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परंपरा की पुष्टि

भोजशाला पर आए निर्णय का विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने स्वागत किया।

Written byPanchjanyaPanchjanya
May 26, 2026, 12:19 pm IST
inधर्म-संस्कृति, मध्य प्रदेश

भोजशाला पर आए निर्णय का विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता श्री आलोक कुमार ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक चेतना, सत्य एवं सनातन परंपरा की महत्वपूर्ण पुष्टि है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने यह निर्णय दे दिया है कि धार की भोजशाला हिंदू मंदिर है। न्यायालय के निर्णय से भोजशाला में अब हिंदुओं को निरंतर पूजा का अधिकार मिल गया है।

मुसलमानों के लिए भी कहा गया है कि वह सरकार से मस्जिद के लिए जगह मांग सकते हैं। उन्होंने कहा कि हम यह अपेक्षा करेंगे कि भोजशाला केवल मां वाग्देवी की पूजा का स्थान न रहे, अपितु पुरातन काल की तरह संस्कृत और धर्मशास्त्रों के अध्ययन का एक वैश्विक केंद्र बने। यह काम समाज और सरकार को मिलकर करना होगा। इस स्थान की ऊर्जा से पूरे जगत में आध्यात्मिक ज्योति फैलेगी।

उन्होंने कहा कि यह फैसला पूरी न्यायायिक पद्धति का पालन करके हुआ है। न्यायालय ने उस एएसआई को जांच करने के लिए नियुक्त किया था, जो इस बारे में भारत की सबसे विशेषज्ञ संस्था है। जांच की प्रतिलिपि दोनों पक्षों को दी गयी। दोनों पक्षों को अपना मत रखने के लिए पर्याप्त समय दिया। विद्वान न्यायाधीशों ने स्वयं मौके पर जाकर उस भवन का निरीक्षण भी किया।

श्री आलोक कुमार ने यह भी कहा कि इस प्रकार से एक वैज्ञानिक विश्लेषण करवाने के बाद, सबको सुनकर और प्रत्यक्ष भवन को देखने के बाद यह निर्णय आया है। माननीय उच्च न्यायालय ने उपलब्ध ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्यों एवं सतत हिंदू उपासना की परंपरा के आधार पर यह स्पष्ट रूप से माना है कि भोजशाला देवी वाग्देवी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर एवं संस्कृत शिक्षा का केंद्र था।

यह निर्णय केवल एक स्थल से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और सभ्यतागत अस्मिता से जुड़ा हुआ है। यह निर्णय संतुलित है, अच्छा है। सब लोगों को यह निर्णय स्वीकार करना चाहिए।श्री आलोक कुमार ने यह भी कहा कि यह विषय किसी की हार या जीत का नहीं है। हम सभी को न्यायालयों के आदेशों एवं संवैधानिक प्रक्रियाओं का सम्मान करना चाहिए।

उन्होंने सभी पक्षों से शांति, सौहार्द एवं सामाजिक समरसता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि यह निर्णय किसी समुदाय की पराजय नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य एवं सांस्कृतिक न्याय की पुनर्स्थापना है।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार एवं एएसआई इस निर्णय के अनुरूप भोजशाला मंदिर के संरक्षण, व्यवस्थापन एवं संस्कृत अध्ययन की गौरवशाली परंपरा के पुनर्जीवन हेतु शीघ्र आवश्यक कदम उठाएंगे।

Topics: विश्व हिंदू परिषदप्राचीन मंदिरमां सरस्वतीधारभोजशालावाग्देवी
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