भारत की सनातन परंपरा और सर्वसमावेशी हिंदू धर्म को लेकर समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी के लगातार सामने आ रहे हिंदू, ब्राह्मण समाज, संतों और धार्मिक ग्रंथों पर विवादित बयानों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या उनके द्वारा सुनियोजित तरीके से हिंदू आस्था और उसकी सांस्कृतिक जड़ों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
“कोई ब्राह्मण अच्छा नहीं होता” बयान पर केस दर्ज: BNS की धारा 196(1) के तहत कार्रवाई
दरअसल, नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में “कोई ब्राह्मण अच्छा नहीं होता” जैसे बयान देने वाले भाटी के खिलाफ अब प्राथमिकी (FIR) दर्ज हो चुकी है, लेकिन विवाद सिर्फ इस एक बयान तक सीमित नहीं है।
पिछले कई वर्षों में उनके अनेक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट सामने आए हैं, जिनमें रामचरितमानस, मनुस्मृति, साधु-संतों, कथावाचकों और हिंदू परंपराओं को अपमानजनक तरीके से निशाना बनाया गया है।
“कोई ब्राह्मण अच्छा नहीं होता” बयान पर केस दर्ज
विवाद की शुरुआत 5 मई 2026 को नई दिल्ली के जवाहर भवन में आयोजित एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम से हुई।
कार्यक्रम के दौरान समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी ने मंच से कहा-
“न ब्राह्मण अच्छा है, न वेश्या… कुछ वेश्याएं अच्छी हो सकती हैं, लेकिन कोई ब्राह्मण अच्छा नहीं होता।”
यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और ब्राह्मण समाज सहित कई संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। भाजपा नेता अजय शर्मा की शिकायत पर कवि नगर पुलिस स्टेशन में भाटी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1) के तहत मामला दर्ज किया गया। यह धारा समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने से संबंधित है।
विवाद के बाद राजकुमार भाटी के कई पुराने इंटरव्यू और डिबेट क्लिप फिर सामने आए। इनमें वे हिंदू ग्रंथों और धार्मिक प्रतीकों पर तीखी टिप्पणियां करते दिखाई दिए।
एक वायरल वीडियो में भाटी कहते नजर आए है-
“मनुस्मृति एक कूड़ा ग्रंथ है, उसमें एक भी चीज उपयोगी नहीं है।”
उन्होंने रामचरितमानस को लेकर भी विवादित टिप्पणी की और कहा कि वे भगवान राम को अपना आदर्श नहीं मानते। इसी तरह से एक अन्य इंटरव्यू में उन्होंने कहा-
“मैं राम को आदर्श नहीं मानता और भगवान में भी विश्वास नहीं रखता।”
इन बयानों के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत विचार हैं या हिंदू धर्म को लगातार निशाना बनाने की एक राजनीतिक रणनीति।
संतों और कथावाचकों पर भी टिप्पणी
राजकुमार भाटी केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने कई हिंदू संतों और कथावाचकों को लेकर भी विवादित बयान दिए।
अप्रैल 2026 में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने- जगद्गुरु रामभद्राचार्य को “गुरु घंटाल” कहा, जबकि कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री को “फर्जी बाबा” बताया।
उन्होंने कहा-
“इनको भाव मत दो, ये सब बाबा फर्जी हैं।”
इस बयान के बाद संत समाज में नाराजगी बढ़ गई। कई धार्मिक संगठनों ने इसे सनातन परंपरा का अपमान बताया है।
‘ब्राह्मण दूसरों का हक खाता है’ : राजकुमार भाटी
एक अन्य जनसभा में राजकुमार भाटी ने आरक्षण और ब्राह्मण समाज को जोड़ते हुए विवादित बयान दिया।
उन्होंने कहा कि-
“अगर हमारा हक कोई और नहीं खा रहा होता, तो हमें आरक्षण की जरूरत नहीं पड़ती। हमारा हक शुक्ला जी, त्रिपाठी जी और तिवारी जी खा रहे थे।”
इस बयान को लेकर उन पर समाज में जातीय विभाजन पैदा करने के आरोप लगे। एफआईआर दर्ज करानेवाले भाजपा नेता अजय शर्मा का कहना है कि इस तरह की बयानबाजी सामाजिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है।
हिंदू परंपराओं पर सवाल
दिसंबर 2025 में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान भाटी ने हिंदू परंपराओं और मनुस्मृति को लेकर कई विवादित बातें कहीं।
उन्होंने कहा-
हिंदू धर्म की कई परंपराओं से “इस्लाम बेहतर” है, क्योंकि वहां “स्पष्टता” है।
इसके अलावा भगवान जगन्नाथ यात्रा से जुड़ी एक दुर्घटना पर उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट करते हुए पुजारियों और धार्मिक मान्यताओं पर कटाक्ष किया था।
उनकी इन टिप्पणियों को लेकर लोगों ने आरोप लगाया कि वे लगातार हिंदू आस्था और परंपराओं को निशाना बना रहे हैं।
विहिप की प्रतिक्रिया: विनोद बंसल बोले- “वोट बैंक के लिए हिंदू आस्था का अपमान बर्दाश्त नहीं”
राजकुमार भाटी के बयानों को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या वोट बैंक की राजनीति के लिए हिंदू समाज के भीतर विभाजन पैदा करने की कोशिश की जा रही है।
इस संबंध में विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल साफ कहते हैं कि हिंदू धर्म दुनिया के सबसे प्राचीन और सर्वसमावेशी धर्मों में से एक है। “वसुधैव कुटुंबकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” जैसे विचार इसी सनातन परंपरा से निकले हैं। हिंदू धर्म ने सदियों से अलग-अलग विचारों, जातियों, भाषाओं और परंपराओं को साथ लेकर चलने का संदेश दिया, किंतु हाल के वर्षों में देखा जा रहा है कि कुछ राजनीतिक और वैचारिक समूह हिंदू धर्म के प्रतीकों, देवी-देवताओं, संतों और ग्रंथों को लगातार विवादों के केंद्र में लाकर सामाजिक ध्रुवीकरण पैदा करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर अगर किसी एक धर्म और उसकी आस्थाओं को बार-बार अपमानित किया जाए, तो यह सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं रह जाता, बल्कि सामाजिक वैमनस्य फैलाने का माध्यम बन जाता है। ऐसे में हम इस प्रकार के सभी बयानों का विरोध करते हैं।
सोशल मीडिया पर बढ़ा विरोध
राजकुमार भाटी के बयानों को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार विरोध देखा जा रहा है। कई हिंदू संगठनों और ब्राह्मण समाज के लोगों ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि अगर किसी दूसरे धर्म या समुदाय के खिलाफ ऐसी टिप्पणी की जाती, तो राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा विवाद खड़ा हो जाता। फिलहाल भाटी के खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है और उनके पुराने बयानों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है।

















