अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई को UAE के दौरे पर जा रहे हैं। इसको लेकर स्पष्ट किया गया है कि ऊर्जा सुरक्षा भारत की मौजूदा प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। पश्चिम एशिया में चल रही अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 मई को UAE का दौरा करेंगे। यह यूरोप की अपनी चार देशों की यात्रा से पहले का स्टॉपओवर है, जो आखिरी समय में जोड़ा गया है।
इंडियन एक्सप्रेस ने सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति ही प्रधानमंत्री को UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मिलने का फैसला करने का एक बड़ा कारण है। UAE के साथ भारत का व्यापक सामरिक साझेदारी का रिश्ता है और वहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं।
UAE से यूरोप जाएंगे प्रधानमंत्री मोदी
UAE से निकलकर पीएम मोदी यूरोप जाएंगे। इसी के तहत प्रधानमंत्री 15-17 मई को नीदरलैंड्स, स्वीडन और फिर 17-19 मई को नार्वे व 19-20 मई को इटली जाएंगे।
पश्चिम एशिया की स्थिति और UAE पर असर
28 फरवरी से पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद UAE ईरानी मिसाइल हमलों का मुख्य निशाना रहा है। तेहरान का आरोप है कि UAE अमेरिकी सैन्य ठिकानों, सुविधाओं और लोगों को जगह दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट ने दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित किया है, जिसमें भारत भी शामिल है। इसी दौरान UAE ने OPEC और OPEC प्लस से बाहर निकलने की घोषणा की। ये दोनों संगठन सऊदी अरब के नेतृत्व वाले तेल उत्पादक देशों के समूह हैं। भारत ने UAE और ईरान के बीच संतुलन बनाए रखते हुए UAE पर हुए हमलों की बार-बार निंदा की है।
हाल के घटनाक्रम
5 मई को ईरानी ड्रोन हमले के बाद फुजैराह में आग लगने से तीन भारतीय नागरिक घायल हो गए थे। अगले ही दिन प्रधानमंत्री मोदी ने हमलों की कड़ी निंदा की और कहा कि नागरिकों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना स्वीकार्य नहीं है। विदेश मंत्रालय ने अलग बयान में शत्रुता तुरंत रोकने और नागरिकों व बुनियादी ढांचे पर हमले बंद करने की अपील की। अप्रैल के आखिरी हफ्ते में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल UAE गए और अबू धाबी में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मिले। इससे एक हफ्ते पहले वे सऊदी अरब भी जा चुके थे। डोभाल सुरक्षा और सामरिक मुद्दों, खासकर आतंकवाद विरोधी सहयोग पर UAE के साथ समन्वय करते रहे हैं। उनकी यात्रा ने मोदी की यात्रा की जमीनी तैयारी की।
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होर्मुज बंद होने से बाधित हुआ व्यापार
पिछले दो महीनों में होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से UAE के साथ व्यापार बाधित हुआ है। सिर्फ 11 भारतीय जहाज ही इस जलडमरूमध्य से गुजर पाए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले दो महीनों में UAE, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के नेताओं से बात की है। विदेश मंत्री एस जयशंकर भी अपने समकक्षों से संपर्क में रहे। अप्रैल में जयशंकर UAE राष्ट्रपति से मिले और कहा कि जटिल क्षेत्रीय माहौल के बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद मजबूत और पारदर्शी बना हुआ है।
UAE में करीब 47 लाख भारतीय रहते हैं। ये UAE की आबादी का करीब 35 प्रतिशत हैं। भारतीय समुदाय वहां सबसे बड़ी जातीय समुदाय है। UAE से भारत को होने वाले वार्षिक रेमिटेंस दुनिया में सबसे ज्यादा में से एक है। 1970 के दशक में भारत-UAE व्यापार मात्र 180 मिलियन डॉलर था, जो 2023-24 में बढ़कर 84 बिलियन डॉलर हो गया। UAE अब भारत का चीन और अमेरिका के बाद तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
अप्रैल 2000 से सितंबर 2024 तक UAE से भारत में FDI लगभग 22 बिलियन डॉलर (कुल FDI का 3.1%) आया है। UAE ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 75 बिलियन डॉलर निवेश करने की प्रतिबद्धता जताई है।

















