मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला एक मंदिर है। इस पर कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। हिन्दुओं को मंदिर में पूजा का अधिकार भी मिल चुका है। लेकिन सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने एक अहम कानूनी बात कही है। कोर्ट ने कहा कि किसी धार्मिक जगह की रक्षा के लिए सिर्फ ट्रस्ट या मैनेजमेंट कमेटी के लोग ही नहीं, बल्कि आम भक्त और श्रद्धालु भी अदालत में याचिका दायर कर पक्षकार बन सकते हैं।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान मस्जिद पक्ष की वकील शोभा मेनन ने मंदिर पक्ष के याचिकाकर्ताओं पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि ये लोग किस आधार पर याचिका दायर कर रहे हैं। खासकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस जैसी संस्था को लेकर यह दिक्कत बताई गई थी।
क्या कहा कोर्ट ने
भोजशाला मामले की सुनवाई के दौरान इंदौर हाई कोर्ट बेंच ने साफ कहा कि हिन्दू धर्म में देवताओं को सिर्फ मूर्ति नहीं, बल्कि एक पूरी धार्मिक इकाई के रूप में देखा जाता है। ऐसे पूजा स्थल की सुरक्षा के मामले में श्रद्धालुओं की भावनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता।
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कोर्ट ने यह भी माना कि इस तरह के मामले अक्सर बहुत पुराने होते हैं, इसलिए सिर्फ कागजी या तकनीकी बातों के आधार पर फैसला नहीं लिया जा सकता। कोर्ट को किसी भी समुदाय की आस्था, पूजा और धार्मिक विश्वासों के लंबे समय को भी ध्यान में रखना पड़ता है।
गौरतलब है कि 15 मई को धार स्थित भोजशाला मामले में इंदौर हाई कोर्ट बेंच ने अपना फैसला हिन्दुओं के पक्ष में सुनाया था। कोर्ट ने भोजशाला को मंदिर करार देते हुए एएसआई की रिपोर्ट को आधार बनाया। कोर्ट ने कहा था कि पुरातत्व एक विज्ञान है और इसे नकारा नहीं जा सकता है।

















