पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार बनने के बाद राज्य ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। वर्षों के दमन, तुष्टिकरण और हिंसा के अंधकार को दूर करते हुए सोनार बांग्ला की धरती पर भाजपा युग की शुरुआत हो गई है। बंगाल की जनता ने सिर्फ सत्ता परिवर्तन के लिए जनादेश नहीं, बल्कि आतंक के गुंडा राज के अंत और रामराज्य की स्थापना का संकल्प करते हुए अपना निर्णय दिया है, जिसे भाजपा सरकार अमलीजामा पहना रही है।
राज्य के नए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी बड़े और कड़े फैसले तेजी से लेकर साबित कर रहे हैं कि अब बंगाल में सिंडिकेट नहीं बल्कि संविधान से चलेगा। सुवेंदु के कड़े फैसलों ने उन ताकतों को धूल में मिला दिया है, जिसने दशकों तक बंगाल की अस्मिता को गिरवी रखा था।
भ्रष्टाचार और घुसपैठियों का सफाया है प्राथमिकता
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी नई सरकार के गठन के साथ ही नई ऊर्जा और स्पष्ट मानसिकता के साथ कड़े और बड़े फैसले ले रहे हैं। भाजपा सरकार की प्राथमिकता भ्रष्टाचार का खात्मा और घुसपैठियों का सफाया है। बंगाल में सरकार गठन के कुछ ही दिनों के भीतर मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्रशासनिक, जन कल्याण और राजनीतिक सहित अन्य मोर्चों पर तेज और बड़े फैसले लेकर यह साफ कर दिया है कि उनकी सरकार राज्य में जरूरी बदलाव की शुरुआत करने जा रही है।
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45 दिन के अंदर BSF को बाड़बंदी के लिए मिलेगी जमीन
सुवेंदु सरकार में पहला बड़ा कदम घुसपैठ रोकने और घुसपैठियों के खिलाफ बड़े अभियान की शुरुआत है। पश्चिम बंगाल में घुसपैठ करने वाले बांग्लादेशियों और अन्य घुसपैठियों की अब खैर नहीं है। भाजपा सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में ही सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) को 45 दिनों में जमीन देने की घोषणा अवैध घुसपैठ के खिलाफ सबसे बड़ा कदम है। सरकार का दूसरा बड़ा कदम गौ तस्करों पर कड़ी कार्रवाई है। गौ तस्करी को भाजपा ने चुनाव में एक बड़ा मुद्दा बनाया था। अब भाजपा सरकार इस पर बड़ी कार्रवाई की दिशा में अग्रसर है। पश्चिम बंगाल के सभी अवैध और बिना लाइसेंस वाले पशु बाजारों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दे दिया गया है।
अवैध टोल वसूली पर एक्शन
सुवेंदु सरकार का तीसरा बड़ा कदम अवैध टोल वसूली से आमजन को मुक्ति दिलाने का है। भाजपा सरकार ने अवैध टोल और ड्रॉप गेट के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल के स्तर से बिना अनुमति के चल रहे सभी वसूली केंद्रों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है। चौथा बड़ा कदम अपराधियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई है, जिससे वहां की जनता लम्बे समय से भुगत रही थी और इसको अपना नसीब मान लिया था। भाजपा सरकार अपराधियों को घुटनों पर लाकर कानून राज की स्थापना करने को अपना मुख्य कार्य मानकर चल रही है।
इसके तहत 16 मई से पूरे राज्य में दो सप्ताह तक अवैध हथियार, कारतूस जब्ती अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावे 2021 के चुनाव के बाद हिंसा से जुड़ी एफआईआर पर अब कार्रवाई करने की भी तैयारी चल रही है। भाजपा सरकार का पांचवा महत्वपूर्ण कदम शिक्षक भर्ती घोटाला के दागी शिक्षकों पर नकेल कसना है। शुभेंदु अधिकारी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए दागी शिक्षकों से ब्याज सहित वेतन वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दिया है जो पूरे देश में भाजपा सरकारों की भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति का नमूना है।
जंगलराज था ममता का शासन
बिहार में लालू यादव के शासन की तरह ही पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के शासन को जंगल राज कहा जाता था और इस जंगल राज का सबसे बड़ा नमूना सड़कों पर अवैध टोल वसूली था। बिना किसी नियम कायदे के बंगाल की सड़कों पर गुजरने वाले ट्रकों और अन्य वाहनों से तृणमूल कांग्रेस पार्टी के नेता और कार्यकर्ता जबरन टोल वसूलते थे। लेकिन अब नई सरकार ने पूरे राज्य में अवैध टोल सिंडिकेट्स के खिलाफ विशेष अभियान छेड़ दिया है। राज्य के नए मुख्य सचिव मनोज कुमार अग्रवाल ने एक सख्त निर्देश जारी करते हुए सड़कों पर मौजूद सभी अवैध टोल प्लाजा बैरिकेड्स वसूली केंद्रों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया है।
अवैध टोल पर कार्रवाई का दिख रहा असर
अवैध टोल वसूली पर कार्रवाई का असर सड़कों पर भी दिख रहा है। कई जगहों पर अवैध टोल वसूली वाले लोग जो बदमाश थे वो पहले ही भाग गए हैं और जिसकी वजह से ट्रक और अन्य वाहन बिना कोई पैसे दिए आराम से सड़कों पर गुजर रहे हैं। भाजपा सरकार के इस कदम से वाहन चालकों और वाहन मालिक काफी खुश नजर आ रहे हैं।
बंगाल पुलिस और बीएसएफ के बीच रिलय टाइम समन्वय अनिवार्य
पश्चिम बंगाल की भाजपा सरकार का सबसे बड़ा प्रहार सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर है। बंगाल पुलिस और बीएसएफ के बीच अब रियल टाइम समन्वय को अनिवार्य कर दिया है। अब राज्य पुलिस को घुसपैठ रोकने के लिए केवल अपनी खुफिया जानकारी पर निर्भर रहने के बजाय बीएसएफ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करने का फैसला लिया गया है। अब बंगाल पुलिस को सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों के साथ हर महीने में बैठक करने का निर्णय लिया गया है। घुसपैठियों के बारे में खुफिया सूचनाएं साझा करके तुरंत कार्रवाई किया जाएगा। इन बैठकों की विस्तृत रिपोर्ट को आईजी पुलिस और खुफिया ब्यूरो को सौंपी जाएगी। सरकार का मानना है कि राज्य में शांति बहाली के लिए आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है और जंगल राज को खत्म करने की दिशा में इसे पहला बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि घुसपैठियों से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल में भी अब असम मॉडल को अपनाया जाएगा। राज्य की जनसंख्या के आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं कि बंगाल में बड़ी तादाद में बांग्लादेशियों ने घुसपैठ की है। आजादी के बाद से ही बंगाल में मुस्लिम आबादी देश के अन्य राज्यों की तुलना में बहुत तेजी से बढ़ी है। इसकी गवाही बढ़ती हुई आबादी देता है।
पश्चिम बंगाल में लगातार बढ़ी मुस्लिम आबादी
पश्चिम बंगाल के जनसंख्या के आंकड़ों की बात करें तो 1951 में पश्चिम बंगाल में मुसलमानों की आबादी 19.8% थी जो 2011 में बढ़कर 27% हो गई है। 1951 के बाद राज्य की जनसंख्या में 7.2% मुस्लिम हिस्सेदारी बढ़ी है। 1951 में पश्चिम बंगाल में करीब 51 लाख मुसलमान थे जो 2011 में लगभग पांच गुना बढ़कर 2 करोड़ 47 लाख हो गई है। 2027 में ये आकड़े और भी बढ़ सकती है। वहीं मुस्लिम आबादी बढ़ने की तुलना पूरे देश से की जाए तो 1951 के बाद मुसलमानों की आबादी में 4.3% की ही बढ़ोतरी हुई है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी की बढ़ोतरी 7.2 प्रतिशत हैं जो पूरे देश के औसत के मुकाबले करीब-करीब दोगुनी रफ्तार से बढ़ी है। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में 1951 में 78.7% हिंदू आबादी थी जो 2011 में घटकर 70.5% रह गई है. राज्य में हिंदुओं की आबादी में पूरे 8.2% की गिरावट आई है।

















