दो नंबर ही सेव रहते हैं।
  • जंक फूड पर रोक: परिसर में बाजार के चिप्स, कुरकुरे या बिस्किट जैसी चीजें लाना मना है। छात्राओं के स्वास्थ्य को सर्वोपरि रखते हुए केवल पौष्टिक और सात्विक भोजन दिया जाता है।
  • गौशाला का शुद्ध दूध-घी: गुरुकुल परिसर में ही 10 बीघा में एक विशाल गौशाला संचालित है। यहाँ मौजूद 125 दुधारू गोवंश का शुद्ध दूध और घी विशेष रूप से छात्राओं के भोजन में उपयोग किया जाता है। इसके अलावा 450 अन्य निराश्रित गोवंश की सेवा भी यहाँ निरंतर की जाती है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया नए भवन का लोकार्पण

बेटियों की शिक्षा और संस्कारों के इस अनूठे मॉडल की सराहना शासन स्तर पर भी हो रही है। हाल ही में 30 अप्रैल को राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस परिसर में नए कन्या महाविद्यालय भवन का आधिकारिक लोकार्पण किया था।

Bhagwati Baiji Datashri addressing girls at Sri Rajeshwar Bhagwan Anjani Mata Kanya Gurukul Pali

सुबह 5 बजे योग-व्यायाम से शुरू होने वाली और रात 11 बजे समाप्त होने वाली यहाँ की दिनचर्या का एकमात्र उद्देश्य बेटियों को केवल साक्षर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर, अनुशासित और अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक नागरिक बनाना है।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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