जम्मू में 2 और 3 मई को भारत-तिब्बत सहयोग मंच की दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक एवं विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ। गोष्ठी का विषय था-’21वीं सदी में हिमालय : भारत की सुरक्षा, चुनौतियां और उभरते आयाम।’ इसमें देशभर से आए प्रबुद्धजनों, नीति-निर्माताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिमालय के सामरिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व पर चर्चा की।
भारत-तिब्बत सहयोग मंच के मार्गदर्शक श्री इंद्रेश कुमार ने हिमालय को भारत का प्राकृतिक सुरक्षा कवच बताते हुए कहा कि इसके सांस्कृतिक, सामरिक या पारिस्थितिकी संतुलन को बिगाड़ने का कोई प्रयास भारत की संप्रभुता के लिए चुनौती है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल के सदस्य श्री रूपेश कुमार ने भारत-तिब्ब्त सहयोग मंच के कार्यों की प्रशंसा की। साथ ही कार्यकर्ताओं से संगठन के विस्तार और नवीन योजनाओं और कार्यक्रमों द्वारा जन-जन तक पहुंचने का आह्वान किया।
केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के पूर्व शिक्षा मंत्री थुपटेन लुंगरिंग ने भू-राजनीतिक परिवर्तनों पर चिंता जताते हुए कहा कि हिमालय की कोई हलचल एशिया की शांति प्रभावित करती है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए ले. जनरल आर.के. शर्मा (सेनि.) ने सामरिक तैयारी, पर्यावरण संवेदनशीलता एवं सामाजिक जागरूकता के समन्वित दृष्टिकोण पर जोर दिया।

















