दमयंती सेन, 1996 बैच की आईपीएस अधिकारी, अब पश्चिम बंगाल में महिलाओं और बच्चों पर अत्याचारों की जांच करने वाली कमिशन की सदस्य सचिव बन गई हैं। सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने टीएमसी शासनकाल के दौरान हुई संस्थागत भ्रष्टाचार और महिलाओं के खिलाफ अपराधों की जांच के लिए दो आयोग बनाए हैं। इनमें से एक महिलाओं और बच्चों, खासकर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समुदायों पर हुए अत्याचारों की जांच करेगा।
इस आयोग की अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस समाप्ति चटर्जी करेंगी और दमयंती सेन को सदस्य सचिव बनाया गया है। यह फैसला सोमवार को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने घोषित किया।
2012 का पार्क स्ट्रीट केस
दमयंती सेन का नाम सबसे ज्यादा 2012 के पार्क स्ट्रीट रेप केस से जुड़ा है। उस समय वे कोलकाता पुलिस की जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) थीं और यह पद संभालने वाली पहली महिला अधिकारी थीं।
6 फरवरी 2012 की रात कोलकाता के पार्क स्ट्रीट इलाके में एक महिला ने शिकायत की कि नाइटक्लब से निकलने के बाद एक मूविंग कार में उनके साथ गैंगरेप हुआ। मामला बहुत संवेदनशील था। उस समय ममता बनर्जी की टीएमसी सरकार नई-नई बनी थी। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे “सजानो घटना” (बनावटी घटना) बताया, जिसकी वजह से पूरे देश में काफी विवाद हुआ। महिलाओं के अधिकारों वाले संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए।
लेकिन दमयंती सेन की टीम ने सियासी दबावों के आगे न झुकते हुए जांच की। सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और फॉरेंसिक सबूतों के आधार पर उन्होंने कुछ दिनों में ही आरोपियों को ट्रैक कर लिया। जांच में साफ हुआ कि घटना हुई थी। पुलिस की रिपोर्ट राजनीतिक बयानबाजी से अलग थी।
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ट्रांसफर और साइडलाइन
केस सुलझते ही ममता सरकार ने उन्हें एक तरह की सजा सुनाते हुए क्राइम ब्रांच से ट्रांसफर करके बैरकपुर के पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज भेज दिया। वैसे तो टीएमसी सरकार ने इसे सामान्य प्रशासनिक बदलाव बताया था, लेकिन विपक्ष और कई लोग इसे सजा मानते थे क्योंकि उनकी जांच सरकार की सार्वजनिक स्थिति से मेल नहीं खा रही थी।
इसके बाद कई सालों तक उन्हें संवेदनशील मामलों से दूर रखा गया, हालांकि वे बाद में कोलकाता पुलिस की स्पेशल कमिश्नर भी बनीं। 2022 में कलकत्ता हाई कोर्ट ने उन्हें चार रेप के मामलों और रसिका जैन मौत के मामले की जांच सौंपी थी। 2023 में उन्हें एडीजी (ट्रेनिंग) का पद मिला।
अब सरकार ने सौंपी अहम जिम्मेदारी
अब नई सरकार ने उन्हें महिलाओं पर अत्याचारों की जांच वाली आयोग में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है। इस आयोग को संदेशखाली, कस्बा, बोगतुई और उस दौरान के अन्य ऐसे मामलों की जांच करनी है जहां महिलाओं और बच्चों के साथ अत्याचार हुए बताए जाते हैं।















