गत 2 मई को जयपुर में नारद जयंती के अवसर पर पत्रकार सम्मान समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में प्रिंट मीडिया से मदन कलाल, इलेक्ट्रोनिक मीडिया से लखवीर सिंह शेखावत और वेब मीडिया से रामगोपाल जाट को देवर्षि नारद सम्मान दिया गया। निबंध लेखन के लिए छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र दिए गए।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, राजस्थान क्षेत्र प्रचारक श्री निम्बाराम ने कहा कि समाज में वास्तविक परिवर्तन सत्ता के बल पर नहीं, बल्कि समाज की जागरूकता और एकजुटता से संभव होता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी। उन्होंने कहा कि पत्रकारों के समक्ष आज सबसे बड़ी चुनौती तेजी के साथ सत्यता बनाए रखना है। जल्दबाजी में कई बार समाचारों में त्रुटियां हो जाती हैं, जिससे समाज में भ्रम और नकारात्मकता फैलती है।
उन्होंने कहा कि नारद जी ने कंस और रावण जैसे शक्तिशाली शासकों के समक्ष भी निर्भीक होकर सत्य का संदेश दिया। युधिष्ठिर को राजधर्म का बोध कराया। नारद जी के जीवन से हमें मर्यादा, सत्य और निष्पक्षता का पालन करने की प्रेरणा मिलती है।
उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे सनसनीखेज प्रस्तुति से बचें। समाचारों को संतुलन तथा जिम्मेदारी के साथ प्रस्तुत करें। उनके अनुसार पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि एक प्रकार का धर्म है, जिसे नैतिकता और गंभीरता के साथ निभाया जाना चाहिए।
उन्होंने पत्रकारिता को ‘धर्म’ बताते हुए देवर्षि नारद का उदाहरण दिया, जिनकी विश्वसनीयता और प्रामाणिकता के कारण उन्हें हर स्थान पर सम्मान मिला। उन्होंने कहा कि आज के पत्रकारों को भी सत्यनिष्ठ, जिम्मेदार और संतुलित रहकर कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वदेश समूह के सलाहकार संपादक श्री गिरीश उपाध्याय ने कहा कि देवर्षि नारद निर्भय होकर सत्य कहने के प्रतीक थे। यही गुण आज की पत्रकारिता में आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि भले ही फिल्मों में नारद जी को अलग रूप में दिखाया गया हो, लेकिन वे वास्तव में लोकधर्म और सत्य के वाहक थे। उन्होंने कहा कि पत्रकार का कार्य केवल स्तंभ की भांति निष्क्रिय रहना नहीं, बल्कि समाज में सक्रिय भूमिका निभाना है। उन्होंने वर्तमान समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को पत्रकारिता के सामने उभरती चुनौती बताते हुए कहा कि तकनीक के इस दौर में मानवीय संवेदनाओं, विवेक और संतुलन को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है।

















