भारतीय रेलवे देश की सबसे बड़ी परिवहन व्यवस्था है। हर दिन करोड़ों लोग ट्रेन से यात्रा करते हैं। यात्रियों को टिकट बुक करने में आसानी हो, इसके लिए रेलवे अब अपने पुराने सिस्टम को बदलने जा रहा है। रेलवे अपना पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) नया करने वाला है, जो पूरी तरह से आधुनिक और क्लाउड तकनीक पर आधारित होगा। यह बदलाव अगस्त से लागू होने की संभावना है।
आधुनिक रेलवे बुकिंग व्यवस्था
पुराना PRS सिस्टम 1986 में शुरू किया गया था। उस समय यह बहुत अच्छा और आधुनिक माना जाता था। लेकिन अब समय बदल गया है और यात्रियों की संख्या बहुत बढ़ गई है। ऑनलाइन टिकट बुकिंग भी बहुत ज्यादा हो गई है। इसी कारण पुराना सिस्टम कई बार धीमा हो जाता था और त्योहारों या छुट्टियों के समय इसमें समस्या आने लगती थी। नया PRS सिस्टम पूरी तरह क्लाउड तकनीक पर काम करेगा। इसका मतलब है कि डेटा एक ही जगह न होकर कई सर्वरों पर सुरक्षित रहेगा। इससे सिस्टम तेज, सुरक्षित और मजबूत बनेगा। नया सिस्टम एक मिनट में लगभग 1.5 लाख टिकट बुक कर सकेगा, जबकि पुराना सिस्टम केवल 32,000 टिकट ही बुक कर पाता था। यानी इसकी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इसके अलावा, सीट उपलब्धता देखने की क्षमता भी बहुत बढ़ जाएगी। पहले यह 4 लाख अनुरोध प्रति मिनट संभालता था, लेकिन अब यह 40 लाख तक पहुंच जाएगी। इससे पीक सीजन में भी टिकट बुकिंग आसानी से हो सकेगी और सर्वर डाउन होने की समस्या कम हो जाएगी। नए सिस्टम में यात्रियों को कई नई सुविधाएं भी मिलेंगी। अब लोग एयरलाइन की तरह अपनी पसंद की सीट चुन सकेंगे। परिवार या ग्रुप के लोग एक साथ सीट बुक कर पाएंगे। इससे यात्रा और आरामदायक हो जाएगी।
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इसके साथ ही फेयर कैलेंडर की सुविधा भी मिलेगी, जिससे अलग-अलग तारीखों के किराए की जानकारी पहले से मिल जाएगी। दिव्यांग और मरीज यात्रियों के लिए भी विशेष सुविधाएं जोड़ी जाएंगी। रेलवे का नया मोबाइल एप “रेलवन” इस सिस्टम का नया रूप होगा। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से यह भी बताया जाएगा कि वेटिंग टिकट कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। नया सिस्टम कई भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होगा, जिससे देश के हर कोने के लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकेंगे। कुल मिलाकर यह बदलाव यात्रियों के लिए बहुत फायदेमंद होगा और टिकट बुकिंग को तेज, आसान और भरोसेमंद बनाएगा।

















