पाकिस्तान दोगला है और झूठा भी। ये बात कई बार कही जा चुकी है। ऑपरेशन सिंदूर के मामले में एक बार फिर से ये साबित हो गया है। अमेरिकी दस्तावेजों से ऐसे चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जो ये साबित करते हैं कि 6-7 मई 2025 को जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया तो घबराए पाकिस्तान ने करीब 60 बार अमेरिका से भारत को रोकने के लिए गिड़गिड़ाया था।
जबकि, पाकिस्तानी सेना के जनरल और कथित फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने हाल में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने अमेरिका के रास्ते युद्ध रोकने की बात कही थी। लेकिन अमेरिकी दस्तावेजों से उसके इस झूठ की पोल खुल गई है।
अमेरिकी FARA रिकॉर्ड क्या कहते हैं
अमेरिका के विदेशी एजेंट पंजीयन एक्ट (FARA) के तहत पाकिस्तान की तरफ से की गई फाइलिंग में साफ दिखता है कि 6 मई से 9 मई 2025 के बीच पाकिस्तान ने अमेरिका में बहुत सक्रियता दिखाई। इस तीन-चार दिन के अंदर पाकिस्तानी अधिकारियों ने अमेरिकी सांसदों, उनके सहयोगियों, रक्षा अधिकारियों, खजाना मंत्रालय के लोगों, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और पत्रकारों से लगभग 60 बार संपर्क किया था।
ये संपर्क ईमेल, फोन कॉल्स और आमने-सामने की बैठकों के जरिए किया गया था। ज्यादातर में पाकिस्तान के राजदूत की तरफ से बैठक का अनुरोध किया गया था।
मुनीर का दावा और हकीकत
रविवार को रावलपिंडी में एक समारोह में मुनीर ने दावा किया कि भारत ने अमेरिका के जरिए मध्यस्थता चाही थी। लेकिन FARA दस्तावेज बताते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर शुरू होने के बाद पाकिस्तान ही अमेरिका से लगातार मदद और दखल की अपील कर रहा था। भारत की तरफ से उस समय कोई ऐसी राजनयिक या रक्षा गतिविधि नहीं दिखी, जिसमें युद्ध रोकने के लिए अमेरिका से संपर्क किया गया हो। भारत की कोशिशें मुख्य रूप से पहलगाम आतंकी हमले की निंदा करवाने और समर्थन जुटाने तक सीमित थीं।
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ऑपरेशन सिंदूर
पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया था। 6 और 7 मई 2025 की दरमियानी रात को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और गुलाम जम्मू-कश्मीर में 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए। रक्षा मंत्रालय ने साफ कहा था कि यह कार्रवाई सिर्फ आतंकियों के ठिकानों पर थी, किसी पाकिस्तानी सैन्य जगह को निशाना नहीं बनाया गया।
पाकिस्तान की गतिविधियां
FARA की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि युद्ध शुरू होते ही 6 मई को पाकिस्तान ने वॉशिंगटन में करीब 30 बार संपर्क किया। इसमें उसने ज्यादातर कांग्रेस और सीनेट सदस्यों के ऑफिस में बैठक की मांग थी। 7 और 8 मई में तनाव कम करने पर चर्चा की कोशिश चली। भारत के हमले तेज होते ही 9 मई को ये गतिविधियां सबसे ज्यादा थीं। उस दिन करीब 20-25 बैठकें रक्षा और नेशनल सिक्योरिटी अधिकारियों के साथ की गई। उसी दिन सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी से जुड़े लोगों और डिफेंस मामलों के प्रभावशाली अधिकारियों से संपर्क हुआ। एक बड़े अमेरिकी अखबार के पत्रकार से भी इंटरव्यू के लिए बात की गई थी।

















