धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र वह भूमि है जो असंख्य घटनाओं, सच्चे किस्से और कहानियों की साक्षी है। बीआर चोपड़ा के कालजयी धारावाहिक महाभारत में द्रोपदी का अमर किरदार निभाने वाली अभिनेत्री और पूर्व सांसद रूपा गांगुली 2024 में कुरुक्षेत्र पहुंचीं थीं। यह उनकी केवल एक यात्रा नहीं थी, बल्कि आस्था, पीड़ा और संकल्प का अद्भुत संगम बन कर इतिहास में दर्ज हो गई।
पश्चिम बंगाल के चुनावी नतीजे आ चुके हैं। ममता बैनर्जी को परास्त कर यहां भाजपा की सरकार बन चुकी है और नये मुख्यमंत्री के साथ उनकी कैबिनेट शपथ ले चुकी है, मगर इससे पहले एक शपथ रील लाइफ की द्रोपदी यानी रुपा गांगुली ने भी ली थी,वह भी महाभारत की भूमि कुरुक्षेत्र में।
महाभारत कालीन 48 कोस के कुरुक्षेत्र यानी वर्तमान में हरियाणा के पांच जिलों कुरुक्षेत्र,कैथल,करनाल,पानीपत और जींद में सैंकड़ों पौराणिक तीर्थ हैं, इन्हीं में से एक है महाभारत कालीन द्रोपदी कूप। रुपा गांगुली जब कुरुक्षेत्र पहुंचीं तो वह भी द्रोपदी कूप के दर्शन करने गईं थीं। द्रोपदी के समक्ष खड़ी रूपा गांगुली मानो स्वयं द्वापर की द्रोपदी की स्मृतियों में उतर गईं थीं। उन्होंने उस पौराणिक कथा को आत्मसात किया, जिसके अनुसार महाभारत युद्ध के उपरांत द्रोपदी ने इसी कूप के जल से अपने केश धोकर अपमान और वेदना से मुक्ति पाई थी।
उस क्षण रूपा गांगुली ने भी भावुक होकर प्रतिज्ञा ली थी कि वह पुनः कुरुक्षेत्र लौटेंगी, ब्रह्मसरोवर का पवित्र जल लेकर द्रोपदी कूप में अपने केश धोएंगी और आरती में सम्मिलित होकर आत्मशुद्धि का अनुभव करेंगी। यह प्रतिज्ञा केवल धार्मिक भावना नहीं थी, बल्कि उनके निजी जीवन के गहरे घावों से भी जुड़ी हुई थी। कुरुक्षेत्र आगमन पर उन्होंने एक दर्दनाक घटना का स्मरण करते हुए बताया था कि भाजपा महिला मोर्चा की जिम्मेदारी संभालते समय एक कार्यकर्ता के घायल होने पर वह उसे अस्पताल ले जा रहीं थीं। इसी दौरान उन पर हमला हुआ था। हमलावरों ने उन्हें गाड़ी से घसीटकर नीचे जमीन पर पटक दिया और बेरहमी से पीटा था। उस हमले की पीड़ा आज भी उनके शरीर में जीवित है। आंखों की रोशनी का एक हिस्सा चला गया और सिर में गंभीर चोटों के कारण रक्त के थक्के जम गए थे। वह अपने लंबे बालों में कंगी करते समय असहनीय पीड़ा झेल चुकी हैं, जिसके बाद उन्होंने स्वयं अपने केश काटने शुरू किए थे।
रील लाइफ की द्रोपदी का यह जीवन संघर्ष मानो वास्तविक वेदना की कथा बन गया। अब जब बंगाल की राजनीति में परिवर्तन और भाजपा सरकार बनने की आशा के साथ उनकी पुरानी प्रतिज्ञा फिर चर्चा में है, तो कुरुक्षेत्र का द्रोपदी कूप एक बार फिर इतिहास और वर्तमान के बीच सेतु बनता दिखाई दे रहा है। उनके निजी सचिव ने कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेंद्र सिंघल से संपर्क कर रुपा गांगुली के द्रोपदी कूप पर केश धोने के लिए जल्द आने की जानकारी भी दे दी है।कुरुक्षेत्र की पावन हवाओं में अब प्रतीक्षा है उस क्षण की, जब परदे की द्रोपदी अपनी प्रतिज्ञा पूर्ण करने फिर उसी कूप के सामने खड़ी होंगी, जहां आस्था और इतिहास आज भी एक साथ सांस लेते हैं।











