अफ्रीका में खतरनाक इबोला वायरस का कहर लगातार जारी है। कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) के पूर्वी इलाके में ईबोला के संदिग्ध मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब तक 904 संदिग्ध मामले दर्ज हो चुके हैं और 119 संदिग्ध मौतें हुई हैं। इससे पहले 700 से ज्यादा मामले और 170 से ज्यादा मौतों की बात कही गई थी। ज्यादातर मामले इटूरी प्रांत में आ रहे हैं, जहां यह आउटब्रेक केंद्रित है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने कहा है कि इस आउटब्रेक का जोखिम कांगो के लिए बहुत ज्यादा है। लेकिन दुनिया के बाकी देशों में फैलने का खतरा अभी कम है। इस आउटब्रेक को वैश्विक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया जा चुका है।
स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले
पूर्वी कांगो में स्वास्थ्य कर्मी और ईबोला ट्रीटमेंट सेंटरों पर हमले हो रहे हैं। पिछले हफ्ते दो शहरों में दो केंद्रों को आग लगा दी गई। इस इलाके में सालों से सशस्त्र विद्रोही समूहों की हिंसा, लोगों का विस्थापन और सरकार की नाकामी चल रही है। अंतरराष्ट्रीय मदद में कटौती ने स्वास्थ्य सुविधाओं को और कमजोर कर दिया है। लोगों में गुस्सा और शक की भावना है। कई लोग विदेशी मदद समूहों पर भरोसा नहीं करते। एक घटना में रवाम्पारा में युवकों का एक समूह अपने दोस्त का शव वापस लेने के लिए केंद्र जलाने आया। वे आरोप लगा रहे थे कि मदद करने वाले लोग ईबोला के बारे में झूठ बोल रहे हैं।
दफनाने की प्रक्रिया पर विवाद
ईबोला फैलने से रोकने के लिए सरकार और मदद एजेंसियां संदिग्ध मरीजों के दफनाने का जिम्मा खुद ले रही हैं। पारंपरिक तरीके में परिवार वाले शव को तैयार करते हैं और लोग जमा होते हैं, जो संक्रमण बढ़ा सकता है। इस वजह से स्थानीय लोगों में नाराजगी है। अब उत्तर-पूर्वी कांगो में शोक सभा और 50 से ज्यादा लोगों के जमा होने पर पाबंदी लगा दी गई है। कुछ दफनों की सुरक्षा के लिए सैनिक और पुलिस तैनात किए गए हैं।
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क्या है इलाके की स्थिति
बताया जाता है कि पूर्वी कांगो में कई विद्रोही समूह सक्रिय हैं। कुछ विदेशी देशों से जुड़े हैं, कुछ ISIS से लिंक रखते हैं। रवांडा समर्थित M23 विद्रोही कुछ हिस्सों पर काबिज हैं। इटूरी प्रांत में कांगो सरकार का नियंत्रण है, लेकिन वह कमजोर है। एलाइड डेमोक्रेटिक फोर्सेस (ADF) नामक युगांडन इस्लामिस्ट समूह यहां हमले करता रहता है।
डॉक्टर विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार, सुरक्षा की वजह से डॉक्टर और नर्स भाग गए हैं। स्वास्थ्य केंद्र ओवरलोड हो गए हैं और कुछ जगहों पर हालात बहुत खराब हैं। UN के मुताबिक, इटूरी में करीब 10 लाख लोग हिंसा से विस्थापित हो चुके हैं। बुनिया शहर के आसपास के डिस्प्लेसमेंट कैंप्स में फैलने का डर है, जहां पहले मामले आए थे।
सामग्री की कमी
मदद करने वाली टीमों के पास जरूरी उपकरण नहीं हैं – फेस शील्ड, प्रोटेक्टिव सूट, टेस्टिंग किट, बॉडी बैग आदि। एक लोकल मदद समूह की अध्यक्ष जुलिएन लुसेंगे ने बताया कि उनके पास सिर्फ हैंड सैनिटाइजर और कुछ मास्क हैं। उन्होंने मदद मांगी है लेकिन अभी कुछ नहीं मिला। यह बुन्डीबुग्यो प्रकार का ईबोला वायरस है, जिसके लिए कोई मंजूरशुदा वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। कांगो में पहले भी ईबोला के 12 से ज्यादा आउटब्रेक आ चुके हैं। इस बार सुरक्षा, विस्थापन और स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरी के बीच यह लड़ाई और मुश्किल हो गई है।












