विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में फैले ईबोला वायरस के प्रकोप को पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न (PHEIC) घोषित कर दिया है। यह बुंडीबुग्यो स्ट्रेन का प्रकोप है। WHO ने स्पष्ट किया है कि यह अभी महामारी का स्तर नहीं पहुंचा है।
प्रकोप कहां और कैसे शुरू हुआ
यह प्रकोप DRC के उत्तर-पूर्वी इतुरी प्रांत में शुरू हुआ, खासकर बूनिया, मोन्गवालू और रवाम्पारा इलाकों में शुरू हुआ है। अफ्रीका CDC के मुताबिक, 15 मई तक 246 संदिग्ध मामले दर्ज हुए थे और 65 मौतें हो चुकी थीं। शुरुआत में सिर्फ कुछ मामलों की लैब कन्फर्मेशन हुई थी, लेकिन जांच बढ़ने पर संख्या ज्यादा निकली।
कांगो में 17वीं बार फैला इबोला
यह कांगो का 17वां ईबोला प्रकोप है 1976 से अब तक। पिछला बड़ा प्रकोप 2025 में खत्म हुआ था। इस बार जायरे स्ट्रेन नहीं, बल्कि बुंडीबुग्यो स्ट्रेन है, जिसके लिए अभी तक कोई वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। क्षेत्र में खदानें हैं, संघर्ष है और लोग ज्यादा आवाजाही करते हैं, जिससे वायरस तेजी से फैला है।
युगांडा में फैलाव
वहीं युगांडा में एक 59 साल के कांगोली शख्स की मौत हो गई, जो कांगो से आया था और कम्पाला के अस्पताल में इलाज करा रहा था। युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसे आयातित केस बताया। अभी तक वहां स्थानीय संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन संपर्क वाले लोगों की निगरानी चल रही है। देश का इतुरी प्रांत साउथ सूडान की सीमा से लगा हुआ है, इसलिए क्रॉस-बॉर्डर मूवमेंट पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
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WHO और अन्य संगठनों की प्रतिक्रिया
WHO ने 5 मई को संदिग्ध मामलों की जानकारी मिलने के बाद टीम भेजी थी। शुरुआती फील्ड टेस्ट नेगेटिव आए क्योंकि वे जायरे स्ट्रेन के लिए सेट थे। अब पूरी तरह सपोर्ट बढ़ा दिया गया है। अफ्रीका CDC ने 15-16 मई को DRC, युगांडा, साउथ सूडान और अंतरराष्ट्रीय पार्टनर्स के साथ हाई-लेवल मीटिंग की।
US CDC भी निगरानी कर रहा है और तकनीकी मदद दे रहा है। WHO ने DRC को तुरंत 5 लाख डॉलर की इमरजेंसी फंडिंग दी है। फोकस इन चीजों पर है – संपर्क ट्रेसिंग, सुरक्षित दफन, संक्रमण रोकथाम, लैब टेस्टिंग, कम्युनिटी जागरूकता और जरूरी दवाइयों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिशें की जा रही है।
क्या हैं इस स्ट्रेन के लक्षण
इबोला के बुंडीबुग्यो स्ट्रेन के लक्षणों की बात करें तो लोगों में आम लक्षण बुखार, थकान, मांसपेशियों में दर्द, उल्टी और कुछ मामलों में खून आना शामिल हैं। इस स्ट्रेन में मृत्यु दर पहले के प्रकोपों में 20-50% के बीच रही है, लेकिन सही तरीके से देखभाल की जाए तो इसे कम किया जा सकता है।

















