पाकिस्तान की मीडिया में इन दिनों एक तस्वीर वायरल है। बिंदी लगाए हुए और सफेद साड़ी पहने हुए एक महिला को बुर्कानशी महिला पुलिसकर्मियों ने पकड़ा हुआ है। ऐसा लग रहा है कि जैसे वह बड़ी अपराधी हों। पाकिस्तान में यह पता ही नहीं चलता कि कब किस बहाने से किसे अपराधी ठहरा दिया जाए, मगर इस तस्वीर को देखकर पहली बार तो ऐसा भ्रम होता है कि किसी हिंदू महिला को पाकिस्तानी पुलिस ने पकड़ लिया है।
हालांकि ये हिंदू नहीं हैं। ये पाकिस्तान की फेमिनिस्ट और भरतनाट्यम कलाकार शीमा किरमानी हैं। उनकी उम्र 75 वर्ष है और वह मार्क्सवादी विचारों की समर्थक हैं। शीमा किरमानी बलूच लोगों की भी आवाज उठाती रहती हैं और पाकिस्तान में महिलाओं के अधिकारों पर भी बात करती हैं। उन्हें मंगलवार को कराची प्रेस क्लब के बाहर से हिरासत में लिया गया। पाकिस्तान में महिला अधिकारों के लिए काम करने वाली एक 75 वर्षीय महिला को घसीटकर कार में बैठाया जा रहा है। अब इस वीडियो को लेकर पाकिस्तान में हंगामा है।
सोशल मीडिया पर लोग इस घटना का विरोध कर रहे हैं। लोग यह प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर क्यों एक 75 वर्षीय महिला के साथ इस तरह से धक्का मुक्की की गई। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया, मगर इस घटना ने पाकिस्तान में महिलाओं की आजादी की बात करने वाले कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर प्रश्न चिह्न तो लगा ही दिया है। इस घटना ने यह तो बता ही दिया है कि पाकिस्तान की सरकार अपने यहां की महिलाओं के साथ किस तरह का व्यवहार करती है। यह कैसी विडंबना है कि पाकिस्तान में अब सिंध में भी कट्टरपंथ इस सीमा तक हावी हो गया है कि वह शीमा किरमानी को अपनी बात रखने से रोके?
शीमा ने भी एक्स पर एक वीडियो में यह कहा कि उन्हें ऐसा लगता था कि सिंध में नागरिक समाज के लोग आवाज उठा सकते हैं, सिंध में लोगों को बात करने की और बात रखने की आजादी है, मगर अब यह आजादी भी नहीं रह गई है।
कौन हैं शीमा किरमानी?
शीमा पाकिस्तान की एक प्रमुख शास्त्रीय नृत्यांगना, अभिनेत्री, कोरियोग्राफर, रंगकर्मी और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। उनके पिता पाकिस्तानी सेना में ब्रिगेडियर थे। वे भरतनाट्यम में निपुण हैं और भारत में लीला सैमसन, आलोका पणिक्कर से भी नृत्य की शिक्षा ली है। वे साड़ी में ही नृत्य करती हैं और साड़ी पहनकर नृत्य करना उनके लिए प्रतिरोध का प्रतीक बन गया है।
महिलाओं के लिए औरत मार्च की स्थापना
उन्होंने महिलाओं के अधिकारों के लिए तहरीक-ए-निस्वां नामक सांस्कृतिक मंच का गठन किया है। औरत मार्च की भी संस्थापक सदस्यों में से एक हैं। औरत मार्च महिलाओं के अधिकारों के लिए वर्ष 2018 में शुरू किया गया एक आंदोलन है। यह कराची, लाहौर, इस्लामाबाद आदि शहरों में अलग-अलग तारीखों पर होता है।
मंगलवार 6 मई 2026 को उन्हें इसलिए कराची प्रेस क्लब के बाहर से हिरासत में ले लिया गया, क्योंकि वे मई में मदर्स डे के आसपास प्रस्तावित औरत मार्च के लिए नो अब्जेक्शन सर्टिफिकेट मांगने जा रही थीं। उनके साथ उनके साथी और अन्य कार्यकर्ता भी थे। पुलिस ने उन्हें इकट्ठा होने से रोका, और हिरासत में ले लिया। हालांकि उन्हें जल्दी ही रिहा कर दिया गया, मगर उनकी गिरफ्तारी का वीडियो वायरल हो गया।
सिंध पुलिस के तीन अधिकारी निलंबित
इस घटना के बाद जब सरकार की थूथू हुई और सोशल मीडिया से लेकर मीडिया तक आलोचना हुई तो सिंध पुलिस ने तीन अधिकारियों डीएसपी नासिर अफरीदी, एसएचओ हिना मुग़ल, और एसएचओ नदीम को निलंबित कर दिया।
भारत के फेमिनिस्ट जगत में शून्य हलचल
गाजा तक के लिए आवाज उठाने वाली और बहनापा दिखाने वाली भारत की फेमिनिस्ट औरतें शीमा किरमानी के साथ हुए इस दुर्व्यवहार की निंदा नहीं कर रही हैं। शीमा खुद को मार्क्सवादी कहती हैं, मगर फिर भी भारत में खुद को मार्क्सवादी, महिलवादी आदि आदि कहने वाले पूरी तरह से चुप्पी साधे हुए बैठे हैं।

















