मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला (Bhojshala) पर हाई कोर्ट के फैसले के बाद आज श्रद्धालु भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना करने के लिए प्रवेश करने लगे हैं। इसकी तस्वीरें भी सामने आ गई हैं। इस मौके पर पुलिस ने सुरक्षा की कड़ी व्यवस्था कर रखी है।
#WATCH | Madhya Pradesh | People enter Bhojshala complex in Dhar to offer prayers after the High Court declared the Bhojshala site as a temple pic.twitter.com/wlKTd1kQkQ
— ANI (@ANI) May 16, 2026
क्या है कोर्ट का फैसला
इंदौर हाई कोर्ट की बेंच ने ऐतिहासिक भोजशाला को वाग्देवी का मंदिर घोषित करते हुए अदालत ने हिन्दुओं के पूजा के अधिकार को बरकरार रखा है। कोर्ट ने एएसआई सर्वे को स्वीकार करते हुए कहा कि पुरातत्व एक विज्ञान है और इस विवाद का फैसला करते समय वैज्ञानिक अध्ययनों से सामने आए निष्कर्षों पर भरोसा किया जा सकता है। इससे पहले जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की बेंच ने सुनवाई पूरी करने के बाद 12 मई को अपनी फैसला सुरक्षित रख लिया था।
क्या है भोजशाला का इतिहास
भारतीय इतिहास में परमारवंशीय राजा भोजदेव (संक्षिप्त नाम राजा भोज) का नाम बड़े ही सम्मान के साथ लिया जाता है। राजा भोज का शासनकाल 1000 से 1055 ई. तक रहा। वे मालवा स्थित उज्जयिनी (अब उज्जैन) के महान राजा विक्रमादित्य की वंश परंपरा के 11वें राजा थे। राजा भोज के शासनकाल के पूर्व यहां की राजधानी उज्जयिनी हुआ करती थी, जिसे राजा भोज ने अपने शासन काल के दौरान धार में स्थानांतरित कर दिया था।
राजा भोज चूंकि कला एवं शिक्षा के रक्षक थे, इसलिए उन्होंने अपने शासनकाल में कई जगहों पर ‘भोजशालाओं’ की स्थापना की। उनमें धार स्थित भोजशाला विश्वविख्यात है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि भोजशाला दो शब्दों से मिलकर बना है- भोज एवं शाला। अर्थात् राजा भोज द्वारा स्थापित शाला। मगर यह केवल बच्चों की शाला नहीं थी, बल्कि एक असाधारण विश्वविद्यालय था, जहां अध्ययन के लिए देश-विदेश से भी छात्र आया करते थे।
इंदौर हाई कोर्ट ने ASI सर्वे के आधार पर धार भोजशाला के हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र स्वरूप को माना। साथ ही मां सरस्वती की प्रतिमा वापस लाने पर सरकार को विचार करने को कहा। pic.twitter.com/koQANgNn18
— Vishnu Shankar Jain (@Vishnu_Jain1) May 15, 2026
हिन्दू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन का बयान
भोजशाला पर कोर्ट के फैसले पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए हिन्दू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि राम मंदिर के बाद देश की कोर्ट ने ये दूसरा बड़ा ऐतिहासिक फैसला दिया है। 2022 की याचिका पर 4 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अब कोर्ट ने हिन्दुओं को पूजा का अधिकार दिया है। कोर्ट ने ब्रिटिश म्यूजियम में रखे मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने पर विचार करने के लिए भी सरकार को कहा है। साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष के द्वारा हर शुक्रवार को नमाज किए जाने के अधिकार को खारिज कर दिया है। साथ ही कोर्ट ने मुस्लिमों को ये सहूलियत दी है कि अगर वो मस्जिद के लिए कोई जगह चाहते हैं तो इसके लिए सरकार को प्रत्यावेदन दे सकते हैं।

















